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411 समाचार
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जोरहाट

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जोरहाट Jorhatযোৰহাট Jorhat.jpg रात्रि में जोरहाट का दृश्य जोरहाट India Assam 26.75 94.22 inline, title असम में जोरहाट की स्थिति देश प्रान्त असम ज़िला जोरहाट ज़िला 153889 2011 भाषाएँ प्रचलित असमिया 116 पिनकोड 785001 दूरभाष कोड 0376 AS-03 साक्षरता दर 89.42% http://jorhat.gov.in/ thumb|280px|जगन्नाथ बरुआ कॉलेज, जोरहाट thumb|280px|जोरहाट में असम कृषि विश्वविद्यालय जोरहाट (असमिया : যোৰহাট) भारत के असम राज्य के जोरहाट ज़िले में भोगदोई नदी के किनारे बसा हुआ एक महत्वपूर्ण शहर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।"Planning and Development of Assam," Prafulla Chandra Barua, Mittal Publications, 1992, ISBN 9788170993575http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999 https://web.archive.org/web/20040616075334/http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999 2004-06-16 Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional) 2008-11-01 Census Commission of India विवरण जोरहाट की स्थापना 18 वीं सदी के अन्तिम दशक में हुई थी। यहां पर चौकीहाट और माचरहाट नाम के दो बाजार हैं। इसी कारण इसका नाम जोरहाट रखा गया है। यहां पर विभिन्न संस्कृतियों और जातियों से जुडे लोग रहते हैं। जिनमें असमिया, मुस्लिम, पंजाबी, बिहारी और मारवाड़ी प्रमुख हैं। जोरहाट को 1983 ई. में पूर्ण रूप से जिला घोषित किया गया था। जोरहाट में मुख्यत: वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। यहां पर वैष्णव धर्म से जुड़े अनेक मठ और सतरा भी बने हुए हैं। इतिहास जोरहाट की स्थापना 18वीं सदी के अन्तिम दशक में हुई थी। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यह नगर स्वतंत्र अहोम राज्य की राजधानी था; जोरहाट में ताई भाषा बोलने वाले अहोम लोगों ने लगभग पहली शताब्दी में चीन के युन्नान क्षेत्र से देशांतरण किया था। जोरहाट को 1983 ई. में पूर्ण रूप से ज़िला घोषित किया गया था। मुख्य आकर्षण जोरहाट में मुख्यतः वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। जोरहाट में वैष्णव धर्म से जुड़े अनेक मठ और सत्र भी हैं। एक रपट के अनुसार, २०२६ में जोरहाट भारत का सबसे इच्छित पर्यटन स्थल बन गया है। This city has emerged as India's most sought-after travel destination for 2026 अक्तूबर 2026 InternetArchiveBot माजुली यह वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा तीर्थस्थान है। माजुली में वैष्णव धर्म के औनिआती, दक्षिणपथ, गारामूर और कमलाबाड़ी जैसे अनेक तीर्थस्थान हैं। इन तीर्थस्थानों को यहां के लोग सतरा पुकारते हैं। 2016 मैं माजुली को जोरहाट से अलग करके एक नए जिले का मान्यता दिया गया और इसी के साथ माजुली देश का प्रथम नदीदीप वन गया जिसे एक जिले का मान्यता प्राप्त हुआ। दक्षिणपथ सत्र दक्षिणपथ सतरा की स्थापना बनमालीदेव ने की थी। सतरा के साथ उन्होंने रासलीला की शुरूआत भी की थी। यहां पर हरेक साल रासलीला का आयोजन किया जाता है। औनियाती सत्र इसकी स्थापना निरंजन पाठकदेव ने की थी। यह सतरा अपने पालनाम और अप्सराओं के नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। इसमें पर्यटक प्राचीन असम के बर्तनों, आभूषणों और हस्त निर्मित वस्तुओं को भी देख सकते हैं। कमलाबाड़ी सत्र बेदुलापदम अता ने इस सतरा की स्थापना की थी। यह सतरा वैष्णव धर्म का मुख्य तीर्थस्थान है। तीर्थस्थान होने के साथ ही यह कला, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति का मुख्य केन्द्र भी है। इसकी एक शाखा भी है। इस शाखा का नाम उत्तर कमलाबाड़ी है। यह सत्र भारत और विश्व के अलग-अलग भागों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन करते हैं। बेंगेनाती सत्र इस सतरा की स्थापना मुरारीदेव ने की थी। यहां पर पर्यटक असम की संस्कृति से जुडी प्राचीन व दुलर्भ वस्तुओं का संग्रह देख सकते हैं। इन वस्तुओं में अहोम शासक स्वर्गदेव गदाधर सिंह के राजसी वस्त्र और उनका शाही छाता प्रमुख हैं। यह दोनों वस्तुएं सोने से बनी हुई है। शिक्षण संस्थान शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में जगन्नाथ बरुआ महाविद्यालय, जोरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज, असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट चिकित्सा महाविद्यालय, वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, कॉलेज ऑफ़ वेटनरी साइंस और कॉलेज ऑफ़ फ़िशरीज, असम महिला विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान शामिल हैं। इन्हें भी देखें जोरहाट ज़िला जोरहाट विमानक्षेत्र भोगदोई नदी असम कृषि विश्वविद्यालय सन्दर्भ श्रेणी:जोरहाट ज़िला श्रेणी:असम के नगर श्रेणी:जोरहाट ज़िले के नगर *