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411 समाचार
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उस्ताद अली अकबर खां

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अली अक़बर ख़ाँ जून 2025 सितंबर 2014 right|200px|thumb|उस्ताद अली अकबर खां उस्ताद अली अकबर खां (१४ अप्रैल १९२२ - १९ अप्रैल २००९) जाने-माने सरोद वादक एवं हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के साधक थे। उस्ताद अली अकबर खान को पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था और पिछले पाँच दशकों से उन्होंने दुनिया में भारतीय शास्त्रीय संगीत का झंडा बुलंद रखा था। भारतीय शास्त्रीय संगीत को पश्चिम में प्रतिष्ठित करने के क्षेत्र में उनका महान योगदान था। जीवनी अली अकबर खान का जन्म अविभाजित भारत के पूर्वी बंगाल में कोमिला के शिवपुर गांव में 14 अप्रैल 1922 को हुआ था, जो अब बांग्लादेश में हैं। उन्होंने शास्त्रीय गायिकी और शास्त्रीय संगीत की शिक्षा तीन साल की उम्र में अपने पिता बाबा अलाउद्दीन खान से लेनी शुरू की थी। वे अपने चाचा फाकिर आफताबुद्दीन के भी शागिर्द रहे। अली अकबर खान के पिता ने उन्हें कई वाद्ययंत्रों में निपुण बनाया। लेकिन अंतत: उन्होंने सरोद वादन पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया। 13 साल की उम्र में उन्होंने पहला सार्वजनिक कार्यक्रम इलाहाबाद में पेश किया था और लखनऊ में उनकी पहली ग्रामोफोन रिकार्डिंग की गई थी। १९५६ में अली अकबर खान ने कोलकाता में 'अली अकबर खान संगीत महाविद्यालय' की स्थापना की और देश-विदेश में शास्त्रीय संगीत के शिक्षण और प्रसार को ही अपना मिशन बना लिया। खान साहब ने तीन बार शादी की थी और उनके 11 बेटे-बेटियां हैं। उनके पुत्र आशीष खान एक मशहूर सरोद वादक हैं। तारयुक्त वाद्य यंत्रों में महारत रखने वाले 88 वर्षीय उस्ताद अली अकबर खान ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के लिए अमर रचनाओं का सृजन किया। वह अमेरिका के सैन फ्रांसिस्कों में स्थायी रूप से रहने लगे थे। उस्ताद अलाउद्दीन खान के इस बेटे को वायलिन वादक एहुदी मेनुहिन ने एक दफा "दुनिया का महान संगीतकार" कहा था। वह अमेरिका में शास्त्रीय संगीत का लंबा कार्यक्रम देने वाले और अमेरिकी टीवी पर सरोद वादन करने वाले पहले भारतीय शास्त्रीय साधक थे। उनके करीबी पं॰ चरनजीत चतुरलाल ने उन्हें संत बताते हुए कहा था कि उस्ताद जैसे शास्त्रीय संगीत के साधक सदियों में एक बार आते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता और गुरु बाबा अलाउद्दीन खान कहते थे कि अली अकबर खान का जन्म केवल सरोद के लिए हुआ हैं। एकल कार्यक्रमों के अलावा भारत में अपने गुरुभाई रविशंकर और पश्चिम में यहूदी मेनुहिन या जॉन हैंडी जैसे कलाकारों के साथ उनकी युगलबंदी काफ़ी मशहूर है। सम्मान एवं पुरस्कार अली अकबर खान साहब को भारत सरकार की ओर से पद्म विभूषण और पद्मभूषण पुरस्कारों से विभूषित किया गया था। इसके अलावा 1970 से 1998 के बीच उन्हें पांच बार ग्रैमी पुरस्कार के लिए मनोनीत किया गया था। खान शास्त्रीय संगीत के पहले ऐसे साधक थे, जिन्हें 1991 में मैकआर्थर फाउंडेशन की फैलोशिप प्रदान की गई। खान ग्रेमी अवार्ड तो नहीं पा सके लेकिन 1970 से 1998 के बीच पांच दफा उनका इस प्रतिष्ठित अवार्ड के लिए नामांकन किया गया था। खां, उस्ताद अली अकबर खां, उस्ताद अली अकबर