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भारत-तिब्बत सम्बन्ध
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अंगूठाकार| क्ये गोम्पा : भारत के हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी में स्थित एक तिब्बती बौद्ध मठ है।
अंगूठाकार| तेनजिन त्सुन्दुए 2005 में बंगलौर में चीनी प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ के होटल के कमरे के सामने विरोध प्रदर्शन करते हुए।
कहा जाता है कि भारत-तिब्बत संबंधों की शुरुआत छठी शताब्दी ई० में तब हुई जब बौद्ध धर्म भारत से प्रसरित होकर तिब्बत पहुँचा। शायद यह कहना सही होगा कि भारत और तिब्बत में समानता दुनिया के किसी भी पड़ोसी की तुलना में कहीं अधिक है। बौद्ध-धर्म और तिब्बती लिपि - तिब्बत को दिया गया भारत का सबसे बड़ा उपहार है। इन दोनों के अपने उद्भव और विकास में भारत के प्रख्यात गुरुओं और विद्बानों का प्रभूत योगदान रहा है। भारत को तिब्बत का सबसे बड़ा उपहार नालन्दा परम्परा के बौद्ध धर्म का संरक्षण करना और उनका सतत विकास करना है। दलाई लामा के अनुसार, नालंदा के बौद्ध-गुरुओं के सिद्धांतों पर आधारित बौद्धधर्म की सबसे अच्छी व्याख्या तिब्बती भाषा में ही उपलब्ध है। इस तरह, यह दोनों देशों के बीच अतीत के अनुबंध-मेलभाव और दीर्घकालीन जुड़ाव को दर्शाता है।
क्लाउड एर्पी एक ख्यात इतिहासकार और पत्रकार हैं, जिन्होंने धारवाहिक रूप से तिब्बत, भारत और चीन पर किताबें लिखी हैं। उन्होंने निम्नलिखित शब्दों में तिब्बत, भारत और चीन के संबंध को अभिव्यक्त किया है-
यह दिलचस्प है कि तीनों देशों का इतिहास, जिनमें तिब्बत और चीन का संबंध हमेशा से ताकत और सत्ता पर आधारित था, जबकि तिब्बत और भारत में साझा आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित ज्यादा सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध रहा है।तिब्बती बौद्धधर्म : भारत की सॉफ्ट पॉवर कूटनीति के स्रोत और शक्ति (Dr Tenzin Tsultrim)
सन 1959 में तिब्बती विद्रोह के असफल होने के बाद दलाई लामा बचकर भारत आ गये।फ़ज़ल रेहान चीन से बचने के लिए 13 दिन की यात्रा के बाद ऐसे भारत आए थे दलाई लामा BBC News हिंदी 31 March 2022 https://www.bbc.com/hindi/international-60929776 hi 17 August 2024 तब से ही निर्वासित तिब्बतियों को भारत में शरण दी गई है और भारत सरकार ने उन्हें देश के 10 राज्यों में 45 आवासीय बस्तियों में ठहराया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2011 में लगभग डेढ़ लाख तिब्बती शरणार्थी थे जिनकी संख्या घटकर 2018 में 85 हजार रह गयी। बहुत से तिब्बती अब भारत छोड़कर तिब्बत तथा अन्य देशों जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका या जर्मनी जा रहे हैं। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के तुरन्त बाद भारत सरकार ने तिब्बत को एक स्वतंत्र देश माना था। Mehrotra 2000 7 किन्तु हाल ही में इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तिब्बत को चीन का हिस्सा माना गया है। India Recognizes Tibet As Part Of China, Arab News, 25 June 2003.
अंगूठाकार| सिक्किम के लाचुंग मठ में गुम्पा नृत्य
इतिहास
बुटन रिनचेन ड्रब (बुस्टोन) जैसे विद्वानों ने सुझाव दिया है कि तिब्बती लोग रूपति के वंशज हैं जो महाभारत युद्ध के कौरव सेना का सेनापति था। Mehrotra 2000 1 अन्य विद्वान भारत से तिब्बत में बौद्ध धर्म के प्रसार को पहला महत्वपूर्ण संपर्क मानते हैं जो कि सोंगत्सेन गम्पो और त्रिसोंग-देत्सेन जैसे तिब्बती राजाओं के प्रयासों के कारण सम्भव हुआ। Mehrotra 2000 2 १३वें दलाई लामा, थुबतेन ग्यात्सो ने 1910 में भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया था। Mehrotra 2000 14 आजकल तिब्बती तीर्थयात्री गया, सारनाथ और सांची जैसे स्थानों पर जाते हैं जो बुद्ध के जीवन से जुड़े हैं। Mehrotra 2000 8
तिब्बत और चीन ने (वांग शुआन-त्सो) ७वीं शताब्दी में एक शत्रु राजा को दण्डित करने के लिए भारत के उत्तरी भाग पर आक्रमण किया। बाद में तिब्बती सम्राट ने एक शास्त्रार्थ आयोजित किया था जिसमें भारतीय बौद्धों की चीनी बौद्धों के विरुद्ध विजय हुई जिसके परिणामस्वरूप तिब्बत ने भारतीय बौद्ध धर्म को अपना लिया। 'विखंडन के युग' में भारतीय नियमित रूप से तिब्बत का दौरा करते थे और धार्मिक तीर्थयात्रा की आड़ में तिब्बत में प्रचुर मात्रा में सोने की खोज करते थे। http://worldcat.org/oclc/956654568 Tibet : a History. Sam. Van Schaik 2014 Yale University Press 978-0-300-17217-1 956654568 १३वीं शताब्दी भारत की दिल्ली सल्तनत ने तिब्बत पर विनाशकारी आक्रमण किया। बाद में, मुगलों ने लद्दाख पर अपना प्रभाव कम करके उसे तिब्बत को सौंप दिया ।
ब्रिटिश काल (1767-1947) में
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
तिब्बत
तिब्बत का इतिहास
तिब्बती बौद्ध धर्म
दलाई लामा
बाहरी कड़ियाँ
भारत-तिब्बत सम्बन्ध
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