Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

इला रमेश भट्ट

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

इला भट्ट Ela Bhatt with her grandchildren (cropped).jpg इला भट्ट (2009) yes 1933 9 7 अहमदाबाद, गुजरात अहमदाबाद, गुजरात भारतीय भारतीय B.A., LL.B.; Diploma of Labor and Cooperatives; Sarvajanik Girls High School, Surat; M.T.B. College, Surat; Afro-Asian Institute of Labor and Cooperatives, Tel Aviv Lawyer, Philanthropist, Activist SEWA, The Elders founded SEWA रमेश भट्ट Sumantrai Bhatt, Vanalila Vyas पद्मश्री 1985; पद्म भूषण 1986; रेमन मैगसेसे पुरस्कार 1977; Right Livelihood Award 1984; निवानो शांति पुरस्कार; Doctorate degree in Humane Letters, हार्वर्ड विश्वविद्यालय 2001; शांति, निरस्त्रीकरण व विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार2011 इला रमेश भट्ट (जन्म - ७ सितंबर १९३३) भारत की एक प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिन्होंने भारत की महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया। 1972 में सेल्फ-एम्पलॉयड वीमन एसोसिएशन (सेवा) नामक महिला व्यापार संघ की स्थापना की थी। 12 लाख से अधिक महिलाएं इसकी सदस्य हैं। इसी तरह उन्होंने 1974 में सेवा को-ऑपरेटिव बैंक की स्थापना की थी। उन्हें 13 मई २०१० को 2010 के निवानो शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्तमान में वे भारतीय रिज़र्व बैंक के केन्द्रीय बोर्ड की एक निदेशक भी हैं।http://rbi.org.in/scripts/AboutusDisplay.aspx#CB संग्रहीत प्रति 16 सितंबर 2013 https://web.archive.org/web/20140607022939/http://www.rbi.org.in/scripts/AboutUsDisplay.aspx#CB 7 जून 2014 live भारत के पहले मज़दूर संगठन कपड़ा कामगार संघ के महिला प्रकोष्ठ के नेतृत्व से 1968 में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाली इला भट्ट ने अनौपचारिक क्षेत्र में श्रम करने वाली ग़रीब स्त्रियों को सम्पूर्ण रोज़गार दिलाने स्वयंसेवी का के किये गये संस्थानीकरण की कोशिशों में अनूठा स्थान है। सेल्फ़ इम्पलॉयड वुमॅन एसोसिएशन (सेवा) की शुरुआत इला भट्ट ने 1971 में केवल सात सदस्यों के साथ की थी। आज इसके साथ तेरह लाख से ज़्यादा स्त्रियाँ जुड़ी हैं। यह संगठन अनपढ़ कामगार महिलाओं का अपना बैंक चलाता है जिसके ज़रिये औरतों को स्वरोज़गार के लिए पूँजी मुहैया करायी जाती है। यह नारी आंदोलन, मज़दूर आंदोलन और सहकारिता आंदोलन का एक संगम है। जीवन परिचय 7 सितम्बर 1933 को अहमदाबाद में जन्मी इला भट्ट का बचपन सूरत शहर में बीता जहाँ इनके पिता सुमत भट्ट एक सफल वकील थे। माँ वनलीला व्यास महिलाओं के आंदोलन में सक्रिय थीं। भारत के स्वाधीनता संग्राम में इला भट्ट के परिवार के सदस्यों ने भी भाग लिया था। उनके नाना महात्मा गाँधी के नमक सत्याग्रह में शामिल थे और इसके लिए जेल भी गये थे। 1952 में इला सूरत के एमटीबी महाविद्यालय से कला में स्नातक हुईं और फिर अहमदाबाद से 1954 में कानून की पढ़ाई पूरी की जहाँ उन्हें हिंदू कानून पर अपने काम के लिए स्वर्ण पदक भी दिया गया। कुछ दिनों के लिए उन्होंने श्रीमती नाथीबाई दामोदर ठाकरे महिला विश्वविद्यालय, मुम्बई में अंग्रेज़ी पढ़ाने का काम किया। अपनी स्नातक उपाधि की पढ़ाई के दौरान इला की मुलाकात एक निडर छात्र नेता रमेश भट्ट से हुई। 1951 में भारत की पहली जनगणना के दौरान मैली-कुचैली बस्तियों में रहने वाले परिवारों का विवरण दर्ज करने के लिए रमेश भट्ट ने इला को अपने साथ काम करने के लिए आमंत्रित किया तो इला ने बहुत संकोच से इसके लिए सहमत हुईं। उन्हें पता था कि उनके माता-पिता अपनी बेटी को एक अनजान युवक के साथ गंदी बस्तियों में भटकते देखना हरगिज़ पसंद नहीं करेंगे। बाद में जब इला ने रमेश भट्ट से शादी करने का निश्चय किया तो माता-पिता ने विरोध किया। उन्हें डर था कि उनकी बेटी आजीवन ग़रीबी में ही रहेगी। इतने विरोध के बावजूद भी इला ने सन् 1955 में रमेश भट्ट विवाह कर लिया। 1955 इला अहमदाबाद कपड़ा कामगार संघ के कानूनी विभाग में शामिल हुईं। भारत के श्रमिक आंदोलन और मज़दूर संघों पर आज पुरुषों का एकाधिकार बना हुआ है। लेकिन भारत में पहला मज़दूर संघ स्थापित करने वाली भी एक महिला अनसुइया साराभाई थीं। इसी कपड़ा कामगार संघ के 1954 में स्थापित महिला प्रकोष्ठ का नेतृत्व 1968 में इला भट्ट ने सँभाला। कार्य 1971 में अहमदाबाद की बाज़ार हाथगाड़ी खींचने वाली और सर पर बोझा ढोने वाली प्रवासी महिला कुलियों ने अपने सिर पर छत की तलाश में इला भट्ट से मदद माँगी। इला भट्ट ने देखा कि ये सारी महिलाएँ खुली सड़क पर रहने को मजबूर हैं और इनकी मज़दूरी बेहद कम है। उन्होंने इस विषय पर स्थानीय अख़बारों में लिखा। कपड़ा व्यापारियों ने जवाबी लेख प्रकाशित करके इला भट्ट के सारे आरोपों को ख़ारिज कर दिया और महिला कुलियों को उचित मज़दूरी देने का दावा किया। इला भट्ट ने व्यापारियों वाले लेख की अनेक प्रतियाँ बनवायीं और महिला कुलियों में बाँट दीं ताकि वे व्यापारियों से अख़बार में छपी मज़दूरी की ही माँग करें। इला भट्ट की इस युक्ति से कपड़ा व्यापारियों की हेकड़ी निकल गयी। उन्होंने इला भट्ट से वार्ता की पेशकश की। दिसम्बर, 1971 में इसी बैठक के लिए सौ महिला मज़दूर जुटीं और सेवा संगठन (सेल्फ़ एम्प्लॉयड वुमॅन एसोसिएशन) का जन्म हुआ। जब सेवा को एक मज़दूर संगठन के रूप में पंजीकृत करने का विचार हुआ तो श्रम विभाग ने साफ़ इनकार कर दिया। तर्क यह था कि श्रमिक संगठन बनाना है तो पहले मालिक का नाम बताया जाए जहाँ ये लोग नौकरी पर है। सेवा के सारी सदस्याएं असंगठित महिला मज़दूर थीं। इनके पास कोई नियमित नौकरी नहीं थी। लम्बी बहस के बाद ही सेवा एक पंजीकृत मज़दूर संगठन बन पाया। 1981 में आरक्षण के विरोध में उच्च जातियों ने पिछड़ी जाति के लोगों के साथ मारपीट की। सेवा ने पिछड़ी व अनुसूचित जातियों पर हो रही हिंसा का पुरज़ोर विरोध किया जबकि कपड़ा कामगार संघ मौन रहा। इला भट्ट द्वारा असंगठित महिला मज़दूरों के लिए लड़ने, पिछड़ी जातियों का समर्थन करने जैसे कार्यों से कपड़ा कामगार संघ का पुरुषवादी, जातिवादी नेतृत्व इतना क्षुब्ध हो गया कि उन्होंने सेवा को अपने संगठन से ही निष्कासित कर दिया। इला भट्ट के अनुसार यह निष्कासन एक वरदान सिद्ध हुआ। इसके बाद सेवा नारी आंदोलन, मज़दूर आंदोलन व सहकारिता आंदोलन का संगम बन गयी। इला भट्ट के संगठन सेवा का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को सम्पूर्ण रोजगार से जोड़ना है। सम्पूर्ण रोजगार का मतलब केवल नौकरी नहीं; बल्कि नौकरी के साथ खाद्य-सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा भी है। इसका मतलब है कामगारों को इस तरह की गतिविधियों में लगाना जो उन्हें आत्म-निर्भर बनाती हों। यह तीन बातों केंद्रित है आजीविका का निर्माण, मौजूदा आजीविका की सुरक्षा और प्रगति के लिए कार्यकुशलता में वृद्धि। सेवा अपने सदस्यों को आवास, बचत और ऋण, पेंशन तथा बीमा जैसी सहायक सेवा भी प्रदान करती है। इसके अलावा बच्चों की देखभाल तथा कानूनी सहायता भी देती है। सेवा ने व्यवस्था परिवर्तन के कई उदाहरण पेश किये हैं। जैसे, गुजरात के मेहसाणा ज़िले में भूमिहीन दलित स्त्रियों की कृषि समिति वनलक्ष्मी। इस समिति की स्त्रियाँ प्लास्टिक की चादर से ढँके तालाब में बरसाती पानी का संग्रहण करती हैं ताकि गर्मी के दिनों में भी सिंचाई की जा सके। ये महिलाएँ पावर टिलर भी चलाती हैं। आस-पास के गाँवों से किसान वनलक्ष्मी में देखने-सीखने आते हैं। इसी तरह बनासकाँठा के सूखे रेगिस्तानी इलाके में स्त्रियों का ज़मीन पर अधिकार नहीं था। इसके लिए उन्हें कई दशकों तक संघर्ष करना पड़ सकता था। लेकिन श्रमजीवी स्त्रियों के संगठन द्वारा निर्मित महिला पानी पंचायत ने स्त्रियों को पानी का मालिक बनाया। इसी पानी की मिल्कियत के चलते वे ज़मीन की मालिक भी बनती चली गयीं। पानी के माध्यम से मिले नियंत्रण के कारण गाँव के पुरुष प्रधान सत्ता संबंधों में भी बदलाव आया। इस सिलसिले सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही है कि पैंतीस लाख पेड़ लगा कर रेगिस्तान के प्रसार को रोका गया। पहले स्थानीय लोग यहाँ से बाहर जा कर रोटी-रोज़ी की जुगाड़ करने को मजबूर थे, लेकिन अब हालात बदल गये हैं। उपलब्धियां उपलब्धियांhttp://www.rbi.org.in/scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=2443 संग्रहीत प्रति 16 सितंबर 2013 https://web.archive.org/web/20130526011532/http://www.rbi.org.in/scripts/bs_viewcontent.aspx?Id=2443 26 मई 2013 live Ela Bhatt selected for Indira Gandhi Prize https://web.archive.org/web/20130517195209/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-11-20/india/30421873_1_ela-bhatt-indira-gandhi-prize-sewa 17 मई 2013 Times of India. 20 Nov. 2011. १९८५ में पद्मश्री १९८६ में पद्म भूषण १९७७ में रेमन मैगसेसे पुरस्कार मानद डाक्टरेट - हार्वर्ड, येल, बड़ौदा व अन्य विश्वविद्यालय २०११- शांति, निरस्त्रीकरण व विकास के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार पूर्व सदस्य- राज्यसभा भारत पूर्व सदस्य-भारतीय योजना आयोग प्रकाशन वी आर पूअर बट सो मैनि (We Are Poor but So Many)- ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रैस, न्यूयार्क, २००६ सन्दर्भ इन्हें भी देखें 1. इला आर. भट्ट (2007), वी आर पूअर बट सो मैनी : द स्टोरी ऑफ़ सेल्फ़-एम्प्लॉयड वुमॅन इन इण्डिया, ऑक्सफ़र्ड युनिवर्सिटी प्रेस, नयी दिल्ली. 2. मृणाल पाण्डे (2008), स्त्री : देह की राजनीति से देश की राजनीति तक, राधाकृष्णन प्रकाशन, नयी दिल्ली. 3. कमिला रोज (1992), वेयर वुमॅन आर लीडर्स : द सेवा मूवमेंट इन इण्डिया, ज़ेड बुक्स, लंदन. श्रेणी:मैगसेसे पुरस्कार विजेता श्रेणी:1933 में जन्मे लोग श्रेणी:सामाजिक कार्य में पद्म भूषण प्राप्तकर्ता