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जॉन होपफील्ड
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जॉन होपफील्ड John J. Hopfield delivering his lecture at the 2024 Nobel Prize Lectures in Stockholm.jpg 15 जुलाई 1933 शिकागो, संयुक्त राज्य अमेरिका अमेरिकी भौतिकी, कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क प्रिंसटन विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान स्वार्थमोर कॉलेज, कॉर्नेल विश्वविद्यालय होपफील्ड नेटवर्क, मशीन लर्निंग भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (2024)
जॉन जोसेफ होपफील्ड (जन्म 15 जुलाई 1933) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं, जिन्हें भौतिकी, जीव विज्ञान और कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क (मशीन लर्निंग) के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2024/hopfield/facts/ जॉन होपफील्ड की जीवनी और तथ्य नोबेल पुरस्कार समिति 3 जून 2026 वर्ष 2024 में उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए जेफ्री हिंटन के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।https://www.nytimes.com/2024/10/08/science/nobel-prize-physics.html दो वैज्ञानिकों ने जीता 2024 का भौतिकी नोबेल द न्यूयॉर्क टाइम्स 8 अक्टूबर 2024 3 जून 2026 यह महान सम्मान उन्हें कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क के माध्यम से मशीन लर्निंग (यंत्र अधिगम) की मूलभूत खोजों और 'होपफील्ड नेटवर्क' का अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी सिद्धांत प्रस्तुत करने के लिए प्रदान किया गया था।होपफील्ड जॉन तंत्रिका नेटवर्क और भौतिक प्रणालियां राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी की कार्यवाही 1982 79 2554-2558 उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटर विज्ञान को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।स्मिथ रॉबर्ट आधुनिक भौतिकी और तंत्रिका नेटवर्क 2020 विज्ञान शिक्षा प्रकाशन
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
उनका जन्म 15 जुलाई 1933 को संयुक्त राज्य अमेरिका के इलिनोइस राज्य में स्थित शिकागो नामक एक अत्यंत प्रमुख नगर में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों ही अत्यंत प्रख्यात भौतिक विज्ञानी थे, जिसके कारण बचपन से ही उनके घर में विज्ञान, तार्किक विश्लेषण और ज्ञानार्जन का एक अत्यंत उत्कृष्ट वातावरण विद्यमान रहता था।डेविस पॉल होपफील्ड का प्रारंभिक जीवन और विज्ञान 2015 भौतिकी शिक्षा प्रकाशन बचपन से ही उनकी विज्ञान और अत्यंत जटिल गणितीय प्रश्नों को सुलझाने में अत्यधिक रुचि थी। इसी स्वाभाविक वैज्ञानिक जिज्ञासा ने उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित किया।जॉनसन माइकल महान भौतिक विज्ञानियों का प्रारंभिक जीवन प्रायोगिक भौतिकी पत्रिका 2018 25 112-118
अपनी प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा उत्कृष्ट रूप से पूर्ण करने के पश्चात, उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पेंसिल्वेनिया के अत्यंत प्रतिष्ठित स्वार्थमोर कॉलेज में प्रवेश लिया। इसी महान संस्थान से उन्होंने वर्ष 1954 में भौतिकी विषय में अपना स्नातक अत्यंत उत्कृष्ट अंकों के साथ पूर्ण किया।https://www.swarthmore.edu/news-events/john-hopfield-nobel-prize स्वार्थमोर कॉलेज के पूर्व छात्र ने जीता नोबेल स्वार्थमोर कॉलेज 3 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot इसके पश्चात वे अपना अनुसंधान कार्य जारी रखने के लिए कॉर्नेल विश्वविद्यालय चले गए। इसी प्रतिष्ठित संस्थान से उन्होंने वर्ष 1958 में भौतिकी में अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की। यहाँ उन्होंने ठोस अवस्था भौतिकी पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था, जिसने उनके भविष्य के सबसे बड़े वैज्ञानिक सिद्धांतों की अत्यंत मजबूत नींव रखी।https://physics.cornell.edu/history कॉर्नेल विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञानी कॉर्नेल विज्ञान संकाय 3 जून 2026
विशेषज्ञता और सिद्धांत
उनके अकादमिक शोध और विशेषज्ञता का मुख्य केंद्र ठोस अवस्था भौतिकी, जीव भौतिकी और कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क था। वर्ष 1982 में उन्होंने विज्ञान की दुनिया में एक अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसे विज्ञान जगत में उनके सम्मान में 'होपफील्ड नेटवर्क' के नाम से जाना जाता है।विलियम्स जॉर्ज मशीन लर्निंग के नए सिद्धांत 2021 स्प्रिंगर प्रकाशन उन्होंने भौतिकी के 'स्पिन ग्लास' (चुंबकीय प्रणालियों) के गणितीय सिद्धांतों का उपयोग करके यह प्रमाणित किया कि मस्तिष्क की तरह एक कंप्यूटर भी सूचनाओं (यादों) को कैसे संगृहीत और पुनः प्राप्त कर सकता है।एंडरसन थॉमस पदार्थ विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता विज्ञान प्रगति 2022 45 200-210 उनका यह सिद्धांत इस बात की अत्यंत सटीक गणितीय व्याख्या करता है कि यदि कंप्यूटर को कोई अधूरी या धुंधली तस्वीर दी जाए, तो वह अपने नेटवर्क की ऊर्जा को कम करके उस तस्वीर का सबसे सही और स्पष्ट रूप कैसे खोज सकता है।
अनुसंधान
विद्यावाचस्पति की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने बेल प्रयोगशालाओं (बेल लैब्स) में एक अत्यंत समर्पित शोधकर्ता के रूप में कार्य किया। उसके पश्चात उन्होंने प्रिंसटन विश्वविद्यालय और कैलिफोर्निया प्रौद्योगिकी संस्थान (कैलटेक) में रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान के विभागों में भी महत्वपूर्ण शोध किए।हैरिस स्टीवन कृत्रिम बुद्धिमत्ता का रहस्य और भौतिकी 2019 वैश्विक विज्ञान प्रकाशन उनके अनुसंधानों ने यह सिद्ध कर दिया कि भौतिक विज्ञान के अत्यंत जटिल समीकरणों का उपयोग करके जैविक प्रणालियों (जैसे मस्तिष्क) की कार्यप्रणाली की नकल की जा सकती है।
उनकी इस अभूतपूर्व खोज ने पहली बार दुनिया भर के वैज्ञानिकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का निर्माण करने का अत्यंत मजबूत गणितीय आधार प्रदान किया। उनके द्वारा विकसित किए गए पैटर्न पहचान (चित्रों और ध्वनियों को पहचानने) के सिद्धांतों के बिना आज के अत्यंत उन्नत स्मार्टफोन, चेहरे पहचानने वाले कैमरे और भाषा अनुवादक सॉफ़्टवेयर की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।टेलर रिचर्ड भविष्य की तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता नेचर भौतिकी पत्रिका 2023 15 78-85
पुरस्कार और मान्यता
भौतिकी और मशीन लर्निंग के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 2024 में भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।https://www.nobelprize.org/prizes/physics/2024/summary/ 2024 भौतिकी नोबेल पुरस्कार का सारांश नोबेल फाउंडेशन 3 जून 2026 इस महान पुरस्कार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा किए गए शोध को एक नई और अत्यधिक प्रतिष्ठित मान्यता प्रदान की। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संगठनों द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2001 में उन्हें सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्र में उनके अत्यंत उत्कृष्ट योगदान के लिए 'डिराक पदक' से अलंकृत किया गया था।क्लार्क जेम्स नोबेल विजेताओं का ऐतिहासिक सफर 2025 ऑक्सफोर्ड विज्ञान प्रकाशन इसके अतिरिक्त उन्हें अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार और बेंजामिन फ्रैंकलिन पदक से भी सम्मानित किया गया।
इन्हें भी देखें
कृत्रिम बुद्धिमत्ता
मशीन लर्निंग
कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क
प्रिंसटन विश्वविद्यालय
सन्दर्भ
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