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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

त्रेतायुग

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thumb|हिन्दु काल सारणी त्रेतायुग हिंदू मान्यताओं के अनुसार चार युगों में से एक युग है। त्रेता युग मानवकाल के द्वितीय युग को कहते हैं। इस युग में विष्णु के तीन अवतार प्रकट हुए थे। यह अवतार वामन,http://www.indianetzone.com/6/vamana_avatar.htm Vamana Avatar 11 अप्रैल 2012 https://web.archive.org/web/20120220114215/http://www.indianetzone.com/6/vamana_avatar.htm 20 फ़रवरी 2012 live परशुरामhttp://www.yamdagni.com/Parashurama.htm Parashurama 11 अप्रैल 2012 https://web.archive.org/web/20120428023627/http://www.yamdagni.com/Parashurama.htm 28 अप्रैल 2012 dead और राम थे। यह मान्यता है कि इस युग में ॠषभ रूपी धर्म तीन पैरों में खड़े हुए थे।http://www.hinduism.co.za/kaliyuga.htm Kali Yuga 11 अप्रैल 2012 https://web.archive.org/web/20090403023131/http://www.hinduism.co.za/kaliyuga.htm 3 अप्रैल 2009 live इससे पहले सतयुग में वह चारों पैरों में खड़े थे। इसके बाद द्वापर युग में वह दो पैरों में और आज के अनैतिक युग में, जिसे कलियुग कहते हैं, सिर्फ़ एक पैर पर ही खड़े रहे। यह काल राम के देहान्त से समाप्त होता है। त्रेतायुग १२,९६,००० वर्ष का था। ब्रह्मा का एक दिवस 10,000 भागों में बंटा होता है, जिसे चरण कहते हैं: चारों युग 4 चरण (1,728,000 सौर वर्ष)सत युग 3 चरण (1,296,000 सौर वर्ष) त्रेता युग 2 चरण (864,000 सौर वर्ष)द्वापर युग 1 चरण (432,000 सौर वर्ष)कलि युग http://vedabase.net/sb/3/11/19/en1 Calculation of Time 27 जून 2008 https://web.archive.org/web/20120222065203/http://vedabase.net/sb/3/11/19/en1 22 फ़रवरी 2012 dead यह चक्र ऐसे दोहराता रहता है, कि ब्रह्मा के एक दिवस में 1000 महायुग हो जाते हैं जब द्वापर युग में गंधमादन पर्वत पर महाबली भीम सेन हनुमान जी से मिले तो हनुमान जी से कहा - की हे पवन कुमार आप तो युगों से प्रथ्वी पर निवास कर रहे हो आप महा ज्ञान के भण्डार हो बल बुधि में प्रवीण हो कृपया आप मेरे गुरु बनकर मुझे शिष्य रूप में स्वीकार कर के मुझे ज्ञान की भिक्षा दीजिये तो हनुमान जी ने कहा - हे भीम सेन सबसे पहले सतयुग आया उसमे जो कामना मन में आती थी वो कृत (पूरी )हो जाती थी इसलिए इसे क्रेता युग (सत युग )कहते थे इसमें धर्म को कभी हानि नहीं होती थी उसके बाद त्रेता युग आया इस युग में यग करने की परवर्ती बन गयी थी इसलिए इसे त्रेता युग कहते थे त्रेता युग में लोग कर्म करके कर्म फल प्राप्त करते थे, हे भीम सेन फिर द्वापर युग आया इस युग में वेदों के ४ भाग हो गये और लोग सत भ्रष्ट हो गए धर्म के मार्ग से भटकने लगे है अधर्म बढ़ने लगा, परन्तु हे भीम सेन अब जो युग आएगा वो है कलयूग इस युग में धर्म ख़त्म हो जायेगा मनुष्य को उसकी इच्छा के अनुसार फल नहीं मिलेगा चारो और अधर्म ही अधर्म का साम्राज्य ही दिखाई देगा । मानव इस युग में अपनी मनोकामनाएं पूरी होने के लिए बहुत पूजा-पाठ करेगा। सन्दर्भ श्रेणी:रामायण श्रेणी:रामायण में स्थान