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सज्जाद नौमानी
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ख़लील-उर-रहमान सज्जाद नोमानी (या केवल सज्जाद नोमानी) (जन्म 12 अगस्त 1955) एक भारतीय इस्लामी विद्वान, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता, शिक्षक और कई इस्लामी पुस्तकों के लेखक हैं। वह इस्लाम के विद्वान हैं। दारुल उलूम नदवतुल उलमा, मदीना इस्लामी विश्वविद्यालय
== प्रारंभिक जीवन ==
नोमानी का जन्म वर्ष 1955 में लखनऊ, भारत में हुआ था। उनके पिता मंज़ूर नुमानी भी एक प्रमुख इस्लामी विद्वान, धर्मशास्त्री, पत्रकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता थे। उनके दादा सूफ़ी मुहम्मद हुसैन एक व्यापारी और जमींदार थे।
नोमानी ने अपनी शिक्षा अपने गृहनगर में प्राप्त की, दारुल उलूम नदवतुल उलमा और दारुल उलूम देवबंद से स्नातक किया। बाद में उन्होंने मदीना के इस्लामिक विश्वविद्यालय में अध्ययन किया और कुरानिक अध्ययन में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
नोमानी एक शेख, विद्वान और नक्शबंदी सिलसिले (सांप्रदाय) के शिक्षक हैं, जो सूफ़ीवाद का एक प्रमुख सुन्नी आध्यात्मिक सिलसिला है। वह ज़ुल्फ़िक़ार अहमद नक्शबंदी के शिष्य हैं।
== सक्रियतावाद ==
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के संवैधानिक अधिकारों और आस्था की रक्षा के लिए "दीन और दस्तूर बचाओ" (धर्म बचाओ-संविधान बचाओ) अभियान चलाया। इस अभियान का नेतृत्व नोमानी ने किया, जिन्होंने जागरूकता पैदा करने के लिए पूरे देश की यात्रा की। उन्होंने भारतीय युवाओं को आतंकी संगठनों की ओर आकर्षित होने से रोकने के लिए सरकार, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, धार्मिक विद्वानों और मीडिया के साथ मिलकर पहल करने का भी आह्वान किया।
नोमानी ने समान नागरिक संहिता के खिलाफ अभियान चलाने के लिए बामसेफ और ईसाई, सिख, लिंगायत (कर्नाटक) और कई आदिवासी समुदायों जैसे धर्मों के विद्वानों के साथ एक अभियान चलाया।
नोमानी ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में भी भाग लिया और विवादास्पद कानून के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया।
== साहित्यिक कार्य ==
क्या अब भी ना जगोगे?
अल-फ़ुरक़ान (उनके पिता मंज़ूर नुमानी द्वारा शुरू की गई मासिक पत्रिका)।
== सन्दर्भ ==
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