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भाई जीवन सिंह
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जीवन सिंह Bhai Jaita, detail from a fresco depicting the head of Guru Tegh Bahadar being brought to Anandpur by Sikhs (cropped).jpg भाई जैता, आनन्दपुर साहिब का दृश्य जिसमें गुरु गोविन्द सिंह, भाई जैता द्वारा पालकी में लाये गये शीश के गुरु तेग बहादुर सिंह के आगे नतमस्तक हो रहे हैं। जैता 1661 12 13 y पटना, (वर्तमान में बिहार की राजधानी) 1704 12 7 1661 11 30 y चमकौर, लाहौर के पासhttps://books.google.com/books?id=06k5ygAACAAJ Dictionary of Battles and Sieges 914 Greenwood Press Jacques, Tony 2007 978-0-313-33536-5 (वर्तमान समय में रूपनगर जिला, पंजाब (भारत) भाई गुलजार सिंहभाई गुरदयाल सिंहभाई सुक्खाभाई सेवा सिंह सदा नन्दमाता प्रेमो भाई खजान सिंह (श्वसुर) राज कौर
बाबा जीवन सिंह (मूल नाम : जैता ; 13 दिसंबर 1661 - 22 दिसंबर 1704) एक सिख सेनापति और गुरु गोबिंद सिंह के साथी थे। वे ही गुरु तेग बहादुर के कटे हुए सिर को आनंदपुर साहिब लाये थे। इस प्रकार गुरुजी के सिर को मुगलों के कब्जे में छोड़ देने बजाय सम्मानपूर्वक लाकर अंतिम संस्कार किया गया।The Birth of the Khalsa: A Feminist Re-Memory of Sikh Identity https://archive.org/details/birthofkhalsafem0000nikk Singh Nikky-Guninder Kaur Feb 1, 2012 State University of New York Press 9780791482667 24–25
प्रारंभिक जीवन
भाई जैता का जन्म 1661 में पटना (बिहार , भारत) में हुआ था। उनके पिताजी का नाम सदा नन्द और माताजी का नाम प्रेमो था। वे पटना में पले बढ़े। वहीं उन्होंने शस्त्र चलाना एवं अन्य सैन्य प्रशिक्षण लिया। इसके अलावा उन्होने घुड़सवारी, तैरना, संगीत, और कीर्तन सीखा। जब पटना में रहने वाले सिख परिवार पंजाब लौटे तो भाई जैता और उनका परिवार रामदास गाँव में गये और भाई गुरदित्त के साथ रहने लगे जो बाबा बुद्धा के परपोते थे। भाई जैता का विवाह बीबी राज कौर से हुआ जो सुरजन सिंह की पुत्री थीं।https://dailypost.in/news/top-5/bhai-jaita-ji-known-ragureta-guru-ka-beta/ Bhai Jaita Ji known 'Ragureta Guru ka Beta' daily post 2017-07-30 Latest Punjab News, Breaking News Punjab, India News Daily Post en-US 2020-05-27फ़रवरी 2026 InternetArchiveBot
जब मुगलों ने सिखों के नौवें गुरु, गुरु तेग बहादुर की दिल्ली के चांदनी चौक में हत्या कर दी तब भाई जीवन सिंह दो अन्य सिखों के साथ, भीड़ से गुरु के टुकड़े किए हुए शरीर को बरामद किया और इसे उनके पुत्र, गुरु गोबिंद सिंह के पास वापस लाये।https://www.punjabitribuneonline.com/news/archive/features/news-detail-1103302 ਭਾਈ ਜੈਤਾ ਜੀ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦਾ ਸਿੱਖ ਇਤਿਹਾਸ ਵਿੱਚ ਸਥਾਨ Singh Jugraj Tribuneindia News Service pa The place of Bhai Jaita ji's sacrifice in Sikh history 2022-08-21Gandhi, S.S. (2007) History of Sikh Gurus Retold: 1606–1708 C.E. Atlantic Publishers & Dist p1109 8126908580
अंगूठाकार|गुरु तेग बहादुर सिंह का सिर, आनन्दपुर साहिब में लाने का चित्र ; चित्र में गुरु गोविन्द सिंह भी दर्शनीय हैं। (चित्र १९वीं शताब्दी का है)
तब गुरु गोविन्द सिंह ने उन सबको 'मजहबी' (श्रद्धालु) कहकर सम्मानित किया https://books.google.com/books?id=d5ZiMV7rqWUC&pg=PA1897 The Garrison State: The Military, Government and Society in Colonial Punjab, 1849–1947 Yong Tan Tai SAGE 2005 978-8-13210-347-9 73 और उच्च स्वर में सभी मजहबी सिखों के लिये ये कहा कि "रंग्रेटे गुरु के बेटे"(रंगरेट गुरु के बेटे हैं)। इसके बाद भाई जीवन सिंह के पिता ने जीवन सिंह को कहा कि मेरा सिर काटकर गुरु जी से धड़ से लगा दो और उनका सिर मेरे धड़ पर। भाई जीवन सिंह ने अपने पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए गुरु तेग बहादुर के सिर को दिल्ली से आनन्दपुर साहिब के गोविन्द राय में ले आये।https://www.punjabitribuneonline.com/news/archive/features/news-detail-1103302 ਭਾਈ ਜੈਤਾ ਜੀ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦਾ ਸਿੱਖ ਇਤਿਹਾਸ ਵਿੱਚ ਸਥਾਨ Singh Jugraj Tribuneindia News Service pa The place of Bhai Jaita ji's sacrifice in Sikh history 2022-08-21Gandhi, S.S. (2007) History of Sikh Gurus Retold: 1606–1708 C.E. Atlantic Publishers & Dist p1109 8126908580
युद्ध और मृत्यु का वरण
जब आनन्दपुर साहब को खाली किया जा रहा था तब गुरु जीवन सिंह गुरु जी के साथ ही थे। उन्होंने भंगानी, नादौन, आनन्दपुर साहिब, बजरुर निर्मोहगढ़ का युद्ध लड़ा।
भाई जीवन सिंह ने अपने महान ग्रन्थ श्री गुर कथा में गुरु गोविन्द सिंह के दुखों के बारे में लिखा।https://www.punjabitribuneonline.com/news/archive/features/news-detail-1103302 ਭਾਈ ਜੈਤਾ ਜੀ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦਾ ਸਿੱਖ ਇਤਿਹਾਸ ਵਿੱਚ ਸਥਾਨ Singh Jugraj Tribuneindia News Service pa The place of Bhai Jaita ji's sacrifice in Sikh history 2022-08-21
भाई जीवन सिंह का देहान्त 1704 या 1705 में हुआ। चमकौर के गुरुद्वारा शहीद बुर्ज साहिब में उनकी समाधि बनाकर उन्हें सम्मानित किया गया है।
इन्हें भी देखें
सिखों का बलिदान
शहीद
बाहरी कड़ियाँ
भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी टिकट
सन्दर्भ
श्रेणी:भारतीय सेनापति