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श्रुतलेखन
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श्रुतलेखन का अर्थ है 'सुने हुए को लिखना' या 'सुनकर लिखना'। 'श्रुत' का अर्थ होता है,'सुना हुआ'। इस विधि में एक व्यक्ति बोलता है तथा दूसरा सुन कर उसे लिखता है। विद्यालयों में श्रुतलेखन का उपयोग वर्तनी सुधारने हेतु किया जाता है। आजकल बहुत सी इलेक्ट्रॉनिक युक्तियों में सुनकर लिखने की क्षमता है।
श्रुति लेखन विधि:- भाषा शिक्षण में जब एक शिक्षक सभी बालकों को शुद्ध शब्द लेखन सिखाने का प्रयास करता है तो इसके लिए वह पाठ के किसी अंश या 20 कठिन शब्दों का चुनाव करता है स्वयं उन शब्दों को शुद्ध रूप से उच्चारित करता है एवं बालक सुनने के आधार पर शुद्ध रूप से लिखने का प्रयास करते हैं उसके बाद शिक्षक स्वयं प्रत्येक बालक की उत्तर पुस्तिका की जांच करता है और गलत पाय गय शब्दों के गोला बनाते हुए वह स्वयं शुद्ध रूप से लिखता है और फिर बालक को 10 10 बार शुध्द लिखने के लिए प्रेरित करता हैै। ऐसा करने सेेे बालक में शुद्ध शब्द लेखन का विकास होता है
गुण:- १. यह मनोवैज्ञानिक विधि है।
२. बालकों में भाषा शुद्धता का विकास होता है।
३. बालक में श्रवण कौशल लेखन कौशल में वृद्धि . होती हैl
दोष:- १. समय अधिक खर्च होता हैl
२. योग्य शिक्षकों का अभाव पाया जाता है
Niteshkumar sir hi
तकनीकी सन्दर्भ में
तकनीकी सन्दर्भ में श्रुतलेखन से आशय है कि कम्प्यूटर को बोलकर लिखवाना। इस विधि में प्रयोक्ता माइक्रोफोन में बोलता है तथा कम्प्यूटर में मौजूद स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम उसे प्रोसैस कर टैक्स्ट में बदलकर लिखता है। इस प्रकार का कार्य करने वाले सॉफ्टवेयर को श्रुतलेखन सॉफ्टवेयर कहते हैं। अंग्रेजी हेतु इस प्रकार के सॉफ्टवेयर विण्डोज़ एवं ऑफिस के कुछ संस्करणों में अन्तर्निर्मित हैं। इसके अतिरिक्त ड्रैगन नैचुरली नामक प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर भी है।
हिन्दी हेतु अभी तक ऐसा केवल श्रुतलेखन-राजभाषा नामक सॉफ्टवेयर उपलब्ध है।
इन्हें भी देखें
श्रुतलेखन-राजभाषा
श्रुतलेखन के लिए उपयोगी सॉफ्टवेयर
वाक से पाठ (स्पीच-टू-टेक्स्ट)
श्रेणी:कंप्यूटर
Naha
Bij
Vichh
Adhakar