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सिख धर्म और इस्लाम
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सितंबर 2014
सिख धर्म और इस्लाम का प्रारंभ से ही एक अभिन्न एवं विचित्र संबंध रहा है। सिख धर्म का उदय पंजाब क्षेत्र (वर्तमान भारत व पाकिस्तान) में हुआ जहाँ हिंदू व मुस्लिम दोनों धर्मों के अनुयायी काफी मात्रा में थे। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक के बारे में कहा गया :
बाबा नानक शाह फकीर
हिंदू दा गुरू, मुसलमान दा पीर
जहाँ प्रारंभ से ही मुस्लिम लोगों का भी पर्याप्त समर्थन सिख धर्म को मिला, वहीं बाद के समय में मुस्लिम शासकों ने इस धर्म व इसके अनुयायियों का दमन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।
सिख धर्म की संस्थापना
मरदाना - गुरु नानक के दो सबसे पुराने मित्रों व प्रथम सिखों में से एक
राय बुलार - गुरु नानक में श्रद्धा रखने वाले सबसे पहले प्रशंसकों में एक
साईं मियाँ मीर - स्वर्ण मंदिर की नींव रखने वाले
बाबा फरीद - गुरु ग्रंथ साहब में इनकी वाणी विराजमान है
सिख धर्म के समर्थक/प्रशंसक
अल्लाह यार खाँ - गुरु गोविंद सिंह जी का जीवन चरित्र शायरी में लिखा
बाबर - गुरु नानक को जेल भेजा किंतु उनकी असलियत पता चलने पर ससम्मान रिहा किया।
अकबर - गुरुदर्शन हेतु स्वयं चलकर आए तथा आम जनता के साथ नीचे बैठ लंगर छका।
बुद्धू शाह - मुगलों के विरुद्ध युद्ध में गुरु गोविंद सिंह का साथ दिया
नवाब मलेरकोटला - गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों को दीवार में चिनवाने का विरोध किया।
सिख धर्म के विरोध में इस्लाम/मुस्लिम
औरंगज़ेब - गुरु गोविंद सिंह से संघर्ष
फर्रुखसियर - बाबा बंदा बहादुर से संघर्ष
सन्दर्भ
श्रेणी:सिख धर्म
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