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राजेश कुमार
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नाटककार राजेश कुमार
जन्म : 11 जनवरी, 1958 . बिहार की राजधानी पटना में एक मध्यवर्गीय परिवार में ।
पिता का नाम : स्व० श्री शुकदेव प्रसाद सिंह
माता का नाम : स्व० श्रीमती जया देवी
शिक्षा : प्रारंभिक शिक्षा से हाई स्कूल तक आरा ( भोजपुर ) में कैथोलिक हाई स्कूल में हुई । इंटरमीडिएट हर प्रसाद जैन कॉलेज, आरा से । तदुपरांत भागलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल ब्रांच से स्नातक किया ।
भाषा : हिंदी
राष्ट्रीयता : भारतीय
सृजन : साहित्यिक यात्रा की शुरुआत ‘सारिका ‘ और ‘ धर्मयुग’ जैसी लब्ध प्रतिष्ठित बड़ी पत्रिकाओं से । दर्जन भर कहानियाँ लिखने के बाद एक ज़रूरत के तहत रंगकर्म की तरफ़ मुड़ाव । किसान - छात्र आंदोलन के दौरान जनता के फूटते जनाक्रोश को अभिव्यक्त करने के लिए नुक्कड़ आंदोलन से अंतरंग पूर्ण जुड़ाव । नाटक को जन - जन से जोड़ने के लिए जहाँ नुक्कड़ नाटक जैसे जन माध्यम से जुड़े, वहीं प्रोसिनियम थिएटर को अभिजात्यपन से विलग कर आम दर्शकों की भागीदारी के लिए न केवल डिक्लास किया बल्कि प्रतिरोध को फोकस किया । थिएटर में मार्क्स की उपस्थिति के जितने हिमायती हैं, उतने ही भगत सिंह और अंबेडकर के विचारों के भी ।
जन्म, पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में पटना, आरा, भागलपुर, झाँसी, ओबरा, अनपरा, अलीगढ़, शाहजहांपुर, बाराबंकी, बनारस और लखनऊ जैसे क़स्बों - शहरों से जुड़े रहे । तबादलों के दौरान रंगमंच को उद्देश्यपरक व वैचारिक प्रबलता प्रदान करने के लिए संघर्ष और सृजनात्मक स्तर पर निरंतर सक्रिय । आरा की ‘युवा नीति’, भागलपुर की ‘दिशा’ और शाहजहांपुर की ‘अभिव्यक्ति ‘ नाट्य मंच के संस्थापक सदस्यों में ।
कुछ नाटकों के साथ फ़िल्म निर्देशक महेश भट्ट भिन्न जुड़े रहे । दो नाटकों पर फ़ीचर फ़िल्म बनी है ।
हाशिए पर रहने वाले वंचित समाज की बेचैनी, छटपटाहट और करवटें इनकी कहानी और नाटक में हमेशा प्रमुखता से रहा है । और इसे अभिव्यक्त करने के लिए इन्होंने चौंकाने, चमत्कृत और चमकीले शब्दों का सहारा लेने के बजाए, दिल में उतर कर दिमाग में दस्तक देने वाले शब्द, भाषा कथ्य पर ज़्यादा भरोसा किया है ।
नाटककार राजेश कुमार
सृजन वृतांत
कहानी :
घेरा तथा अन्य कहानियाँ
[ संग्रह में संकलित कहानियाँ : चुप रहने के लिए (सारिका ), आग ( प्रगतिशील समाज ), एक तबादला और ( धर्मयुग ), मुक्ति बाबू ( पाटलिपुत्र टाइम्स ), अंतहीन सिलसिले ( रससुलभ ), मदारी ( कथन ), मच्छरों के दंश (कथादेश ), संगठन ( पाटलिपुत्र टाइम्स ), इलाज ( सक्रिय कहानी ), उठे हुए हाथ ( रूपकंचन ), घेरा ( पुरुष ) ।]
नुक्कड़ नाटक
सवा सेर गेहूँ ( 1979 ), कफ़न ( 1985), हमें बोलने दो ( 1982), जनतंत्र के मुर्गे (1984), जिंदाबाद - मुर्दाबाद(1983), रोशनी ( 1984 ), रंगा सियार(1987), क्रेन (1988), जाति परमो धर्मः, जाल(1986), तलाश ( 1990), आँख बंद और डिब्बा गोल(1987), जमीन हमारी है (1990), पूस की रात(1989), भ्रष्टाचार का अचार (1996), इक्कीसवी सदी की ओर (1988) , अश्वमेध(1993), कल्चर उर्फ चढ़ गया ऊपर रे (1994), सोने का मटका बनाम लॉटरी का झटका(1994) , कठपुतली का नाच (1984), चिड़िया बोली चीं - चीं(1990), सद्गति(1984) , मनोवृति(1985), समरयात्रा( 1995), सुजाता मायने पैसा (1985), आदाब(1988), स्याह साइबर की नीली आँखें(2022), ये दोगले ( 1999 ), माटी हो गइल लाल (1995 ), अयोध्या (1995)
पूर्णकालिक नाटक
झोपड़पट्टी ( 1988 )
आख़िरी सलाम ( 1996 )
पगड़ी सम्भाल जट्टा ( 1997 )
गांधी ने कहा था ( 1999 )
घर वापसी ( 2001 )
मार पराजय ( 2002 )
सपने हर किसी को नहीं आते ( 2002 )
हवनकुंड ( 2003 )
सत भाषै रैदास ( 2006 )
अंबेडकर और गांधी ( 2008 )
संवाद - दर- संवाद ( 2009 )
सुखिया मर गया भूख से ( 2010 )
द लास्ट सैल्यूट ( 2011 )
हिन्द स्वराज ( 2011 )
तफ्तीश ( 2012 )
डैडी ( 2013 )
श्राद्ध ( 2014 )
हिंदू कोड बिल ( 2016 )
दुलत्ती मारी मरखन्नी ने ( 2017 )
कलाम ( 2019 )
खेल खत्तम ( 2019 )
निर्वासन ( 2020 )
निःशब्द ( 2021 )
कौन कम्बख़्त कहता है गोडसे मर गया ( 2022 )
दाह ( 2022 )
बाग़ी बलिया ( 2023 )
शक्ति पर्व ( 2023 )
महायज्ञ ( 2024 )
जनम ( 2024 )
बहरूपिया ( 2025 )
शेक्सपियराना लव ( 2025 )
एकल
पूस की रात (1984 )
वैष्णव की फिसलन (1997 )
मुगलों ने सल्तनत बख़्श दी (1997 )
रसप्रिया (1997 )
भेड़िए (1998 )
टोबा टेक सिंह ( 2000 )
एक क्लर्क की मौत (2000 )
राम की शक्ति पूजा (2000 )
पागल की डायरी ( 2000 )
मेरा राजहंस ( 2002 )
हन्नू हटेला से लड़की सेट क्यों नहीं होती ? (2004 )
पढ़िए कलिमा ( 2013 )
डिक्टेटर रिटर्न्स ( 2015 )
आदिवासी नहीं नाचेंगे (2017 )
क्या आप मोहम्मद आमिर ख़ान को जानते हैं ? ( 2018 )
मूकनायक ( 2018 )
गर्द हवा का ग़ुबार ( 2019 )
खोल दो (2019 )
बहरूपिया ( 2025 )
नाटय आलोचना
नाटक से नुक्कड़ नाटक तक ( संयुक्त संपादन ) ( 1988 )
मोरचा लगता नाटक ( संयुक्त संपादन ) (1994)
रंगमंच का चेहरा ( 2024)
कोर्टमार्शल ( संपादन ) ( 2025)
प्रकाशित कृतियाँ :
जनतन्त्र के मुर्गे ( 1996 )
हमें बोलने दो ( 2000 )
शताब्दी की परछाइयाँ ( 2003 )
आख़िरी सलाम ( 2003 )
झोपड़पट्टी ( 2004)
ज़मीन हमारी है ( 2004 )
कोरस का संवाद ( 2004 )
भ्रष्टाचार का अचार ( 2011 )
पाँच नुक्कड़ नाटक ( 2011 )
तफ्तीश ( 2016 )
सुखिया मर गया भूख से ( 2018 )
घर वापसी ( 2018 )
घेरा और अन्य कहानियाँ ( 2019 )
अम्बेडकर और गांधी ( 2019 )
द लास्ट सैल्यूट ( 2023 )
सपने हर किसी को नहीं आते ( 2023 )
कौन कमबख़्त कहता है कि गोडसे मर गया ( 2023 )
शक्ति पर्व ( 2025 )
रंगमंच का चेहरा ( 2025 )
कोर्टमार्शल ( 2025 )
अनुवाद :
नाटक पर लिखे गए लेखों का मलयालम और मराठी भाषा में अनुवाद ।
प्रसारण :
आकाशवाणी पटना, लखनऊ और दिल्ली से कई रचनाएं, वार्ता, साक्षात्कार प्रसारित ।
मंचन :
इनके लिखे गए नुक्कड़ नाटक, एकल और पूर्णकालिक नाटक का मंचन देश भर की विभिन्न रंग संस्थाओं द्वारा मंचित हुए हैं ।बल्कि आज भी रोज़ कोई न कोई नाटक किसी न किसी दिन मंचित होते रहते हैं । देश भर में होने वाले नाटय समारोहों, प्रतियोगिताओं में पुरस्कृत व सम्मानित रहे हैं । देश के सभी प्रमुख प्रेक्षागृहों यथा दिल्ली के कमानी, श्रीराम सेंटर, अभिमंच, सम्मुख और मुंबई पृथ्वी थिएटर, नेहरू सेंटर, लखनऊ के संत गाडगे, थ्रस्ट थिएटर, बी एम शाह ऑडिटोरियम, राय उमानाथ बली, पटना के कालिदास रंगालय व शाहजहाँपुर के गांधी भवन ।
सम्मान :
सन् 2007 में ‘नई धारा सम्मान’ ।
सन् 2008 में साहित्य कला परिषद, दिल्ली की ओर से नाटक लेखन के लिए ‘ मोहन राकेश सम्मान ‘ ।
सन् 2009 में ‘ राधेश्याम कथावाचक सम्मान ‘ ।
सन् 2012 में दून घाटी रंगमंच, देहरादून द्वारा ‘ नाटय रत्न सम्मान ‘ ।
सन् 2012 में सेंटर फॉर दलित आर्ट एंड लिटरेचर, नई दिल्ली द्वारा प्रथम दलित अस्मिता सम्मान ‘ ।
सन् 2014 में नाटय लेखन के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए ‘ उ० प्र ० संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार ‘ ।
सन् 2015 में नाटक के लिए ‘सेतु राष्ट्रीय नाटय सम्मान ‘।
सन् 2017 में संहिता मंच द्वारा ‘ सत भाषै रैदास ‘ नाटक के लिए श्रेष्ठ नाटक का पुरस्कार ।
सन् 2017 में ‘ अलग दुनिया ‘ द्वारा नाटय क्षेत्र में सार्थक लेखन हेतु ‘जुगल किशोर स्मृति पुरस्कार ‘ ।
सन् 2020 में नाटय क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए ‘फ़ारूख़ जुनून अवार्ड ‘ ।
सन् 2020 में ‘सावित्री त्रिपाठी स्मृति सम्मान’ ।
अस्मिता थिएटर ग्रुप द्वारा सन् 2022 का ‘ कारवां - ए- हबीब सम्मान ‘ ।
सन 2022 में साहित्य कला परिषद, दिल्ली की ओर से उत्कृष्ट नाटय लेखन के लिए प्रथम ‘ मोहन राकेश सम्मान ‘ से पुरस्कृत ।
संप्रति :
उ ० प्र ० पॉवर कारपोरेशन में 32 वर्षों तक सरकारी सेवा करने के बाद मुख्य अभियंता पद से सेवानिवृत्त । फ़िलहाल इनदिनों थिएटर के होलटाइमर एक्टिविस्ट हैं । नाटक लिखना, पढ़ना, करना - कराना दिनचर्या का काम है । नाटय लेखन के अलावा इसकी वैचारिकी पर नियमित रूप से हिंदी की विभिन्न पत्र - पत्रिकाओं में वैचारिक लेख व कॉलम लेखन का कार्य ।
नाटक के अलावा फिल्म लेखन के कार्यों में भी व्यस्त हैं । पेंटिंग का पुराना रोग फिर से लग गया है ।
जब से जसम है, तब से किसी न किसी रूप में उससे जुड़े हुए हैं ।
राजेश कुमार द्वारा अभिनीत व निर्देशित नाटकों के कुछ दृश्य
रेणु की कहानी ‘रसप्रिया’ में मृदंगिया ‘ की भूमिका में
प्रेमचंद की कहानी ‘ कफ़न ‘ के मुख्य पात्र घीसू को नुक्कड़ पर अभिनय करते हुए
‘ झाँसे का राजा’ नाटक में नाटककार राजेश कुमार एक हास्य मुद्रा में
नुक्कड़ नाटक ‘ ज़िंदाबाद - मुर्दाबाद ‘ में सूत्रधार की भूमिका में
नुक्कड़ नाटक ‘समरथ को नहि दोष गुसाईं ‘ में नेता की भूमिका में
नाटककार राजेश कुमार द्वारा अभिनीत नुक्कड़ नाटक का एक दृश्य
घीसू की भूमिका में नाटककार राजेश कुमार
भागलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर नुक्कड़ नाटक नाटक करते हुए
मंच पर अभिनय करते हुए
घीसू की भूमिका में
नाटककार राजेश कुमार
नाटककार राजेश कुमार
देश भर के विभिन्न संस्थाओं द्वारा नाटककार राजेश कुमार के नाटकों के मंचन
अभिव्यक्ति नाटय मंच, शाहजहांपुर द्वारा मंचित ‘सत भाषै रैदास’ का दृश्य
संहिता मंच, मुंबई द्वारा मंचित ‘सत भाषै रैदास ’ का दृश्य
अस्मिता द्वारा मंचित ‘ हिंदू कोड बिल ‘ का दृश्य