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सार्वभौम भट्टाचार्य
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पंडित सार्वभौम भट्टाचार्य ने गौरांक की शत-श्लोकी स्तुति रची जिसे आज चैतन्य शतक नाम से जाना जाता है। http://in.jagran.yahoo.com/dharm/?page=article&articleid=3400&category=12 भगवन्नाम के अमर प्रचारक चैतन्य महाप्रभु डॉ॰अतुल टण्डन एचटीएम याहू जागरण हिन्दी https://web.archive.org/web/20100812074141/http://in.jagran.yahoo.com/dharm/?page=article&articleid=3400&category=12 12 अगस्त 2010 23 जून 2009 dead
सन्यास लेने के बाद जब गौरांग पहली बार जगन्नाथ मंदिर पहुंचे, तब भगवान की मूर्ति देखाकर ये इतने भाव-विभोर हो गए, कि उन्मत्त होकर नृत्य करने लगे, व मूर्छित हो गए। तब वहां उपस्थित प्रकाण्ड पण्डित सार्वभौम भट्टाचार्य महाप्रभु की प्रेम-भक्ति से प्रभावित होकर उन्हें अपने घर ले गए। घर पर शास्त्र-चर्चा आरंभ हुई, जिसमें सार्वभौम अपने पाण्डित्य का प्रदर्शन करने लगे, तब श्रीगौरांग ने भक्ति का महत्त्व ज्ञान से कहीं ऊपर सिद्ध किया व उन्हें अपने षड्भुजरूप का दर्शन कराया। सार्वभौम तभी से गौरांग महाप्रभु के शिष्य हो गए और वह अन्त समय तक उनके साथ रहे।
सन्दर्भ
श्रेणी:चैतन्य महाप्रभु