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411 समाचार
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ज्ञानरंजन

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ज्ञानरंजन ज्ञानररंजन जी.jpg ज्ञानरंजन 21 नवंबर, 1936 अकोला, महाराष्ट्र 7 जनवरी 2026 जबलपुर, मध्य प्रदेश हिन्दी साहित्य भारतीय हिन्दी आधुनिक कहानी परिचय ज्ञानरंजन का जन्म 21 नवंबर 1936 को महाराष्ट्र के अकोला में हुआ था।कबाड़खाना, ज्ञानरंजन, राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली, परिवर्धित संस्करण-2002, अंतिम आवरण फ्लैप पर लेखक परिचय में उल्लिखित।प्रतिनिधि कहानियाँ, ज्ञानरंजन, राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली, नवम संस्करण-2015, पृष्ठ-i. उनका बचपन और किशोरावस्था अजमेर, दिल्ली और बनारस में बीता तथा उच्च शिक्षा इलाहाबाद में हुई। लंबे समय तक उनका स्थायी निवास मध्य प्रदेश के जबलपुर में रहा।पाखी (पत्रिका) (सितम्बर 2012), सं॰-प्रेम भारद्वाज, पृष्ठ-17. वे हिन्दी के प्रमुख कहानीकार, गद्यकार और साहित्यिक संपादक थे। साठोत्तरी हिन्दी कहानी के प्रमुख स्तम्भों में उनकी गणना की जाती है।प्रख्यात कथाकार और पहल के संपादक ज्ञानरंजन नहीं रहे नईदुनिया 8 जनवरी 2026 13 सितंबर 2026 वे साहित्यिक पत्रिका पहल के संस्थापक-संपादक थे और इसके माध्यम से हिन्दी साहित्य में उनकी विशिष्ट पहचान बनी।https://rajkamalprakashan.com/author/gyanranjan ज्ञानरंजन राजकमल प्रकाशन 13 सितंबर 2026 अक्तूबर 2026 InternetArchiveBot 7 जनवरी 2026 को जबलपुर में उनका निधन हो गया।प्रख्यात कथाकार व संपादक ज्ञानरंजन नहीं रहे, 90 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस अमर उजाला 8 जनवरी 2026 13 सितंबर 2026https://rajkamalprakashan.com/author/gyanranjan ज्ञानरंजन राजकमल प्रकाशन 13 सितंबर 2026 https://web.archive.org/web/20241204150830/https://rajkamalprakashan.com/author/gyanranjan 4 दिसंबर 2024 dead लेखन-कार्य ज्ञानरंजन साठोत्तरी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में से एक के रूप में मान्य हैं। साठोत्तरी पीढ़ी के 'चार यार' के रूप में प्रसिद्ध मंडली के चारों सदस्य -- ज्ञानरंजन, दूधनाथ सिंह, काशीनाथ सिंह एवं रवीन्द्र कालिया में से सबसे पहले सर्वाधिक प्रसिद्धि ज्ञानरंजन को ही प्राप्त हुई; हालांकि ये चारों अपने ढंग के श्रेष्ठ कहानीकार रहे हैं। प्रकाशित संग्रह के रूप में ज्ञानरंजन के छह कहानी संग्रह प्रकाशित हुए हैं, लेकिन यह बहुचर्चित तथ्य है कि इनकी कहानियों की कुल संख्या 25 है, जो कि सपना नहीं नामक संकलन में एकत्र प्रकाशित हैं। कम लिखने के संबंध में अनेक लोगों ने अनेक तरह की बातें कही हैं। किसी ने अनुभव के चूक जाने की बात की, तो किसी ने अगली पारी से पहले का विराम माना, तो किसी ने पहल जैसी पत्रिका की संपादकीय विवशता; परंतु स्वयं ज्ञानरंजन की नजर में कहानी-लेखन बंद करने का प्रमुख कारण उनके अपने दृष्टिकोण से सर्वश्रेष्ठता की कसौटी ही रही है। जो भी लिखें या तो सर्वोत्तम हो या फिर हो ही नहीं।पाखी (सितम्बर 2012), सं॰-प्रेम भारद्वाज, पृ॰-16. यही कारण है कि पुस्तक रूप में प्रकाशित 25 कहानियों में से किसी एक कहानी को भी किसी मान्य समीक्षक ने कमजोर या उपेक्षा के योग्य के रूप में विवेचित नहीं किया। ज्ञानरंजन साठोत्तरी पीढ़ी के लेखक हैं और अकहानी में शामिल लेखकों के मित्र भी। इसके बावजूद 'अकहानी' को दुःखद परिणति तक पहुँचाने वाली न्यूनताओं से उनकी कहानियाँ प्रायः मुक्त रही हैं। उनकी एक सुप्रसिद्ध कहानी 'घंटा' की समीक्षा करते हुए हिंदी कहानी के शीर्षस्थ समीक्षक सुरेन्द्र चौधरी ने लिखा था कि कथानकहीनता के सादृश्य के बावजूद 'अकहानी' के संयोजन से 'घंटा' का संयोजन अनिवार्यतः भिन्न है।हिन्दी कहानी : प्रक्रिया और पाठ, सुरेन्द्र चौधरी, राधाकृष्ण प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-1995, पृ॰-164. घंटा में मानव-संबंधों की विडंबना प्रत्यक्ष है। मानव-संबंधों की विडंबना की यह कहानी पूरे समय की विडंबना से गुजर जाती है।हिन्दी कहानी : प्रक्रिया और पाठ, पूर्ववत्, पृ॰-161. चौधरी जी के इस विवेचनात्मक कथन में अनायास ही कहानी-समीक्षा का एक प्राथमिक परंतु व्यापक प्रतिमान भी झलक उठा है। ज्ञानरंजन की अधिसंख्य कहानियों में स्पष्ट दिखने वाली वैयक्तिकता रचनात्मकता के ही रास्ते जिस सफलता से सामाजिक हो जाती है, वह उनकी निजी और खास विशेषता है। 'घंटा' के अतिरिक्त संबंध, पिता, बहिर्गमन, फेंस के इधर और उधर आदि कहानियों ने भी एक तरह से अपने नाम का प्रतिमान रच डाला है। कहानियों के अतिरिक्त अन्य विधाओं में भी ज्ञानरंजन ने जमकर नहीं लिखा है। मन की तरंगों के अनुरूप एकाध फुटकल रचनाएँ ही जब तब होती रही है। संस्मरण, व्याख्यान, संपादकीय, रचनात्मक निबंध, साक्षात्कार, अखबारी टिप्पणियाँ तथा एक उपन्यास-अंश आदि के साथ एक पत्र का संकलन भी उनकी पुस्तक कबाड़खाना में संकलित है। इसके अतिरिक्त मुख्यतः व्याख्यानों/वक्तव्यों एवं साक्षात्कारों के साथ कुछ अन्य विधाओं की रचनाओं की एक पुस्तक उपस्थिति का अर्थ नाम से प्रकाशित हुई है।उपस्थिति का अर्थ, ज्ञानरंजन, सेतु प्रकाशन, प्रथम संस्करण-2020, पृष्ठ-7-8. तात्पर्य यह कि संख्यात्मक रूप में तो ज्ञानरंजन की कुल जमा-पूँजी तीन पुस्तकों में समा गयी है, लेकिन गुणात्मक रूप में वे लंबे समय से प्रायः सभी मान्य समीक्षकों के द्वारा हिंदी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकारों में से एक के रूप में मान्य रहे हैं।डाॅ॰ विश्वनाथ त्रिपाठी, 'पाखी' (सितम्बर 2012), सं॰-प्रेम भारद्वाज, पृ॰-24. कहानियों के अनुवाद एवं अन्य गतिविधि ज्ञानरंजन की कहानियाँ भारतीय भाषाओं के अतिरिक्त अनेक विदेशी भाषाओं में भी अनूदित हो चुकी हैं। भारतीय विश्वविद्यालयों के अतिरिक्त ओसाका, लंदन, सैनफ्रांसिस्को, लेनिनग्राद, और हाइडेलबर्ग आदि के अनेक अध्ययन केंद्रों के पाठ्यक्रमों में भी इनकी कहानियाँ शामिल हैं। लंदन पेंग्विन्स की भारतीय साहित्य की एन्थ्रूलॉजी में भी इनकी कहानी सम्मिलित है। अमेरिका में विलेज वॉयस द्वारा फिल्म का निर्माण किया गया है तथा दूरदर्शन द्वारा भी इनकी कहानियों पर आधारित दो फिल्मों का निर्माण हुआ है। हिन्दी की बहुचर्चित पत्रिका पाखी का सितंबर 2012 में ज्ञानरंजन पर केंद्रित उम्दा अंक प्रकाशित हुआ। संपादन ज्ञानरंजन ने हिंदी की सर्वोत्कृष्ट पत्रिकाओं में से निर्विवाद रूप से एक पहल का लंबे समय तक कुशल संपादन किया है। 'पहल' के 90 अंक निकालने के बाद सितंबर-अक्टूबर 2008 में लगातार शारीरिक, मानसिक एवं आर्थिक संघर्षों से ऊब कर उन्होंने 'पहल' का संपादन बंद कर दिया था। साहित्य-जगत में तब एक बड़ा खालीपन सा महसूस किया गया था। 3 वर्ष से अधिक के अंतराल के बादपहल-91 (जनवरी 2013), संपादक- ज्ञानरंजन, राजकुमार केसवानी, पृष्ठ-5. पुनः जनवरी 2013 के अंक-91 के साथ 'पहल' की दूसरी पारी भिन्न आकार एवं कुछ भिन्न रूप में पुनः आरंभ हो गयी और अप्रैल 2021 (अंक-125) तक अविराम रूप से जारी रही। अंक-125 के संपादकीय में इस अंक को इस यात्रा का आख़िरी अंक होने की घोषणा कर दी गयी।पहल-125 (अप्रैल 2021), संपादक- ज्ञानरंजन, राजकुमार केसवानी, पृष्ठ-9. = सम्मान सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का 'साहित्य भूषण सम्मान' 'अनिल कुमार पुरस्कार' तथा 'सुभद्रा कुमारी चौहान पुरस्कार' मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग का 'शिखर सम्मान' वर्ष 2001–02 का राष्ट्रीय 'मैथिलीशरण गुप्त सम्मान' अमर उजाला शब्द सम्मान के अंतर्गत 'आकाशदीप' सम्मान (2019) प्रेमचंद स्मृति कथा-सम्मान (2024) सन्दर्भ श्रेणी:कहानीकार श्रेणी:हिन्दी कथाकार श्रेणी:हिन्दी गद्यकार श्रेणी:1936 में जन्मे लोग श्रेणी:जीवित लोग