411 REFERENCE · Wikipedia
−१
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−1 1 −1, माइनस एक, ऋणात्मक एक ऋणात्मक प्रथम अरबी −150% ١ चीनी 负一,负弌,负壹 बंगाली −150% ১ द्विआधारी (बाइट) y सचिह्न: 1000000012 2एससी: 111111112 हेक्स (बाइट) y सचिह्न: 0x10116 2एससी: 0xFF16
गणित में −१ अथवा −1 (ऋणात्मक एक अथवा माइनस एक) 1 (एक) का योज्य व्युत्क्रम है अर्थात् यह वह संख्या है जिसमें 1 जोड़ने पर योज्य तत्समक 0 (शून्य) प्राप्त होता है। यह ऋणात्मक पूर्णांक है जो ऋणात्मक दो (−2) से बड़ा एवं 0 से छोटा है।
गणित में
बीज गणितीय गुणधर्म
किसी संख्या को −1 से गुणा करने पर इसके तुल्य ऋणात्मक संख्या प्राप्त होती है अर्थात् उसका चिह्न बदल जाता है। व्यापक रूप में एक धनात्मक संख्या को −1 से गुणा करने पर वो ऋणात्मक हो जाती है और ऋणात्मक संख्या को −1 से गुणा करने पर वो धनात्मक हो जाती है। अतः किसी संख्या x के लिए (−1) ⋅ x −x लिखा जाता है। इसे बंटन नियम और 1 को गुणात्मक तत्समक वाली उपप्रमेय से सिद्ध किया जा सकता है:
x + (−1) ⋅ x 1 ⋅ x + (−1) ⋅ x (1 + (−1)) ⋅ x 0 ⋅ x 0.
यहाँ हमने यह तथ्य काम में लिया है कि किसी भी संख्या x को शून्य से गुणा करने पर 0 प्राप्त होता है जो समीकरण के लिए निरसन का अनुसरण करता है
0 ⋅ x (0 + 0) ⋅ x 0 ⋅ x + 0 ⋅ x.
अन्य शब्दों में,
x + (−1) ⋅ x 0,
अतः x का योज्य व्युत्क्रम (−1) ⋅ x है अर्थात् (−1) ⋅ x −x सिद्ध किया जा सकता है।
संख्या −1 का वर्ग (अर्थात् −1 को −1 से गुणा करने पर) 1 प्राप्त होता है। इसके परिणामस्वरूप दो ऋणात्मक संख्याओं का गुणा धनात्मक प्राप्त होता है। इस परिणाम की बीजगणितीय उपपत्ति के लिए हम इस समीकरण से आरम्भ करते हैं
0 −1 ⋅ 0 −1 ⋅ [1 + (−1)].
पहली असमिका उपरोक्त परिणाम के अनुसार है और दूसरा उस परिभाषा के अनुसार जिसके अनुसार −1 का योज्य व्युत्क्रम 1 है: यह ठीक वह संख्या है जिसमें 1 जोड़ने पर 0 प्राप्त होता है। अब इस बंटन नियम के उपयोग से यह देखा जा सकता है कि
0 −1 ⋅ [1 + (−1)] −1 ⋅ 1 + (−1) ⋅ (−1) −1 + (−1) ⋅ (−1).
तीसरी असमिका गुणात्मक तत्समकता के अनुसार है। लेकिन अब इस समीकरण के दोनों तरफ 1 जोड़ने पर
(−1) ⋅ (−1) 1.
उपरोक्त तर्क सभी वलय में लागू होते हैं। वलय एक अमूर्त बीजगणित की एक अवधारणा है जिसमें वास्तविक संख्याओं को पूर्णांकों के व्यापकीकरण से प्राप्त किया जाता है।Elementary Methods in Number Theory नाथनसन मेल्विन बी॰ स्प्रिंगर 2000 978-0-387-98912-9 ग्रेजुएट टेक्स्ट इन मैथेमेटिक्स 195 न्यूयॉर्क xviii, 1−514 Chapter 2: Congruences 10.1007/978-0-387-22738-2_2 1732941 42061097 https://link.springer.com/chapter/10.1007/978-0-387-22738-2_2पृ॰48
thumb|right|समिश्र अथवा कार्तीय समतल में 0, 1, −1, i और −i|upright
यद्यपि −1 का कोई वास्तविक वर्गमूल नहीं है, समिश्र संख्या i समीकरण i2 −1 को संतुष्ट करती है और इसे −1 का वर्गमूल माना जा सकता है।Algebra for Athletes बाउर कैमरून नोवा साइंस पब्लिशर्स 2007 978-1-60021-925-2 दूसरा हौप्पाज 273 Chapter 13: Complex Numbers 957126114 https://books.google.com/books?id=GmB1cSGHbZcC&pg=PA273 इसके अतिरिक्त अन्य समिश्र संख्या −i है जिसका वर्ग −1 है क्योंकि प्रत्येक शून्यतर समिश्र संख्या के ठीक दो वर्गमूल होते हैं और ये बीजगणित की मूलभूत प्रमेय का अनुशरण करता है। चतुष्टयी बीजगणित में – जहाँ मूलभूत प्रमेय लागू नहीं होती – जिसमें समिश्र संख्यायें शामिल हैं, समीकरण x2 −1 अनन्त हल प्राप्त होते हैं।Historical Topics in Algebra पर्लिस सैम नेशनल काउंसिल ऑफ़ टीचर्स ऑफ़ मैथमैटिक्स 1971 9780873530583 Historical Topics for the Mathematical Classroom 31 रेस्टन, वीए 39 Capsule 77: Quaternions 195566 https://archive.org/details/historicaltopics0000nati/page/38/mode/2up registrationhttps://www.maths.ed.ac.uk/~v1ranick/papers/porteous3.pdf Clifford Algebras and the Classical Groups पोर्टियस इयान आर॰ कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस 1995 9780521551779 Cambridge Studies in Advanced Mathematics 50 Cambridge 60 Chapter 8: Quaternions 10.1017/CBO9780511470912.009 1369094 32348823 इयान आर॰ पोर्टियस
प्रतिलोम और व्युत्क्रमणीय अवयव
350px|thumb|व्युत्क्रम फलन f(x) x−1 जहाँ 0 के अतिरिक्त x के सभी मान गुणात्मक व्युत्क्रम को निरूपित करता है
शून्यतर संख्या का घातांक ऋणात्मक संख्याओं तक विस्तृत किया जा सकता है जहाँ किसी संख्या की घात −1 लगाने पर गुणात्मक व्युत्क्रम प्राप्त होता है:
x−1 1 x.
यह परिभाषा ऋणात्मक पूर्णांकों पर भी लागू होती है और वास्तविक संख्याओं a और b के लिए घातांक नियम xaxb x(a + b) का पालन करती है।
किसी फलन f(x) के मूर्धांक में −1 लिखने पर वो प्रतिलोम फलन f −1(x) को निरूपित करता है जहाँ ( f(x))−1 विशेषतः बिन्दुवार व्युत्क्रम को निरूपित करता है।उदाहरण के लिए प्रतिलोमज्या फलन (sin x का व्युत्क्रम) को (sin−1(x) से निरूपित किया जाता है। जहाँ f एकैकी आच्छादी फलन है जो प्रत्येक x ∈ X के निवेशी प्रांत के लिए प्रत्येक y ∈ Y निर्गत सहप्रांत निर्दिष्ट होता है
f −1( f(x)) x और f −1( f(y)) y
जब सहप्रांत का उपसमुच्चय, फलन f में निर्दिष्ट है तब इसका प्रतिलोम उस उपसमुच्चय के फलन के अधीन पूर्व-प्रतिबिम्ब अथवा प्रतिलोम प्रतिबिम्ब प्राप्त होगा।
ऋणात्मक पूर्णांकों का घातांक x के गुणात्मक व्युत्क्रम x−1 को परिभाषित करने वाली वलय के व्युत्क्रमणीय अवयवों तक विस्तृत किया जा सकता है; इसके सन्दर्भ में इन अवयवों को एकांक माना जाता है।पृ॰49
किसी क्षेत्र F के किसी बहुपद प्रांत F [x] में बहुपद x का कोई व्युत्क्रम नहीं होता है। यदि इसका कोई व्युत्क्रम q(x) है तो हम लिख सकते हैंhttps://link.springer.com/book/10.1007/b102438 Algorithms for Computer Algebra Czapor Stephen R. Geddes Keith O. Labahn George Kluwer Academic Publishers 1992 978-0-7923-9259-0 1st Boston 41, 42 Chapter 2: Algebra of Polynomials, Rational Functions, and Power Series 10.1007/b102438 26212117 0805.68072 स्प्रिंगर 964280
x q(x) 1 ⇒ deg (x) + deg (q(x)) deg (1)
16 ⇒ 1 + deg (q(x)) 0
16 ⇒ deg (q(x)) −1 जो सम्भव नहीं है और अतएव F [x] एक क्षेत्र नहीं है। अधिक विशिष्ट रूप में चूँकि बहुपद एक नियतांक नहीं है, यह F में एकक नहीं है।
इन्हें भी देखें
गणित
सन्दर्भ
टिप्पणी
स्रोत
श्रेणी:पूर्णांक