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ताम्र
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Coure Copper copper Cuivre Kupfer 銅 Медь Cobre Bakır Купрум Cu 29 029 संक्रमण धातु
ताँबा या ताम्र (अंग्रेज़ी - Copper) एक भौतिक तत्त्व है। इसका चिह्न Cu है। इसकी परमाणु संख्या 29 और परमाणु भार 63.5 है।https://www.google.ae/books/edition/Sacitra_%C4%80yurveda/HSogAQAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%AC%E0%A4%BE&printsec=frontcover Sacitra Āyurveda आयुर्वेद श्री बैद्यनाथ श्री बैद्यनाथ आयुर्वेद भवन 1999 यह एक तन्य धातु है जिसका प्रयोग विद्युत के चालक के रूप में प्रधानता से किया जाता है।
मानव सभ्यता के इतिहास में तांबे का एक प्रमुख स्थान है क्योंकि प्राचीन काल में मानव द्वारा सबसे पहले प्रयुक्त धातुओं और मिश्रधातुओं में तांबा और कांसे (जो कि तांबे और टिन से मिलकर बनता है) का नाम आता है।
समस्थानिक
कम क्षयशील समस्थानिक 63 तथा 65 के अलावा तांबे के कोई 2 दर्जन समस्थानिक हैं जो क्षयशील (रेडियोसमस्थानिक) हैं।
गुण
तांबा धातु विद्युत तथा उष्मा का सुचालक है।https://www.google.ae/books/edition/%E0%A4%86%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%95_%E0%A4%8F%E0%A4%B5%E0%A4%82_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8/eu1UEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%AC%E0%A4%BE&pg=PA285&printsec=frontcover आर्थिक एवं संसाधन भूगोल मामोरिया डॉ चतुर्भुज एसबीपीडी प्रकाशन 2021 इस सुचालकता की श्रेणी में यह चाँदी के बाद दूसरे क्रम पर आता है। इसमें एक लालिमा जैसी चमक होती है। यह सामान्यतः जल से अभिक्रिया नहीं करता है पर वायव्य जारक से धीरे धीरे संयोग कर ऑक्साईड बनाता है। लेकिन लोहे में जंग लगने से बिल्कुल अलग इसका ऑक्साईड धातु के ऊपर एक परत बनाता है जो इसके और ऑक्सीकरण को रोकता है। यह परत स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी (न्यूयॉर्क) पर भी देखी जा सकती है। तांबे के पात्र में दूध नहीं रखा जाता ।
घरेलू उपयोग
ताम्र का उपयोग प्राचीन काल से घरेलू बर्तनों और विभिन्न उपयोगी वस्तुओं के निर्माण में किया जाता रहा है।https://www.google.ae/books/edition/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%B2_Geog/NlAQEQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%AC%E0%A4%BE&pg=PA181&printsec=frontcover भारत का भूगोल मामोरिया डॉ चतुर्भुज एसबीपीडी पब्लिशिंग हाउस 2024 9788119142958 इसकी मजबूती, आघातवर्धनीयता तथा संक्षारण प्रतिरोधी गुणों के कारण इसका उपयोग कलश, लोटे, थालियाँ और अन्य घरेलू पात्रों के निर्माण में व्यापक रूप से किया गया है।
कई क्षेत्रों में ताम्र पात्रों का उपयोग पेयजल के संग्रहण के लिए भी किया जाता रहा है। पारंपरिक घरेलू उपयोगों के अतिरिक्त आधुनिक समय में तांबे की बोतलें तथा अन्य जल भंडारण पात्र भी प्रचलन में हैं, जिनका उपयोग घरों और धार्मिक आयोजनों में देखा जा सकता है।
निष्कर्षण
तांबे के प्रमुख अयस्कों में तांबा ग्लांस (Cu2S), ताम्र पाइराइट्स (CuFeS2), क्यूप्राइट (Cu2O) तथा मैकेलाईट (Cu(OH)2.CuCO3) के नाम आते हैं। पहले फेन प्लावन विधि से अयस्क का सांद्रण कर लिया जाता है। सांद्रित अयस्क को महीन चूर्ण करके उसे एक परवर्तनी भट्ठी में वायु प्रवाह की उपस्थिति में भर्जित करते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा क्यूप्रस सल्फाईड (Cu2S) और फेरस सल्फाईड (FeS) का मिश्रण प्राप्त होता है। अशुद्धियाँ आक्सीकृत होकर निल जाती हैं।
इसके बाद इसे कोक के साथ वात्या भट्ठी में गर्म करते हैं जिससे फेरस सल्फाईड फेरस ऑक्साईड बनाता है तथा सिलिका के साथ अभिक्रिया करके धातुमल (फेरस सिलिकेट) बनाता हुआ निकल जाता है। इसके बाद इस को एक भट्ठी में गर्म करते हैं तो तांबे के सल्फाईड पहले आक्साइड में बदल जाते हैं तथा फिर बचे हुए सल्फाइड से अभिक्रिया करके सल्फर डाई ऑक्साईड तथा तांबा देते हैं।
इस क्रिया से लगभग 99.99% ताँबा प्राप्त होता है|
2Cu2S + 3 O2 → 2Cu2O + 2 SO2
2Cu2O + Cu2S → 6Cu + SO2
चित्रावली
ज्वाला परीक्षण
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उत्पाद
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