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जयराम सिंह
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अप्रैल 2020
जयराम सिंह (8 अगस्त 1928-8 दिसंबर 2006) 'मगही भाषा के कवि हैं। इन्हें 'मगही कोकिल'के नाम से जाना जाता है। इनका जन्म वजीरगंज (गया) के कारीसोवा गांव में हुआ था। पेशे से प्राचार्य रहे जनकवि जयराम की चार पुस्तकें ‘भुरुकवा उग गेल’, ‘त्रिवेणी' ‘पुरहर पल्लो’और 'चिजोर' प्रकाशित हैं। मगही आलोचक और साहित्यकार डा. भरत सिंह ने इनको ‘लोकचेतना का गायक’ तो प्रो. शिवेन्द्र नारायण सिंह ने इनको दलित वेदना का कवि कहा है। कवि और लेखक ओंकार शर्मा कश्यप के अनुसार भोजपुरी में जो स्थान भिखारी ठाकुर को प्राप्त है वही स्थान मगही में जयराम बाबू को प्राप्त है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि जयराम सिंह ने मगही को संरक्षित किया। 21वीं सदी में यदि मगही के गीत लोककंठ में जीवित है तो इसकी जमीन जयराम बाबू के गीतों से हीं तैयार हुई है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी और संगीत में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। मगही भाषा में काव्य रचना करने के लिए इन्हें राहुल सांकृत्यायन ने प्रेरित किया।
संदर्भ: चिजोर, अन्नपूर्णा प्रकाशन
श्रेणी:मगही भाषा
श्रेणी:मगही साहित्यकार