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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ज़ंजीर (1973 फ़िल्म)

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ज़ंजीर ज़ंजीर.jpg ज़ंजीर का पोस्टर प्रकाश मेहरा प्रकाश मेहरा कल्याणजी आनंदजी गुलशन बावरा (गीत) सलीम ख़ान, जावेद अख़्तर अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, प्राण, ओम प्रकाश, अजीत, बिन्दू, इफ़्तेख़ार, केष्टो मुखर्जी, रणधीर, गुलशन बावरा, राम मोहन, युनुस परवेज़, संजना, पूर्णिमा, ११ मई १९७३ भारत हिन्दी ज़ंजीर 1973 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। संक्षेप चरित्र मुख्य कलाकार अभिनेता/अभिनेत्री पात्र/भूमिका सूचनाअमिताभ बच्चनइंस्पेक्टर विजय खन्नाजया बच्चनमालाप्राणशेर खानओम प्रकाशडिसिल्वाअजीतसेठ धर्मदयाल तेजाबिन्दूमोनाइफ़्तेख़ारपुलिस कमिश्नर सिंहकेष्टो मुखर्जीगंगूरणधीरलाला अशोकशेर खान का मित्रगुलशन बावराबंजारा गायकगाना 'दीवाने है दीवानों को'संजनाबंजारा नर्तकीगाना 'दीवाने है दीवानों को'राम मोहनकबीरयुनुस परवेज़काँस्टेबलराम सेठीकाँस्टेबलएम्. राजनरंजीतविजय के पितापूर्णिमासुमित्राविजय की माँनंदिता ठाकुरशांति भाभीसत्येन्द्र कपूरपुलिस इंस्पेक्टरआशालता वाब्गावकरइंस्पेक्टर की पत्नी 'व'विजय की सौतेली माँ भूषण तिवारीतेजा का आदमीजावेद खानतेजा का आदमीरणवीर राजतेजा का आदमीकृष्ण धवनतेजा का आदमीमैकमोहनतेजा का आदमी,शराब गोदाम मेंसप्रूपाटिलगोगा कपूरगोगा दल निर्देशक: प्रकाश मेहरा पटकथा: सलीम ख़ान, जावेद अख्तर निर्माता: प्रकाश मेहरा, बब्बू मेहरा सम्पादक: आर. महादिक कला निर्देशक: जे. जे. भेंडे चित्रण: एन . सत्येन वस्त्र एवं भूषा: वसंत महाजन, शंकर जाधव नृत्य निर्देशक: सत्यनारायण संगीतकार: कल्याणजी आनंदजी गीतकार: गुलशन बावरा पार्श्व गायक: आशा भोंसले, मन्ना डे, लता मंगेशकर, मोहम्मद रफ़ी संगीत गाना गायक समय सूचनाबना के क्यों बिगाड़ा रेलता मंगेशकर3:25चक्कू छुरियां तेज करा लोआशा भोंसले3:45दीवाने है दीवानों कोलता मंगेशकर मोहम्मद रफ़ी4:35विख्यात गानादिलजलों का दिल जला केआशा भोंसले3:55यारी है ईमान मेरामन्ना डे6:20सुविख्यात गाना रोचक तथ्य उल्लेखनीय वार्ता शेर खान: अस्सलाम-आले-कुं इंस्पेक्टर, हमारी खुशकिस्मती तुम जैसे बड़े अफसर ने हमें याद किया, हमारे लायक कोई खिदमत विजय: तुम्हारा नाम शेर खान हैं शेर खान: इस इलाके में नए आये हो साहब, वरना शेर खान को कौन नहीं जनता? खैर अब मुलाकात हो गई (शेर खान बैठने कुर्सी निकालने पर विजय उसे लात मारकर धकेल देता है) विजय: जब तक बैठने को न कहा जाये शराफ़त से खड़े रहो, यह पुलिस स्टेशन हैं तुम्हारे बाप का घर नहीं शेर खान: साहब आज तक किसी ने शेर खान से इतनी बड़ी बात नहीं कही, यह तुम नहीं तुम्हारी वर्दी तुम्हारी कुर्सी बोल रही हैं, जिस दिन यह कुर्सी यह वर्दी नहीं रहेगी तुम... विजय: (चिल्लाते) शाट अप यू ब्लडी... शेर खान: चिल्लाओ नहीं साहब, गला ख़राब हो जाएगी साहब, घंटी बजाओ और हवालदार को कहो के शेर खान को हवालात में बंद कर दे विजय: हवालदार, शेर खान को बहार छोड़ दो शेर खान: शेर खान खुद आया था, खुद चला जायेगा, खुदा-हाफिज़ परिणाम बौक्स ऑफिस समीक्षाएँ नामांकन और पुरस्कार बाहरी कड़ियाँ 0070947 ज़ंजीर श्रेणी:1973 में बनी हिन्दी फ़िल्म