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ज़िन्द कौल
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जिन्दा कौल 'मास्टरजी' साहित्यकार भारतीय कश्मीरी भाषा कविता सुमरन साहित्य अकादमी पुरस्कार (कश्मीरी) से सम्मानित
ज़िन्द कौल (1884-1965) भारतीय कवि, लेखक और शिक्षक थे। उन्होंने पारसी, हिन्दी, उर्दू और कश्मीरी में रचनाएँ की।http://kunear.com/styled-25/styled-18/ Zinda Kaul kunear.com 28 दिसम्बर 2013 https://web.archive.org/web/20120814055122/http://kunear.com/styled-25/styled-18/ 14 अगस्त 2012 dead कौल ने कश्मीरी कार्यों का पारसी, अंग्रेज़ी और देवनागरी में अनुवाद भी किया। इनके द्वारा रचित एक कविता–संग्रह सुमरन के लिये उन्हें सन् १९५६ में साहित्य अकादमी पुरस्कार (कश्मीरी) से सम्मानित किया गया।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी १ सितंबर २०१७ https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead
व्यक्तिगत जीवन
ज़िन्द कौल को उनके शिष्यों और दोस्तों में मास्टरजी के नाम से भी जाना जाता था।http://www.kecss.org/prominent+kashmiris+people+zkmasterji.html community - prominent kashmiris Kashmir Education, Culture & Science society (KECSS) 28 दिसम्बर 2013 https://web.archive.org/web/20131213105418/http://www.kecss.org/prominent+kashmiris+people+zkmasterji.html 13 दिसंबर 2013 dead उनको यह नाम इसलिए मिला क्योंकि वो विद्यालय और घर में बहुत कश्मीरियों को पढ़ाया करते थे।
कौल का जन्म कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ। उनके पिता लक्ष्मण पंडित उनकी अनौपचारिक शिक्षा के प्रति तटस्थ थे और कौल को जीवन में विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। वो एक लम्बे समय के लिए विद्यालय शिक्षक थे। उसके बाद, उन्होंने एक लिपिक के रूप में कार्य किया। सन् 1939 में कौल कश्मीर प्रचार कार्यालय से एक अनुवादक के रूप में सेवानिवृत हुए। उनका १९६५ में जम्मू में निधन हुआ।
साहित्यिक कार्य
ज़िन्द कौल प्रथम कश्मीरी हैं जिन्होंने साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता, उन्हें सुमरन नामक कविता संकलन पुस्तक की रचना के लिए वर्ष 1956 में यह पुरस्कार मिला।Modern Indian Literature, an Anthology, Vol 3 http://books.google.co.th/books?id=m1R2Pa3f7r0C&pg=PA692 के॰ एम॰ जॉर्ज 692 28 दिसम्बर 2013 इसका प्रथम संस्करण देवनागरी में प्रकाशित हुआ और बाद में सरकार ने इसे पारसी-अरबी लीपियों में छपवाया। साहित्य अकादमी ने कौल को इस पुस्तक के लिए पुरस्कार राशी ₹ 500 दिये।
कौल ने शुरु में पारसी, हिन्दी और उर्दू में लिखा। उनकी प्रथम कविता यूनिटी एण्ड सेमपैथी (Unity and Sympathy) थी जिसकी रचना 1896 में की और इसे श्रीनगर में सनातन धर्म सभा में सुनाया।Hindu Rulers, Muslim Subjects: Islam, Rights and the history of Kashmir http://books.google.co.th/books?id=ZzMx5mPJckkC&q=kaul#v=snippet&q=kaul&f=false मृदु राय सी हर्स्ट & कोर्पोरेशन लिमिटेड, लन्दन 2004 1-85065-661-4 249
मास्टरजी ने 1942 में कश्मीरी में लेखन आरम्भ कर दिया। उन्होंने अपनी कश्मीरी कविताओं में प्रारम्भ में भक्ति, दर्शन और शान्ति गीत लिखे।http://www.lisindia.net/Kashmiri/Kash_lite.html Kashmir LIterature CIIL lisindia.net Nazam 28 दिसम्बर 2013 https://web.archive.org/web/20100717033225/http://www.lisindia.net/Kashmiri/Kash_lite.html 17 जुलाई 2010 live मास्टरजी की कविताएँ सभी चार भाषाओं में प्रकाशित हुई। यद्यपि उन्होंने कश्मीरी लेखने में नाम कमाया।
अनुवाद
ज़िन्द कौल ने रहस्यवादी कश्मीरी लेखक और कवि नन्द राम परमानन्द के सभी तीन भागों का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया।Welcome to Kashmir (Valley of Saints) http://khirbhawani.org/GreatSaints-of-Kashmir/parmanand.index.html khirbhawani.org 28 दिसम्बर 2013 https://web.archive.org/web/20150323152431/http://khirbhawani.org/GreatSaints-of-Kashmir/parmanand.index.html 23 मार्च 2015 dead
सन्दर्भ
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बाहरी कड़ियाँ
ब्रज काचरू द्वारा ज़िन्द कौल
श्रेणी:1884 में जन्मे लोग
श्रेणी:श्रीनगर के लोग
श्रेणी:१९६५ में निधन
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत कश्मीरी भाषा के साहित्यकार