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411 समाचार
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अलीगढ़ आंदोलन

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अलीगढ़ आंदोलन सर सैयद अहमद खाँ के नेतृव में चलाया गया एक प्रमुख इस्लामी आंदोलन है, जो 1857 के विद्रोह के असफलता के बाद मुसलमानों में धार्मिक सुधारों के उद्देश्य से चलाया गया सिकन्दरा राव क्षेत्र का भी नेतृत्व रहा सैयद अहमद खां के विचार सैयद अहमद खां के विचार में- जब तक विचार की स्वतंत्रता विकसित नहीं होती, सभ्य जीवन संभव नहीं है। उनका मानना था कि मुसलमानों का धार्मिक और सामाजिक जीवन पाश्चात्य वैज्ञानिक ज्ञान और संस्कृति को अपनाकर ही सुधारा जा सकता है। इसके लिए उन्होनें पश्चिमी ग्रंथों का उर्दू में अनुवाद करवाया जिसका नाम बाबुल अस्वथ नाम से पत्रिका चलाई 1875 में अलीगढ़ स्कूल स्थापित किया 1888 में यूनाइटेड इंडियन पार्टियाटिक असोसिएशन की स्थापना की। कुरीतियों का अंत सैयद अहमद खा ने मुसलमानों में प्रचलित पीरी मुरीद प्रथा का विरोध किया। इस प्रथा में मुसलमान पीर मुरीद को कोई रहस्यमय बात बता कर स्वयं को सूफी संतो के समान मनवाने की कोशिश करते थ। सैयद ने मुसलमानों को दास प्रथा के विरुद्ध जाग्रत किया और इस प्रथा का विरोध किया और मुस्लिम समाज में व्याप्त अन्य बुराइयो का भी विरोध किया। उन्होंने अपने विचारों का प्रचार "तहजीब-उल-अलखाक" नामक पत्रिका में किया। सैयद अहमद खान ने सामाजिक सुधार के काम में भी उत्साह दिखाया। उन्होंने समाज में महिलाओं की स्थिति सुधारने के बारे में लिखा तथा पर्दा छोड़ने तथा स्त्रीओ में शिक्षा-प्रसार का समर्थन किया। उन्होंने बहुविवाह पर्था तथा मामूली-मामूली बातो पर तलाक के रिवाज की भी निंदा की। सन्दर्भ श्रेणी:आधुनिक भारत का इतिहास श्रेणी:इस्लामी आंदोलन