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तिब्बत में मानवाधिकार हनन
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right|thumb|300px|बौद्ध भिक्षुओं को पकड़कर ले जाती हुई चीनी पुलिस
अमनेस्टी इन्टरनेशनल के १९९२ की रिपोर्ट के अनुसार तिब्बत में न्याय के मानक अन्तरराष्ट्रीय स्तर से बहुत नीचे थे। 1950 के बाद तिब्बत में मानवाधिकारों के हनन के आकार को सही-सही निर्धारित करना मुश्किल है, क्योंकि मीडिया पर चीनी सरकार का कड़ा नियंत्रण है और मानवाधिकारों के बारे में जानकारी को बाहर नहीं आने दिया जाता है। निर्वासित समूहों की रिपोर्ट है कि चीन में तिब्बतियों को गायब कर दिया जाता है और उन्हें यातना दी जाती है, जिसमें बिजली के झटके, ठंड में रखना और बुरी तरह से पीटना शामिल है। दमनकारी कार्रवाई में सैकड़ों लोग मारे गए हैं और हज़ारों लोगों को मनमाने ढंग से हिरासत में लिया गया है। बोलने, प्रेस और राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को दबाया जाता है या कड़ा नियंत्रण किया जाता है। चीनी अधिकारियों द्वारा अपनाए जाने वाले अन्य तरीकों में भारी शारीरिक श्रम, "राजनीतिक जांच" सत्र और श्रम के माध्यम से पुनः शिक्षा शामिल है।
इन्हें भी देखें
तिब्बत का इतिहास
१९५९ का तिब्बती विद्रोह
बाहरी कड़ियाँ
तिब्बत में मानवाधिकार के बिगड़ते हालात : रपटअप्रैल 2026 InternetArchiveBot
श्रेणी:तिब्बत