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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

द्वादश ज्योतिर्लिंग

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हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार शिवजी जहाँ-जहाँ स्वयं प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। सौराष्ट्र प्रदेश (काठियावाड़) में श्रीसोमनाथ, श्रीशैल पर श्रीमल्लिकार्जुन, उज्जयिनी (उज्जैन) में श्रीमहाकाल, ॐकारेश्वर अथवा अमलेश्वर (मालवा में), वैद्यनाथं चिताभूमौ देवघर झारखंड नामक स्थान श्रीभीमशंकर, सेतुबंध पर श्री रामेश्वर, दारुकावन में श्रीनागेश्वर, वाराणसी (काशी) में श्री विश्वनाथ, गौतमी (गोदावरी) के तट पर श्री त्र्यम्बकेश्वर, हिमालय पर केदारखंड में श्रीकेदारनाथ और शिवालय में श्रीघुश्मेश्वर। हिंदुओं में मान्यता है कि जो मनुष्य प्रतिदिन प्रात:काल उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम का पाठ करता है, उसके सभी प्रकार के पाप छूट जाते हैं और उसको संपूर्ण सिद्धियों का फल प्राप्त हो जाता है। प्रत्येक ज्योतिर्लिङ्ग का एक-एक उपलिंग भी है जिनका विवरण शिवमहापुराण की 'ज्ञानसंहिता' के 38वें एवं 'कोटिरुद्रसंहिता' के प्रथम अध्याय में प्राप्त होता है। == स्थल == 12 ज्योतिर्लिंगों के नाम शिव पुराण (शतरुद्र संहिता, अध्याय 42/2-4) के अनुसार इस प्रकार हैं- == सन्दर्भ == === द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति === सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌। उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌ ॥1॥ परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥2॥ वारणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमी तटे। हिमालये तु केदारं ध्रुष्णेशं च शिवालये ॥3॥ एतानि ज्योतिर्लिंगानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरेण विनश्यति ॥4॥ ॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति संपूर्णम्‌ == स्रोत्र == द्वादशज्योतिर्लिंगानि (जागरण.कॉम पर) == इन्हें भी देखें == शिवलिंग लिंगोद्भव उपलिङ्ग