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ताड़केश्वर महादेव मन्दिर
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800 वर्ष से अधिक प्राचीन हिन्दू अब्राम, वलसाड जिला, गुजरात भारत 20 35 24 N 72 56 12 E type:landmark_region:IN_scale:100 inline,title भारत में स्थिति India Gujaratताड़केश्वर महादेव मंदिर एक हिंदू मंदिर है। यह भारतीय राज्य गुजरात के वलसाड जिले में अब्राम शहर के निकट वांकी नदी के तट पर है। https://www.divyabhaskar.co.in/news/DGUJ-VAL-OMC-LCL-tadkeshwar-mahadev-temple-of-abrama-in-valsad-gujarati-news-5941777-NOR.html વલસાડ અબ્રામાના તડકેશ્વર મહાદેવની અનોખી ગાથા, શિવલિંગના દર્શનાર્થે લોકોની ભારે ભીડ Divyabhaskar
यह मंदिर 800 वर्ष से अधिक प्राचीन है, एवं वलसाड जिले के सबसे पुरातन मन्दिरों में से एक है। इस मन्दिर की विशेषता यह है कि इस मन्दिर की परिकल्पना इसके अन्दर स्थित शिवलिंग पर सूर्य की किरणें पड़ने के अनुसार अभिकल्कोपित एवं निर्मित किया गया था अतः इसके ऊपर कोई शिखर, गुम्बद या कोई छत नहीं है। इसलिए, इसे "ताड़केश्वर" के नाम से जाना जाता है। यहाँ स्थित शिवलिंग की लंबाई लगभग 6 से 8 फ़ीट की है।https://valsad.gujarat.gov.in/touristplaces/tadkeshwar-mahadev-temple About - Tadkeshwar Mahadev Temple, Valsad 19 मई 2022 15 जनवरी 2019 https://web.archive.org/web/20190115182303/https://valsad.gujarat.gov.in/touristplaces/tadkeshwar-mahadev-temple dead History of Tadkeshwar Mahadev Temple, Valsadhttps://www.youtube.com/watch?v=vKewooYRSvI Tadkeshwar Mahadev Mandir, Valsad, Gujarat:KM News Youtube
महाशिवरात्रि पर्व और श्रावण मास के अवसर पर पास में ही मेला लगता है।
इतिहास
6 ft 10 in m का अर्ध-गोलाकार शिवलिंग प्रतीत पत्थर मई 1215 में वांकी नदी के उत्तरी तट की झाड़ियों में देखा गया था। Samarpan magazine: "Tadkeshwar" उस समय स्थानीय लोगों ने इस पत्थर को अपने कब्जे में ले लिया और आंशिक रूप से इसे क्षतिग्रस्त भी कर दिया। तब इस पाषाण शिला में से बहुत से जहरीले ततैये व अन्य जीव निकले और मन्दिर के 1500 के घेरे में लगभग 60 लोगों को डंक मार दिया। उन सभी 60 लोगों की मृत्यु हो गई और उन्हें मंदिर स्थल पर दफनाया गया। तत्पश्चात इस स्थल पर एक दरगाह बनाई गई थी।
एक दिन भगवान शिव अब्राम के एक भक्त के स्वप्न में प्रकट हुए और उसे आज्ञा दी कि उस लिंग को वांकी नदी के किनारे से ले जाया जाए। भगवान शिव के दो भक्त इसे सरलता से उठा पाएंगे। जब लिंग बहुत भारी हो जाए तो उसे वहीं नीचे रख दें और उस स्थान पर स्थापना कर दें।"अंगूठाकार| ताड़केश्वर महादेव मंदिर, वलसाड़ का शिलालेखित इतिहास|236x236पिक्सेलइस स्थान पर एक मन्दिर निर्माण किया गया, जिसकी छत दो बार बनाई गई थी। पहली बार वह छत आग में नष्ट हो गई थी। दूसरी बार गिर गई। तब एक भक्त के स्वप्न में भगवान शिव प्रकट हुए और कहा कि मैं ताड़केश्वर महादेव हूँ। मुझे सूरज की किरणें चाहिए। इसलिए, मंदिर की छत का पुनर्निर्माण न करें। उसी दिन से ताड़केश्वर महादेव के शिवलिंग को मंदिर में सुरक्षित रखा गया और छत का कभी पुनर्निर्माण नहीं किया गया।
मंदिर के शिखर से खुला आकाश दिखता रहता, जिसमें लगभग 22 ft घेरे का खुला वृत्त है। दोपहर के समय सूर्य की किरणें सीधे उस वृत्त से शिवलिंग पर पड़ती हैं। History of Tadkeshwar Mahadev Temple: Image
संदर्भ
श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक
श्रेणी:गुजरात में शिव मन्दिर
श्रेणी:वलसाड ज़िला