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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

राम कुमार वर्मा

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रामकुमार वर्मा Ramkumar-verma.jpg yes 1905 09 15 सागर जिला, सेन्ट्रल प्रोविन्स, भारत 1990 हिन्दी भारतीय भारतीय एम ए (हिन्दी), नागपुर विश्वविद्यालय से पीएच डी हरबर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय छायावाद 'एकलव्य', 'रेशमी ताई', 'पृथ्वीराज की आँखे', 'जौहर', 'सप्त किरन', 'कौमुदी महोत्सव', 'दीपदान' पद्मभूषण 1963 साहित्य और शिक्षा डॉ रामकुमार वर्मा (15 सितम्बर, 1905 - 1990) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि के रूप में जाने जाते हैं। उन्हें हिन्दी एकांकी का जनक माना जाता है। उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन १९६३ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इनके काव्य में 'रहस्यवाद' और 'छायावाद' की झलक है। डॉ. रामकुमार वर्मा का जन्म मध्य प्रदेश के सागर जिले में 15 सितम्बर सन् 1905 ई. में हुआ। इनके पिता लक्ष्मी प्रसाद वर्मा डिप्टी कलैक्टर थे। वर्माजी को प्रारम्भिक शिक्षा इनकी माता श्रीमती राजरानी देवी ने अपने घर पर ही दी, जो उस समय की हिन्दी कवयित्रियों में विशेष स्थान रखती थीं। बचपन में इन्हें "कुमार" के नाम से पुकारा जाता था। रामकुमार वर्मा में प्रारम्भ से ही प्रतिभा के स्पष्ट चिह्न दिखाई देते थे। ये सदैव अपनी कक्षा में प्रथम आया करते थे। पठन-पाठन की प्रतिभा के साथ ही साथ रामकुमार वर्मा शाला के अन्य कार्यों में भी काफ़ी सहयोग देते थे। अभिनेता बनने की रामकुमार वर्मा की बड़ी प्रबल इच्छा थी। अतएव इन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन में कई नाटकों में एक सफल अभिनेता का कार्य किया है। रामकुमार वर्मा सन् 1922 ई. में दसवीं कक्षा में पहुँचे। इसी समय प्रबल वेग से असहयोग की आँधी उठी और रामकुमार वर्मा राष्ट्र सेवा में हाथ बँटाने लगे तथा एक राष्ट्रीय कार्यकर्ता के रूप में जनता के सम्मुख आये। इसके बाद वर्माजी ने पुनः अध्ययन प्रारम्भ किया और सब परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करते हुए प्रयाग विश्वविद्यालय से हिन्दी विषय में एम. ए. में सर्वप्रथम आये। उन्होने नागपुर विश्वविद्यालय की ओर से 'हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास' पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। अनेक वर्षों तक रामकुमार वर्मा प्रयाग विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्राध्यापक तथा फिर अध्यक्ष रहे हैं। रामकुमार वर्मा आधुनिक हिन्दी साहित्य के सुप्रसिद्ध कवि, एकांकीकार और आलोचक हैं। "चित्ररेखा" काव्य-संग्रह पर इन्हें हिन्दी का सर्वश्रेष्ठ "देव पुरस्कार" मिला है। साथ ही "सप्त किरण" एकांकी संग्रह पर अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन पुरस्कार और मध्यप्रदेश शासन परिषद से "विजयपर्व" नाटक पर प्रथम पुरस्कार मिला है। रामकुमार वर्मा रूसी सरकार के विशेष आमंत्रण पर मास्को विश्वविद्यालय के अंतर्गत प्रायः एक वर्ष तक शिक्षा कार्य कर चुके हैं। हिन्दी एकांकी के जनक रामकुमार वर्मा ने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और साहित्यिक विषयों पर 150 से अधिक एकांकी लिखीं। भगवतीचरण वर्मा ने कहा था, "डॉ. रामकुमार वर्मा रहस्यवाद के पंडित हैं। उन्होंने रहस्यवाद के हर पहलू का अध्ययन किया है। उस पर मनन किया है। उसको समझना हो और उसका वास्तविक और वैज्ञानिक रूप देखना हो तो उसके लिए श्री वर्मा की ‘चित्ररेखा’ सर्वश्रेष्ठ काव्य ग्रंथ होगा।" डॉ.रामकुमार वर्मा की कविता, संगीत और कलाओं में गहरी रुचि थी। 1921 तक आते-आते युवक रामकुमार गाँधी जी के उनके असहयोग आंदोलन में सम्मिलित हो गए। उन्होंने 17 वर्ष की आयु में एक कविता प्रतियोगिता में 51 रुपए का पुरस्कार जीता था। यहीं से उनकी साहित्यिक यात्रा आरंभ हुई थी। डॉ. रामकुमार वर्मा ने देश ही नहीं विदेशों में भी हिन्दी का परचम लहराया। 1957 में वे मास्को विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में सोवियत संघ की यात्रा पर गए। 1963 में उन्हें नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय ने शिक्षा सहायक के रूप में आमंत्रित किया। 1967 में वे श्रीलंका में भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष के रूप में भेजे गए। हिन्दी के बारे में डॉ रामकुमार वर्मा का विचार था कि- ''‘‘जिस देश के पास हिंदी जैसी मधुर भाषा है वह देश अंग्रेज़ी के पीछे दीवाना क्यों है? स्वतंत्र देश के नागरिकों को अपनी भाषा पर गर्व करना चाहिए। हमारी भावभूमि भारतीय होनी चाहिए। हमें जूठन की ओर नहीं ताकना चाहिए’’ कृतियाँ रामकुमार वर्मा की रचनाएँ सन् 1922 ई. से प्रारम्भ हुईं। इनकी कृतियाँ निम्नलिखित हैं- वीर हमीर (काव्य ; सन 1922 ई.) चित्तौड़ की चिन्ता (काव्य सन् 1929 ई.) साहित्य समालोचना (सन 1929 ई.) अंजलि (काव्य ; सन 1930 ई.) अभिशाप (कविता ; सन 1931 ई.) हिन्दी गीतिकाव्य (संग्रह ; सन 1931 ई.) निशीथ (कविता ; सन 1935 ई.) चित्ररेखा (कविता ; सन 1936 ई.) पृथ्वीराज की आँखें (एकांकी संग्रह ; सन 1938 ई.) कबीर पदावली (संग्रह सम्पादन ; सन 1938 ई.) हिन्दी साहित्य का आलोचनात्मक इतिहास (सन 1939 ई.) आधुनिक हिन्दी काव्य (संग्रह सम्पादन ; सन 1939 ई.) जौहर (कविता संग्रह ; 1941 ई.) रेशमी टाई (एकांकी संग्रह ; सन 1941 ई.) शिवाजी (सन 1943 ई.) चार ऐतिहासिक एकांकी (संग्रह ; सन 1950 ई.) रूपरंग (एकांकी संग्रह-सन 1951 ई.) कौमुदी महोत्सव ऐतिहासिक नाटक एकलव्य उत्तरायण ओ अहल्या बाहरी कड़ियाँ हिंदी एकांकी के जन्मदाता डॉ॰ रामकुमार वर्मा श्रेणी:१९६३ पद्म भूषण श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार श्रेणी:1905 में जन्मे लोग श्रेणी:१९९० में निधन