411 REFERENCE · Wikipedia
अनुच्छेद 85 (भारत का संविधान)
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
भारत का संविधान भाग 5 संसद के सत्र, सत्रावसान और विघटन अनुच्छेद 86 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 84 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी संविधान 1949 प्रकाशित
अनुच्छेद 85 भारत के संविधान का एक अनुच्छेद है यह अनुच्छेद संविधान के भाग 5 के अंतर्गत आता है इसमे संसद के सत्रों, सत्रावसान और लोकसभा के विघटन से संबंधित है। यह अनुच्छेद भारत के राष्ट्रपति को संसद के दोनों सदनों को बुलाने और लोकसभा को भंग करने की शक्ति देता है।
पृष्ठभूमि
अनुच्छेद 85 के मसौदे पर 18 मई 1949 को बहस हुई थी । इसमें संसद के सत्रों, उसके स्थगन और विघटन को विनियमित किया गया था। तथा विधानसभा ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया। इसने 18 मई 1949 को मसौदा अनुच्छेद को अपनाया।Article 85: Sessions of Parliament, prorogation and dissolution https://www.constitutionofindia.net/articles/article-85-sessions-of-parliament-prorogation-and-dissolution/ Constitution of India 14 अप्रैल 2026
इसमें यह प्रस्ताव मुख्य था कि यदि राष्ट्रपति तीन महीने के भीतर सदन की बैठक बुलाने में विफल रहते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष या राज्य परिषद के अध्यक्ष को अपने-अपने सदनों को बुलाने की अनुमति दी जाए। राष्ट्रपति की भूमिका पर संदेह जताते हुए, उन्होंने तर्क दिया कि संविधान को भविष्य की सभी आकस्मिकताओं के लिए तैयार रहना चाहिए। इस संशोधन से यह सुनिश्चित होगा कि संसद का कामकाज सामान्य रूप से चलता रहे। मसौदा समिति के अध्यक्ष का मानना था कि राष्ट्रपति संविधान द्वारा निर्धारित दायित्व का उल्लंघन नहीं करेंगे। वास्तव में, यदि वे बैठक बुलाने से इनकार करते हैं, तो यह उनके खिलाफ महाभियोग चलाने का पर्याप्त आधार होगा।
मूलपाठ
(१) राष्ट्रपति समय समय पर संसद् के प्रत्येक सदन को, ऐसे समय तथा स्थान पर, जैसा कि वह उचित समझे, अधिवेशन के लिये आहूत करेगा, किन्तु उसके एक सत्त् की अन्तिम बैठक और आगामी सत्त् की प्रथम बैठक के लिये नियुक्त तारीख के बीच छः मास का अंतर न होगा।
(२) राष्ट्रापति समय समय पर—
(क) सदनों या किसी सदन का सत्ता्वसान कर सकेगा,
(ख) लोक-सभा का विघटन कर सकेगा।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 33 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१०८
(1) The President shall from time to time summon each House of Parliament to meet at such time and place as he thinks fit, but six months shall not intervene between its last sitting in one session and the date appointed for its first sitting in the next session.
(2) The President may from time to time—
(a) prorogue the Houses or either House;
(b) dissolve the House of the People.भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र लेखक:राजेन्द्र प्रसाद 1957 33 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१०८
श्रेणी:भारतीय संविधान के अनुच्छेद
सन्दर्भ