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जांगलदेश
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उत्तर भारत का ऐतिहासिक क्षेत्र जंगल देश<div style="position:relative; margin: 0 0 0 0 0; border-collapse: collapse; border=">250x250पिक्सेल|उत्तरी-सबसे हल्का गुलाबी रंग का क्षेत्र "जंगलदेश" है - वर्तमान में बीकानेर, चुरू, गंगानगर और हनुमानगढ़ जिले</div> स्थान उत्तरी राजस्थान राज्य की स्थापना: चौथी - 15 वीं शताब्दी भाषा मारवाड़ी, बागड़ी राजवंश जाट
जांगलदेश/ जांगल प्रदेश यानि जंगल का देश (City of forest)
जंगलदेश ( Rajasthani ) जिसे जंगल प्रदेश के नाम से भी जाना जाता है, उत्तरी भारत में उत्तर, उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी राजस्थान राज्य में एक ऐतिहासिक क्षेत्र था। http://www.rajasthantourism.gov.in/destinations/bikaner/bikaneroverview.htm Bikaner https://web.archive.org/web/20070819181354/http://www.rajasthantourism.gov.in/destinations/bikaner/bikaneroverview.htm 2007-08-19 2007-09-08 इसमें बीकानेर, चुरू, गंगानगर और हनुमानगढ़ के वर्तमान जिले शामिल थे। यह दक्षिण में मारवाड़ और जैसलमेर क्षेत्रों से, पूर्व में अजमेर-मेरवाड़ा क्षेत्र से घिरा हुआ था। Jibraeil: "Position of Jaats in Churu Region", The Gurjaras - Vol. II, Ed Dr Vir Singh, Delhi, 2006, p. 223 महाभारत के भीष्म पर्व में इस प्रांत का उल्लेख मिलता है। Bhisma Parva On line।।
यह दक्षिण में मारवाड़ और जैसलमेर क्षेत्रों से, पूर्व में अजमेर-मेरवाड़ा क्षेत्र से घिरा हुआ था। Jibraeil: "Position of Jaats in Churu Region", The Gurjaras - Vol. II, Ed Dr Vir Singh, Delhi, 2006, p. 223 सदियों से यह क्षेत्र एक जाट साम्राज्य था। https://books.google.com/books?id=FGgMAQAAMAAJ The Gurjar: their role & contribution to the socio-economic life and polity of north & north-west India Vīrasiṃha Suraj Mal Memorial Education Society. Centre for Research and Publication (Originals) 2007 978-81-88629-69-5 The Gurjar: their role & contribution to the socio-economic life and polity of north & north-west India, Volume 3-page-16।।
इतिहास
महाभारत के भीष्म पर्व में इस प्रांत का उल्लेख मिलता है। Bhisma Parva On line भारतीय रेगिस्तान में जाट लोगों ने किस काल में खुद को स्थापित किया यह ज्ञात नहीं है। चौथी शताब्दी तक वे भारत में पंजाब तक फैल गए थे। Thakur Deshraj, Jat Itihas, 1934, p. 616-624।।
उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी राजस्थान, जिसे प्राचीन काल में जंगलदेश के नाम से जाना जाता था, Jibraeil: "Position of Jats in Churu Region", The Jats – Vol. II, Ed Dr Vir Singh, Delhi, 2006, p. 221–223 अपने स्वयं के प्रमुखों द्वारा शासित और बड़े पैमाने पर अपने स्वयं के प्रथागत कानून द्वारा शासित जाट वंशों द्वारा बसा हुआ था। Dashrath Sharma, Rajasthan through the ages, Jodhpur, 1966, Vol.I, p. 287–288 इन केंटन इसके अलावा वहाँ जाट लोगों के कई कबीले, एक साथ उदाहरण के लिए राजपूत प्रोपराइटर से छीन लिया थे Bhukar, BhaduMay 2021, चाहर । Thakur Deshraj, Jat Itihas, Delhi, 2002, p. 269–285 जाट प्रदेशों के बारे में कहा जाता है कि सात पट्टी सत्तावन मझ (मतलब सात लंबे और सत्तावन छोटे प्रदेश)। G. S. L. Devra, op. cit., Cf. Dayaldas ri Khyat, Part II, p. 7–10 प्रत्येक क्षेत्र में राजधानी और गांवों की संख्या के साथ मुख्य कुल और उनके प्रमुख निम्नलिखित हैं। Jibraeil: "Position of Jats in Churu Region", The Jats – Vol. II, Ed Dr Vir Singh, Delhi, 2006, p. 222 Dr Brahma Ram Chaudhary: The Jats – Vol. II, Ed Dr Vir Singh, Delhi, 2006, p. 250।।
लाधडिया के जाट राजा पाण्डु गोदारा रासलाना के जाट राजा रायसल बेनीवाल की बेटी मलकी कौर से प्रेम करता था तथा राजकुमारी मलकी कौर भी उनसे प्रेम करती थी। परंतु उससे पिता ने उसकी शादी भाड़ग रियासत के जाट राजा फुला सहारण से करवा दी। राजकुमारी मलकी ने अपने गुप्तचर के माध्यम से राजा पाण्डु गोदारा तक संदेश भिजवाया की वह उसे ले जाए यह संदेश लेकर पाण्डु गोदारा ने अपनी सेना के साथ भाड़ग पर हमला कर दिया तथा वह मलकी को लेकर चला गया। इनके इस कार्य के कारण अन्य जाट शासको ने पाण्डु गोदारा की रियासत पर हमला कर दिया और पाण्डु अकेला इनसे नही लड सकता था इसलिये उसने राव जोधा के बेटे राव बिका की सहायता ली उसकी सहायता से वह लाधडिया से बचकर निकल गया परंतु उनकी रियासत लाधडिया को भारी नुकसान हुआ बाद मे गोदारा जाटो ने एक नई रियासत शेख़सर की स्थापना की और पाण्डु गोदारा ने अपनी सहायता के बदले मे अपनी पुरी रियासत राव बिका को दान कर दी जो आगे चलकर बीकानेर रियासत कहलाई यहां से जाग्लदेश पर जाट वंश का अंत हुआ तथा राजपूत वंश की शुरूवात हुई।https://books.google.com/books?id=be-7CwAAQBAJ&pg=PA78&dq=rao+bika+jats#q=rao%20bika%20jats Nomadic Narratives: A History of Mobility and Identity in the Great Indian Kothiyal Tanuja Cambridgr University Press 2016 9781107080317 78 2020-09-17 Jibraeil: "Position of Jaats in Churu Region", The Gurjaras - Vol. II, Ed Dr Vir Singh, Delhi, 2006, p. 223 G. S. L. Devra, op. cit., 7–8, Cf. Dayaldas ri Khyat, part 2, p. 4–5
यह सभी देखें
अभिरा जनजाति
राजस्थानी लोग
राजस्थान
जाट
जाट राजवंशों और राज्यों की सूची
संदर्भ
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