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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

व्याख्याप्रज्ञप्ति

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व्याख्याप्रज्ञप्ति (प्राकृत में : 'विहायापण्णति' या 'विवाहापण्णति' ; "Exposition of Explanations") पाँचवाँ जैन आगम है जिसे भगवतीसूत्र भी कहते हैं। कुल ४५ जैन आगम हैं जो महावीर स्वामी द्वारा प्रख्यापित माने जाते हैं। व्याख्याप्रज्ञप्ति की रचना सुधर्मस्वामी द्वारा प्राकृत में की गयी है। यह सभी आगमों में बससे बड़ा ग्रन्थ है। कहते हैं कि इसमें ६० हजार प्रश्नों का संग्रह था जिनका उत्तर महावीर स्वामी ने दिया था। संरचना सभी उपलब्ध जैन आगमों में भगवतीसूत्र सबसे विशाल है। इसमें १३८ 'शतक' (अध्याय) हैं, जो कुल १९२३ उद्देशक (उप-अध्याय) में विभक्त है। इसके कुल श्लोकों की संख्या १५७५१ है। भगवतीसूत्र पर कोई भाष्य या निर्युक्ति नहीं मिलती किन्तु एक छोटी 'चूर्णी' और वृत्ति (अभयदेवसूरि कृत) मिलती है। इसके कुछ हिन्दी एवं गुजराती अनुवाद भी मिलते हैं। भगवतीसूत्र की भाषा अर्धमागधी है। इसकी प्रश्नोत्तर शैली में मनुष्य की गुप्त बौद्धिक जिज्ञासा के दर्शन होते हैं। श्री अमरमुनि ने भगवतीसूत्र की सामग्री को दस भागों में बाँटा है-http://www.herenow4u.net/index.php?id=67390 Study Of The Bhagavati Sutra 29 सितंबर 2014 https://web.archive.org/web/20150320133222/http://herenow4u.net/index.php?id=67390 20 मार्च 2015 live (१) आचार खण्ड (२) द्रव्य खण्ड (३) सिद्धान्त खण्ड (४) परलोक खण्ड (५) भूगोल खण्ड (६) खगोल खण्ड (७) गणितशास्त्र (८) गर्भशास्त्र (९) चरित खण्ड (१०) विविध भगवतीसूत्र में गणित जैन ऋषियों में क्रमचय-संचय (Permutations and combinations) काफी लोकप्रिय था। भगवतीसूत्र में क्रमचय-संचय के सरल प्रश्न चर्चा में आये हैं। जैसे, दिये गये मौलिक दार्शनिक वर्गों को एक, दो, तीन या अधिक एक साथ लेने पर कितने समुच्चय बन सकते हैं। http://www.infinityfoundation.com/mandala/t_es/t_es_agraw_jaina_frameset.htm Ancient Jaina Mathematics: an Introductionby D.P. Agrawal 29 सितंबर 2014 https://web.archive.org/web/20151211161024/http://www.infinityfoundation.com/mandala/t_es/t_es_agraw_jaina_frameset.htm 11 दिसंबर 2015 dead इस ग्रन्थ में १-१ लेकर बने समुच्चयों (कम्बिनेशन्स) को 'अलक संयोग' कहा गया है, २-२ लेकर बने समुच्चयों को 'द्विक संयोग' कहा गया है और द्विक संयोग की संख्या n(n-1)/2 बतायी गयी है।http://www.aryavert.com/mathematics.html History of Ganit (Mathematics) 29 सितंबर 2014 https://web.archive.org/web/20140202163958/http://www.aryavert.com/mathematics.html 2 फ़रवरी 2014 dead भगवतीसूत्र में दीर्घवृत्त के लिये 'परिमण्डल' शब्द प्रयोग किया गया है और इसके दो भेद बताये गये हैं- (१) प्रतरपरिमण्डल (समतल दीर्घवृत्त) (२) घनप्रतरपरिमण्डल (ellipsoid) इन्हें भी देखें आगम (जैन) सन्दर्भ श्रेणी:जैन आगम