Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

राजा नरेन्द्र नाथ

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

राजा नरेन्द्र नाथ (1864–1947) पंजाब के एक प्रमुख राजनेता, प्रशासक और हिंदू महासभा के दिग्गज नेता थे। उन्हें प्रायः "पंजाब का भीष्म पितामह" कहा जाता है। == प्रारंभिक जीवन और शिक्षा == उनका जन्म 1864 में लाहौर के एक प्रतिष्ठित कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ था। उनके पिता, दीवान अजय नाथ, ब्रिटिश शासन में एक उच्च अधिकारी थे। उन्होंने लाहौर के प्रसिद्ध गवर्नमेंट कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की और एम.ए. की डिग्री हासिल की। वे अपनी बौद्धिक क्षमता और विद्वत्ता के लिए जाने जाते थे। राजनीति में आने से पहले, राजा नरेंद्र नाथ एक सफल सरकारी अधिकारी थे। वे सांविधिक नागरिक सेवा (Statutory Civil Service) में शामिल हुए। उन्होंने पंजाब के विभिन्न जिलों में डिप्टी कमिश्नर और कमिश्नर के रूप में कार्य किया। 1916 में अपनी सेवानिवृत्ति के बाद, उन्हें 'राजा' की उपाधि से सम्मानित किया गया। == राजनीतिक जीवन और हिंदू महासभा == सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना जीवन हिंदू समुदाय के अधिकारों के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। वे पंजाब हिंदू सभा के सबसे प्रभावशाली नेता बने और 1926 में अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष चुने गए। उनका मानना था कि राजनीति में हिंदुओं को संगठित होना अनिवार्य है ताकि उनके हितों की अनदेखी न हो। 1932 में जब ब्रिटिश सरकार ने 'सांप्रदायिक पुरस्कार' की घोषणा की, तो राजा नरेंद्र नाथ ने इसका कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि पंजाब जैसे प्रांतों में, जहाँ हिंदू अल्पसंख्यक थे, यह कानून उन्हें राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेल देगा। उन्होंने लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलनों (1930-31) में हिंदू महासभा और पंजाब के हिंदुओं का प्रतिनिधित्व किया। वहां उन्होंने अल्पसंख्यकों के अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा के पक्ष में मजबूती से बात रखी। कई वर्षों तक वे पंजाब विधान परिषद के सदस्य रहे। उन्होंने यूनियनिस्ट पार्टी की उन नीतियों का विरोध किया जो उन्हें लगता था कि गैर-कृषि समुदायों (जिनमें मुख्य रूप से हिंदू थे) के साथ भेदभाव करती थीं। == वैचारिक दृष्टिकोण == राजा नरेन्द्र नाथ का दृष्टिकोण कट्टरपंथ के बजाय संवैधानिक और कानूनी अधिक था। वे शिक्षा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने हमेशा इस बात पर जोर दिया कि योग्यता (Merit) को राजनीतिक नियुक्तियों का आधार होना चाहिए, न कि धार्मिक कोटा। वे लाला लाजपत राय के करीबी सहयोगी थे और उनके साथ मिलकर पंजाब में सामाजिक-राजनैतिक सुधारों के लिए काम किया। 1947 में भारत के विभाजन से कुछ समय पहले ही उनका निधन हो गया। वे लाहौर के अपने घर को छोड़ने के पक्ष में नहीं थे क्योंकि वे लाहौर को हिंदू संस्कृति और राजनीति का केंद्र मानते थे। == इन्हें भी देखें == अखिल भारतीय हिन्दू महासभा == सन्दर्भ ==