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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पाथरी वाली माता

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दिसम्बर 2020 दिसम्बर 2020 माता पाथरी वाली को माता धूतनी के नाम से भी जाना जाता है।माता का मंदिर पानीपत सीक पाथरी गाँव की भुमि पर स्थित है। चैत्र और आषाढ के बुधवारों को यहाँ भारी मेले लगते हैं। माता का यह मंदिर ५०० वर्षों से भी अधिक प्राचीन है। पाथरी वाली माता पाथरी वाली धूतनी माता मंदिर पाथरी वाली माता File:धूतणीमाता.jpg पाथरी वाली माता पाथरी गाँव पानीपत हरियाणा भारत धूतनी माता, गोड बंगालन, बावन रूपी चैत्र, आषाढ के बुधवार 500 वर्ष पूर्व सिंघा जाट धूतणी माता की कथा माता पाथरी के विषय मे अनेकों दंत कथाएँ प्रचलित है। लोकगीतों और लोक मान्यताओं के अनुसार माता पाथरी का जन्म गौड बंगाल के रहने वाले सोहन गुर्जर के घर मे हुआ था। पंडित जब नामाकरण के लिए इनकी मस्तक रेखा देखने लगे तो यह शक्तिरूप हो अट्टहास कर हंसने लगी नवजात कन्या को अट्टहास करता देख पंडित ने अनिष्टकारी संबोधित करके कुएं मे फिंकवा दिया।जहाँ नागे गुरु ने इनको कुएं से बाहर निकाला। शक्ति ने नागे गुरु से टक्कर ली और ईश्वर की प्रेरणा से नागे गुरु जी ने इनको एक डिब्बी मे बंद करके अपनी जटाओं मे स्थान दिया। इन देवी ने नागे गुरु की शक्ति से परिचित होकर उनकों अपने गुरु जी के रूप मे धारण किया।thumb|भवन मे माँ पाथरी वाली और माता मैदानण नत्थू भक्त की कथा कथा के अनुसार सीक पाथरी गाँवों के नत्थू और भरतू दो युवकों ने नागे गुरु जी की बहुत सेवा की जिससे प्रसन्न होकर नागे गुरु ने वह डिब्बी नत्थू को देते हुए कहा इसको संभालकर रखना।एक दिन गुरु जी के प्रस्थान के पश्चात नत्थू की पत्नी ने डिब्बी को देखा और सोचो इसे खोल कर देखती हूँ जब खोला तो माता प्रकट हो गयी। नत्थू की पत्नी डर गई किंतु बाद मे शक्ति के रहस्य को जानकर नत्थू और भरतू माता की सेवा करने लगे। गाँव के जमींदार जाट सिंघा द्वारा जाल के पेड़ के नीचे माता का स्थान बनवाया गया।तभी से माता की पूजा निरंतर होती आ रही है। इन्हें भी देखें पानीपत त्रिलोकपुर मंदिर शाकम्भरी शक्तिपीठ शाकम्भरी सागडी गांव बाबा सहारू भगत सन्दर्भ