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411 समाचार
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कैलाश मन्दिर, एलोरा

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कैलास मन्दिर Ellora (56).jpg एलोरा का कैलास मंदिर शैल (चट्टान) को काटकर बनाया गया था। महाराष्ट्र 20 01 26 N 75 10 45 E type:landmark_region:LK inline,title भारत महाराष्ट्र छत्रपति सम्भाजी नगर एलोरा गुफाएँ शिव ८वीं शताब्दी कृष्ण प्रथम (756–773 CE), राष्ट्रकूट शासक 32.6 मीटर (107 फुट) कैलास मंदिर महाराष्ट्र के छत्रपती संभाजीनगर जिले के एलोरा में स्थित मन्दिरों की शृंखला में से सबसे बड़ा मन्दिर है। यह मन्दिर शैल (चट्टानों) को काटकर बनाया गया है । इसे मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (757-783 ई0) में निर्मित कराया था। संसार में अपने ढंग का अनूठा वास्तु है और भारतीय वास्तु-शिल्पियों के कौशल का अद्भुत नमूना है। right|thumb|300px|कैलास मन्दिर में पत्थर को काटकर बना सुन्दर स्तम्भ अन्य मन्दिरों की तरह भीतर से कोरा है, बाहर से मूर्ति की तरह समूचे पर्वत को तराश कर इसे द्रविड़ शैली के मंदिर का रूप दिया गया है। अपनी समग्रता में २७६ फीट लम्बा , १५४ फीट चौड़ा यह मंदिर केवल एक चट्टान को काटकर बनाया गया है। इसका निर्माण ऊपर से नीचे की ओर किया गया है। इसके निर्माण के क्रम में अनुमानत: ४० हज़ार टन भार के पत्थारों को चट्टान से हटाया गया। इसके निर्माण के लिये पहले खंड अलग किया गया और फिर इस पर्वत खंड को भीतर बाहर से काट-काट कर 90 फुट ऊँचा मंदिर गढ़ा गया है। मंदिर के भीतर और बाहर चारों ओर मूर्ति-अलंकरणों से भरा हुआ है। इस मंदिर के आँगन के तीन ओर कोठरियों की पाँत थी जो एक सेतु द्वारा मंदिर के ऊपरी खंड से संयुक्त थी। अब यह सेतु गिर गया है। सामने खुले मंडप में नन्दी है और उसके दोनों ओर विशालकाय हाथी तथा स्तम्भ बने हैं। आधुनिक युग में पुनः खोज वर्ष 1819 की बात है। जान स्मिथ नाम का एक ब्रिटिश सैन्य अधिकारी एक दिन शिकार के लिए निकला। महाराष्ट्र के औरंगाबाद से कुछ 100 किलोमीटर दूर सह्याद्रि की पहाड़ियों पर मौजूद जंगल में उसे एक नदी दिखाई दी जिसे स्थानीय लोग 'वाघोरा' कहते थे। इस नदी के किनारे घूमते हुए स्मिथ शिकार की तलाश कर रहा था। इसी तारतम्य में नदी से ऊपर पहाड़ियों पर उसे एक गुफा का मुहाना दिखाई दिया। गुफा में बाघ हो सकता है, ये सोचकर स्मिथ गुफा के अंदर गया। प्रकाश जलाकर जब उसने गुफा के अंदर देखा तो दृष्य देखकर आश्चर्यचकित हो गया। उसे 'अजंता की गुफाएं' मिल गयीं थीं। स्मिथ ने इन गुफाओं की खोज नहीं की लेकिन वो पहला यूरोपियन शख्स था जो इन गुफाओं तक पहुंचा। कैलास मन्दिर की विशेषताएँ कैलाश मंदिर ८वीं शताब्दी में बना ऐसा वास्तुशिल्प है जो आधुनिक प्रौद्योगिकी के लिए भी एक बड़ा रहस्य है।किसी आश्चर्य से कम नही है एल्लोरा का कैलाश मंदिर यह शिव जी का दो मंजिल वाला मंदिर है जो पर्वत की एक ही ठोस चट्टान को काटकर बनाया गया है। विश्व भर में केवल एक शिला से निर्मित सबसे बड़ी मूर्ति है।https://ndtv.in/faith/kailasha-temple-ellora-caves-significance-8716417 विश्व का एकमात्र शिव मंदिर जो बना है केवल एक पत्थर से 25 अप्रैल 2026 22 जून 2025 https://web.archive.org/web/20250622045925/https://ndtv.in/faith/kailasha-temple-ellora-caves-significance-8716417 dead इस मंदिर को तैयार करने में लगभग 150 वर्ष लगे और लगभग 7 हजार श्रमिकों ने लगातार इस पर काम किया।https://www.hindi.holidayrider.com/kailash-temple-ellora-caves-in-hindi/ कैलाश मंदिर औरंगाबाद महाराष्ट्र के दर्शन और पर्यटन स्थल की जानकारी 25 अप्रैल 2026 15 फ़रवरी 2026 https://web.archive.org/web/20260215174711/https://hindi.holidayrider.com/kailash-temple-ellora-caves-in-hindi/ dead यह मन्दिर कैलाश पर्वत से साम्य रखता है। कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। निर्माण की अनोखी विधि : सामान्यतः किसी मंदिर या भवन को बनाते समय पत्थरों के टुकड़ों को एक के ऊपर एक जमाते हुए बनाया जाता है, लेकिन कैलाश मंदिर बनाने में एकदम अनोखा ही तरीका अपनाया गया। यह मंदिर एक पहाड़ के शीर्ष को ऊपर से नीचे काटते हुए बनाया गया है। जिस प्रकार कोई मूर्तिकार एक पत्थर से मूर्ति तराशता है, वैसे ही एक पहाड़ को तराशते हुए यह मंदिर बनाया गया। एलोरा की गुफाओं में केवल एक गुफा 12 मंजिली है, जिसे ‘कैलाश मंदिर’ कहा जाता है। इस मंदिर को बनाने का उद्देश्य, बनाने की प्रौद्योगिकी, बनाने वाले का नाम जैसी कोई भी जानकारी उपलब्ध नहीं है। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण लेख बहुत पुराना हो चुका है एवं लिखी गयी भाषा को कोई पढ़ नहीं पाया है। पुरातत्वविदों ने निष्कर्ष निकाला है कि इस मंदिर को तराशने के लिए तीन प्रकार की छेनी का उपयोग किया गया था (जैसा कि उनके द्वारा इन पत्थर की दीवारों पर छेनी के निशान से देखा गया था)। ऐसा माना जाता है कि मुख्य वास्तुकार द्वारा सामने की ओर से नक्काशी करने में दूर की कठिनाइयों के कारण इस मंदिर का निर्माण ऊपर से नीचे की ओर लंबवत रूप से किया गया है, जो कि जमीनी योजना के अनुसार निर्माण का अनुसरण करते हैं। आज के समय ऐसा मंदिर बनाने के लिए सैकड़ों ड्राइंगस, 3D डिजाईन सॉफ्टवेयर, CAD सॉफ्टवेयर, छोटे मॉडल्स बनाकर उसकी रिसर्च, सैकड़ों इंजीनियर, कई हाई क्वालिटी कंप्यूटरर्स की आवश्यकता पड़ेगी। उस काल में यह सब कैसे सुनिश्चित किया गया होगा ? सबसे बड़ी बात तो यह है कि आज इन सब आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग करके भी शायद ऐसा दूसरा मन्दिर बनाना असम्भव ही है । अनुमानित अखंड संरचना का निर्माण करने के लिए अनुमानतः 4 लाख टन चट्टानों को 20 वर्ष की लंबी अवधि में हटाया गया। कैलाश मंदिर की शिल्पकला कैलाश मंदिर की भित्ति पर अद्भुत शिल्पकारी की गई है। यहां रामायण, महाभारत और पुराणों की कथाओं को पत्थर पर उकेरा गया है।एलोरा का कैलाश मंदिर – इतिहास, रहस्य और अद्भुत वास्तुकला प्रमुख मूर्तियां 1. रावणानुग्रह मूर्ति : सबसे प्रसिद्ध मूर्ति जिसमें रावण कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भगवान शिव और पार्वती शांति से बैठे हैं। यह भारतीय कला की उत्कृष्ट कृतियों में से एक मानी जाती है। 2. नटराज : शिव के विभिन्न रूपों में नटराज की मूर्तियां मंदिर के हर हिस्से में मिलती हैं। 3. गजलक्ष्मी : मुख्य द्वार में कमल पर बैठी गजलक्ष्मी की सुंदर मूर्ति है, जिसमें चार हाथी उन पर जल की धारा डाल रहे हैं। 4. अर्धनारीश्वर : शिव और पार्वती के संयुक्त रूप की मूर्ति। 5. महाभारत और रामायण के दृश्य : मंदिर के आधार में इन महाकाव्यों के विभिन्न प्रसंगों को दर्शाया गया है। 6. विष्णु के दशावतार: दक्षिण-पूर्वी गैलरी में विष्णु के दस अवतारों को दर्शाने वाले 10 पैनल हैं। छवि-दीर्घा सन्दर्भ इन्हें भी देखें कैलाशनाथ मंदिर, कांचीपुरम बृहदीश्वर मन्दिर - जिसके निर्माण में आश्चर्यजनक यांत्रिकी का उपयोग करना पड़ा होगा। कैलास कैलास कैलास