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करापात
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अर्थशास्त्र में, किसी कर का आर्थिक कल्याण के वितरण पर जो प्रभाव पड़ता है, उसे करापात (tax incidence) या कर भार (tax burden) कहते हैं।
कर के प्रथम आघात को कराघात (Impact of tax) कहते हैं। सरकार कर जमा कराने का दायित्व जिस व्यक्ति पर डालती है, उस पर कराघात होता है। किन्तु कर भार के अन्तिम आघात बिंदु पर करापात (incidence of Tax) होता है। अतः करापात उस व्यक्ति पर पड़ता है, जो कर के भार को किसी अन्य व्यक्ति पर डालने में असमर्थ होता है। अर्थात कर का प्रथम आघात कराघात कहलाता है, किन्तु यह भी सम्भव है कि वह व्यक्ति वस्तु की कीमत बढ़ा कर कर भार को दूसरे व्यक्ति पर और दूसरा व्यक्ति, तीसरे व्यक्ति पर डाल दें। करापात उस व्यक्ति पर माना जाएगा जो कर को आगे नहीं डाल सकता।
कर विवर्तन (Shifting of taxation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति स्वयं पर लगाए गए कर भार को अन्य व्यक्तियों पर डाल देता है। कर का विवर्तन करना कानूनन अपराध नहीं है।
कई लोग आय कम दर्शाकर, कर चुकाने से बच जाते हैं। इसे कर का अपवंचन कहते हैं। कर अपवंचन गैर कानूनी है।
मान लीजिए सरकार चीनी पर कर लगाती है और चीनी के उत्पादकों से कर राशि प्राप्त करती है। इस प्रकार का मौद्रिक भार प्रत्यक्षतः चीनी के उत्पादकों पर पड़ता है। अब यदि उत्पादक कर का मौद्रिक भार किसी अन्य व्यक्ति पर (माना थोक विक्रेता पर) चीनी की कीमतों में वृद्धि करके डालता है और विवर्तन की यह प्रक्रिया थोक विक्रेता से अन्तिम उपभोक्ता तक जारी रहती है जो करापात उस उपभोक्ता पर पडेगा जो अन्तिम दशा में मौद्रिक भार उठायेगा। इसे परोक्ष मौद्रिक भार कहा जाता है। इस सम्बन्ध में डाल्टन ने अपने विचारों को इस प्रकार से परिभाषित किया हैः
‘‘करापात की समस्या से साधारणतः यह अभिप्राय लिया जाता है कि कर का भुगतान कौन करता है। अधिक निश्चित रूप से हम यह कह सकते है कि कर का मौद्रिक बोझ उस पर पड़ता है जो प्रत्यक्ष रूप से कर का बोझ उठाते है।’’
फिन्डले शिराज के अनुसार,"कर भार की समस्या का विश्लेषण यह निर्धारित करता है कि कर का भुगतान कौन करता है अर्थात् कर का मौद्रिक भार किस पर पड़ता है।"
करापात के प्रकार
प्रो. मसग्रेव के अनुसार करापात तीन प्रकार का हैः
1. विशेष करापात : जब कोई कर सरकारी खाते के व्यय पक्ष में बिना किसी परिवर्तन से लगाया जाता है।
2. विभेदी करापात : जब कोई कर किसी अन्य कर के विकल्प के रूप में लगाया जाता है।
3. संतुलित बजट करापात : जब कर की आय से सरकार अपने व्यय में वृद्धि करती है।
श्रेणी:कराधान