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411 समाचार
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विद्यार्थी संघ

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छात्रसंघ या विद्यार्थी संघ (Students' union) उस संगठन को कहते हैं जो कई कॉलेजों, विश्वविद्यालयों या उच्च पाठशालाओं में विद्यार्थियों द्वारा संचालित की जाती है। इसकी स्थापना 1985 में पहली बार किय था महावीर मनाना भारत के प्रमुख छातरसंघ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया भारत में छात्र आन्दोलनों का संक्षिप्त इतिहास भारत की स्वतंत्रता पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में जितने भी परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन हुए, उनमें छात्रों की भूमिका बहुत अहम रही है। छात्र शक्ति, समाज को सुधारने और उसे मजबूत करने वाली घटकों में से एक है। इसलिए कहा जाता है की युवा देश के रीढ़ हैं, जिसके कंधे पर देश का भविष्य टिका होता है। स्वतंत्रता के पूर्व और स्वतंत्रता के बाद भारत में जितने भी परिवर्तनकारी सामाजिक आंदोलन हुए, उनमें छात्रों की भूमिका बहुत अहम रही है। स्वतंत्रता के पूर्व 1848 में दादाभाई नौरोजी ने स्टूडेंट्स साइंटिफिक एंड हिस्टोरिक सोसाइटी की स्थापना छात्र मंच के रूप में की थी। इस मंच को भारत में छात्र आंदोलन का सूत्रधार माना जाता है। 1913 में भारतीय इतिहास में पहली बार छात्रों ने किंग एडवर्ड मेडिकल कॉलेज, लाहौर में अंग्रेजी छात्रों और भारतीयों के बीच अकादमिक भेदभाव के विरोध में हड़ताल किया था। छात्र आंदोलन का दायरा 1906 और 1918 के बीच और भी बढ़ गया, जब 184 लोगों में 68 छात्र क्रांतिकारी गतिविधियों में संलग्न पाए गए थे। स्वदेशी आन्दोलन (1905) ने भारतीय छात्रों को एकरूपता प्रदान की थी और छात्र शक्ति को एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण दिया था। भारतीय छात्रो में एकरूपता दिखाने के लिए कॉलेजों के साथ ही ब्रिटिश सामान, छात्र क्लब का सामूहिक बहिष्कार कर दिया था। 1912 में अहमदाबाद के अखिल भारतीय कॉलेज छात्र सम्मेलन ने भारत की स्वतंत्रता के लिए काम करने की छात्र प्रतिबद्धता का शपथ लिया और 'पहले चरखा स्वराज और फिर शिक्षा' का नारा दिया। 1919 में असहयोग आंदोलन के दौरान स्कूलों और कॉलेजों का बहिष्कार कर भारतीय छात्रों ने इस आन्दोलन में तीव्रता प्रदान की थी। हिंदू छात्र संघ (एचएसएफ) 1936 में आरएसएस के विचारधारा के साथ शुरू हुआ था। छात्र की यह शाखा सीधे अपनी स्थापना से हिन्दू युवाओं की भावनाओं की वकालत करता था। 1936 में, पहला अखिल भारतीय छात्र सम्मेलन लखनऊ में आयोजित किया गया था जिसमें पंजाब, यूपी, सीपी, बंगाल, असम, बिहार और उड़ीसा के 210 स्थानीय और 11 प्रांतीय संगठनों के 986 छात्र प्रतिनिधि शामिल थे। मुस्लिम लीग ने 1937 में मुस्लिम छात्रों की शिकायतों को हल करने के लिए अखिल भारतीय मुस्लिम छात्र संघ की स्थापना की थी और इसी छात्र संगठन द्वारा मुसलमानों के लिए अलग राज्य की मांग को नई दिशा प्रदान करना चाहता था। असहयोग आंदोलन के बाद, भारत छोड़ो आंदोलन को भारतीय छात्रों का समर्थन मिला। आंदोलन के दौरान, छात्रों ने ज्यादातर कॉलेजों को बंद करने और नेतृत्व की अधिकांश जिम्मेदारियों को शामिल करने का प्रबंधन किया और भूमिगत नेताओं और आंदोलन के बीच लिंक प्रदान किया। शेड्यूल्ड कास्ट फेडरेशन एक ऐसा राजनीतिक दल था जो अनुसूचित जाति के लोगों का प्रतिनिधित्व करता था। इसकी स्थापना बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने 1942 में दलित समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने के लिए की थी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की स्थापना 1949 में राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के कार्य की दिशा में छात्र शक्ति को जुटाने के लिए की गयी थी। 1950 से पहले, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की छात्र सक्रियता एआईसीसी की युवा शाखा द्वारा की जाती थी। स्वतंत्रता के बाद स्वतंत्रता के बाद, छात्र आंदोलनों के परिप्रेक्ष्य में बदलाव आया है क्योंकि यह तर्कसंगत या व्यापक विचारधारात्मक प्रश्नों के बजाय विश्वविद्यालय के मुद्दों या स्थानीय राजनीतिक संघर्षों पर स्थानीय स्तर पर राजनेताओ के राजनीति का एक हथियार बन कर रह गया। लेकिन कुछ मामलो में छात्रों की उपस्तिथि ने क्रांति ला दी थी जैसे कि चिपको आन्दोलन, आपातकाल के दौरान हुए आन्दोलन, मंडल विरोधी आन्दोलन इत्यादि। अखिल भारतीय युवा संघ (All India Youth Federation) की स्थापना 1959 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया ने युवा पीढ़ी के प्रगतिशील और लोकतांत्रिक खंड के लिए एकजुट मंच के रूप में की थी। नक्सलवादी आंदोलन 1967 में चरु मजूमदार, कानू सान्याल, और जंगल संथाल द्वारा सामंती शोषण के विरोध में शुरू किया गया था। इसके बाद छात्रो की एकरूपता ने इसे और भी क्रांतिकारी बना दिया था जिसका आज भी बिगड़ा रूप देखने को मिलता है। चंडी प्रसाद भट्ट के नेतृत्व में दशौली ग्राम स्वराज संघ ने 1960 में वन आधारित छोटे पैमाने पर उद्योग स्थापित करके अपने गृहनगर के पास स्थानीय लोगों को रोजगार के लिए गोपेश्वर में एक अभियान शुरू हुआ था। 1961 में गणराज्य युवक संगति ने आजादी के बाद पहला जातिवाद के खिलाफ और अनुसूचित जातियों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए दलित आंदोलन शुरू किया था। भारतीय छात्र संघ (Student Federation of India): 1970 में सीपीआई (एम) ने छात्रों को एक लोकतांत्रिक और प्रगतिशील शिक्षा प्रणाली से लड़ने के लिए, छात्र समुदाय के उन्नति और सुधार के लिए स्थापना की। नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI): इसकी स्थापना इंदिरा गांधी ने 9 अप्रैल 1971 को एक राष्ट्रीय छात्र संगठन बनाने के लिए केरल स्टूडेंट्स यूनियन और पश्चिम बंगाल राज्य छत्र परिषद के विलय के बाद की थी। विदर्भ रिपब्लिकन छात्र संघ की स्थापना, भगवान बुद्ध द्वारा शुरू किए गए मार्ग का अनुसरण करने और अम्बेडकर द्वारा अपनाये नैतिकता को अपनाने तथा उसका प्रचार करने हेतु किया गया था। 1974 में छात्र आन्दोलन आपातकाल के विरोध में शुरू हुआ। इसी दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और समाजवादी छात्रो ने पहली बार एक जूट हो कर छात्र संघर्ष समिति का गठन कर आपातकाल का विरोध किया, जिसके लालू प्रसाद यादव अध्यक्ष चुने गए थे और सुशील कुमार मोदी महासचिव चुने गए थे। आपातकाल के विरोध प्रदर्शन के दौरान बहुत से छात्रो को बेरहमी से पीटा गया और उनको जेल में बंद कर दिया गया था। नेतृत्वविहीन आपातकाल आन्दोलन को नई उर्जा के लिया जय प्रकाश नारायण को छात्रो द्वारा आमंत्रित किया गया और उसके बाद उन्होंने 'सम्पूर्ण क्रांति' का नारा दिया। जब वीपी सिंह सरकार ने 1990 में मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की घोषणा की थी तब मंडल विरोधी आन्दोलन सवर्ण वर्ग के छात्रों द्वारा शुरू किया गया था। यह छात्र आन्दोलन बहुत ही संगठित तरह से आयोजित किया गया था। आन्दोलन का मुख्य मांग जाति पर आरक्षण को हटाने और आर्थिक विचारों के आधार पर आरक्षण का समर्थन करना था। विविध महिला छात्र आंदोलन: यह आजादी के बाद पहला मौका था जब 1990 में संस्कृत कॉलेज, पट्टंबी की महिलाओं का एक समूह कैंपस में महिलाओं की समस्या को दूर करने के लिए आगे आयी थी। साइबर कार्यकर्ता छात्र आंदोलन: यह सॉफ्टवेयर उद्योग में माइक्रो सॉफ्ट कॉर्पोरेशन के एकाधिकार के खिलाफ NIIT कालीकट के इंजीनियरिंग छात्रों द्वारा शुरू किया गया था। इसे ‘निःशुल्क सॉफ्टवेयर आंदोलन’ भी कहा जाता है। यह वैश्वीकरण के खिलाफ पेशेवर कॉलेज के छात्रों के रचनात्मक प्रतिरोध था। अखिल भारतीय छात्र संघ (All India Students Association) की स्थापना सीपीआई (एमएल) ने 1990 में किया गया था। सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारतीय छात्र संगठनों की सूची