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सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना
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जुलाई 2025
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना Saryu Nahar National Project सरयू नहर, बहराइच के निकट घाघरा नहर परियोजना उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग 1972 1978 1978 2021 कुल लंबाई 6,623 किमी, मुख्य नहर 318 किमी सरयू बैराज, बहराइच घाघरा नदी नानपारा बैराज से सरयू नहर (इमामगंज राजवाहा) शुरू नौ जिले (बहराइच, गोंडा, आदि) इंदिरा नहर राप्ती नहर 4114 लागत: ₹9,802 करोड़ पूर्ण उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग
सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना उत्तर प्रदेश, भारत की एक प्रमुख सिंचाई परियोजना है, जिसका उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के नौ जिलों में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और बाढ़ नियंत्रण करना है। यह परियोजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत कार्यान्वित की गई और इसे 2012-13 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा प्राप्त हुआ।https://www.pib.gov.in/PressReleseDetail.aspx?PRID=1780456 PM inaugurates Saryu Nahar National Project PIB 27 मार्च 2025 परियोजना का औपचारिक उद्घाटन 11 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बलरामपुर, उत्तर प्रदेश में किया गया।
अवलोकन
यह परियोजना पांच नदियों—घाघरा, सरयू, राप्ती, बाणगंगा, और रोहिणी को नहरों के माध्यम से जोड़ती है, ताकि जल संसाधनों का इष्टतम उपयोग हो।https://www.idup.gov.in/hi/article/saryu-2 सरयू नहर परियोजना IDUP 27 मार्च 2025जुलाई 2025 InternetArchiveBot यह 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता सृजित करती है और लगभग 29 लाख किसानों को लाभ पहुँचाती है।https://theprint.in/in-pictures/saryu-canal-project-is-now-operational-take-a-look-at-how-it-traverses-through-eastern-up/783788/ Saryu Canal Project is now operational ThePrint 27 मार्च 2025 यह बहराइच और अन्य क्षेत्रों में नेपाल से आने वाले पानी के कारण होने वाली बाढ़ के जोखिम को भी कम करती है।https://forestsclearance.nic.in/writereaddata/UploadFormA/71116124812151UP.pdf Saryu Nahar Project Report Forest Clearance 27 मार्च 2025
परियोजना के मुख्य तथ्य
कवरेज: नौ जिले—बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, गोंडा, सिद्धार्थनगर, बस्ती, संत कबीर नगर, गोरखपुर, और महाराजगंज।
नहर प्रणाली की लंबाई: कुल 6,623 किलोमीटर, जिसमें 318 किलोमीटर की मुख्य नहर शामिल है।
लागत: 9,802 करोड़ रुपये।
प्रमुख संरचनाएं:
दो बैराज: सरयू बैराज और राप्ती बैराज।
चार मुख्य नहरें: सरयू लिंक चैनल, सरयू मुख्य नहर, राप्ती लिंक चैनल, राप्ती मुख्य नहर।
दस शाखा नहरें और चार पंप नहरें।
लाभार्थी: लगभग 6,200 गांवों के 29-30 लाख किसान।
इतिहास
परियोजना का खाका 1972 में बनाया गया था लेकिन परियोजना की शुरुआत 1978 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा की गई, जब राम नरेश यादव (कांग्रेस) मुख्यमंत्री थे। इसे शुरू में घाघरा नहर परियोजना कहा जाता था।https://eparlib.nic.in/bitstream/123456789/1040672/1/5863.pdf Saryu Nahar Project Details eParlib 27 मार्च 2025 1980 में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के समर्थन से परियोजना को बल मिला। 1980-1990 के दशक में बहराइच और गोंडा में कुछ नहरें और बैराज बने, जैसे बहराइच में खंड 3, 4, और 7, जो 1995 से कार्यशील हैं। बजटीय कमी और समन्वय की कमी के कारण यह दशकों तक अधूरी रही। 1996-97 में Accelerated Irrigation Benefits Programme (AIBP) और 2012-13 में राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा मिलने के बाद, 2016 में PMKSY के तहत इसे गति मिली और समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया।
नहर प्रणाली और संरचना
परियोजना का आधार घाघरा नदी है, जिससे मुख्य नहरें निकलती हैं। बहराइच की ओर जाने वाली नहर को स्थानीय स्तर पर इंदिरा नहर और सीतापुर की ओर जाने वाली नहर को शारदा नहर कहा जाता है। नहर प्रणाली 6,623 किलोमीटर तक विस्तृत है, जिसमें शाखा नहरें और उप-नहरें शामिल हैं।
प्रमुख संरचनाएं
सरयू बैराज: बहराइच में स्थित, घाघरा नदी से पानी को नहरों में डायवर्ट करता है।
राप्ती बैराज: राप्ती नदी से पानी का प्रबंधन करता है।
मुख्य नहरें: सरयू मुख्य नहर, सरयू लिंक चैनल, राप्ती मुख्य नहर, और राप्ती लिंक चैनल।
शाखा नहरें: बहराइच में सरयू नहर (इमामगंज राजवाहा), खंड 4, और 7, जो 1990 के दशक से कार्यशील हैं।
चरण
परियोजना को तीन चरणों में लागू किया गया:
चरण-I (प्री-AIBP): 1978 से शुरू, जिसमें बहराइच और गोंडा में सरयू बैराज और कुछ नहरों का निर्माण हुआ।
चरण-II (AIBP): 1996-97 से तेजी, जिसमें 9.31 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता सृजित हुई।
चरण-III (PMKSY-राष्ट्रीय परियोजना): 2016 के बाद नहरों का विस्तार और आधुनिकीकरण।
विशेषताएं
जल प्रबंधन: पांच नदियों को जोड़कर जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन।
आधुनिकीकरण: नहरों की लाइनिंग, नए वितरण चैनलों का निर्माण, और पुराने ढांचों की मरम्मत।
नवाचार: भूमि अधिग्रहण विवादों का समाधान और समयबद्ध पूर्णता।
सहयोग: केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त प्रयास।
महत्व
कृषि: 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, जिससे किसानों की आय और उत्पादकता में वृद्धि।
बाढ़ नियंत्रण: नेपाल से आने वाले पानी के प्रबंधन से बहराइच और अन्य क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम कम।
आर्थिक विकास: पूर्वी उत्तर प्रदेश में ग्रामीण विकास और समृद्धि।
बहराइच में प्रारंभिक कार्य
बहराइच में सरयू नहर के कुछ हिस्से, जैसे खंड 3, खंड 4, और खंड 7, 1990 के दशक में बनकर तैयार हो गए थे और 1995 से कार्यशील हैं।
उद्घाटन
11 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बलरामपुर में परियोजना का उद्घाटन किया, जिसे "पूर्वांचल के विकास का इंजन" बताया गया।
सांस्कृतिक महत्व
सरयू नदी, जिसके नाम पर यह परियोजना है, अयोध्या में पौराणिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है और रामायण से जुड़ी पवित्र नदी है। परियोजना ने इस क्षेत्र की नदियों के जल का उपयोग करके कृषि और सांस्कृतिक विकास में योगदान दिया है।
चुनौतियां
विलंब: चार दशक तक परियोजना अधूरी रही, जिससे लागत बढ़ी।
भूमि अधिग्रहण: कुछ क्षेत्रों में विवादों ने प्रगति को प्रभावित किया।
रखरखाव: नहरों के नियमित प्रबंधन की आवश्यकता।
भविष्य
इसके रखरखाव और विस्तार से सतत कृषि विकास और बाढ़ नियंत्रण में सुधार की उम्मीद है।
संदर्भ
श्रेणी:भारत में जलाशय
श्रेणी:उत्तर प्रदेश में नहरें
श्रेणी:भारत में सिंचाई
श्रेणी:भारत में जल-प्रबन्ध अधोसंरचना