411 REFERENCE · Wikipedia
अक्षयचन्द्र सरकार
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
अक्षयचन्द्र सरकार (बंगाली: অক্ষয়চন্দ্র সরকার) कवि, सम्पादक एवं बांग्ला साहित्य के साहित्यिक आलोचक थे।
अक्षयचन्द्र सरकार का जन्म 11 दिसंबर 1846 को बंगाल के हुगली जिले के मुख्यालय, कदमतला, चिन्चुड़ा में हुआ था। उनके पिता प्रसिद्ध लेखक और कवि राय गंगा चरण सरकार बहादुर थे। 2 अक्टूबर 1917 को कलकत्ता में उनका निधन हो गया।
वे एक प्रतिष्ठित बंगाली लेखक, संपादक और आलोचक थे। उन्होंने साप्ताहिक राजनीतिक और हिंदू सांस्कृतिक पत्रिका "साधारणी" का स्वामित्व, संपादन और प्रकाशन किया। वे मासिक पत्रिका "नब जीवन" के प्रकाशक भी थे।
वे राष्ट्रीय उद्योग एवं स्वतंत्रता उन्मुख शैक्षिक सुधारों को बढ़ावा देने में सक्रिय थे। उन्होंने केवल स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग का उपदेश दिया। उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लाये गये "किराया विधेयक" और "सहमति की आयु विधेयक" का प्रबल विरोध किया। कुछ समय के लिए उन्होंने ब्रह्मपुर और फिर चिन्चुड़ा में वकालत की।
श्री शारदाचरण मित्र, जो बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बने, के साथ अक्षयचंद्र ने पुराने बंगाली कविता संग्रह "प्राचीन काव्य संग्रह" का संकलन, संपादन और प्रकाशन किया था। बच्चों की बंगाली कविताओं की पुस्तक "गोचारनेर मठ" उनकी ही रचना थी जो संयुक्ताक्षरों से रहित बनायी गयी थी। उनकी अन्य प्रसिद्ध कृतियों में "संक्षिप्त रामायण", "अलोचना", "रूपक ओ रहस्य", "शिक्षा नबीशेर गल्प", "महा पूजा", "हाटे हाटे फल", आत्मकथात्मक "पिता पुत्र", "सनातन", "साहित्य साधना" और "कबि हेमचंद्र" शामिल हैं।
वे बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के निकट मित्र थे। उनसे वे पहली बार ब्रह्मपुर में मिले थे। "बंग दर्शन" (1872) के प्रकाशन में वे बंकिमचंद्र के दाहिने हाथ थे। हर महीने वे 'बंग दर्शन' में वर्तमान पुस्तकों की समीक्षा करते थे।
कई वर्षों तक वे बंगाल लिटरेरी एसोसिएशन (बंगाल साहित्य संघ) के उपाध्यक्ष रहे और इसके आजीवन सदस्य भी रहे। चिन्चुड़ा में बंगाल लिटरेरी एसोसिएशन के पांचवें वार्षिक सम्मेलन में उन्होंने स्वागत समिति की अध्यक्षता की। अगले वर्ष चट्टगाँव सम्मेलन में वे इसके अध्यक्ष थे। 1886 के कांग्रेस सम्मेलन में वे सबसे अधिक सक्रिय थे और इसमें शामिल हो गए।
प्रभावशाली राजनीतिज्ञ अतुल्य घोष, अक्षयचंद्र की बेटी के पुत्र थे। अक्षयचंद्र की पोती लक्ष्मीमणि का विवाह प्रसिद्ध गणितज्ञ केशव चंद्र नाग से हुआ था।
.
== सन्दर्भ ==