Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

सेममुखेम नागराज

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

सेममुखेम नागराज उत्तराखण्ड के टिहरी गढ़वाल जिला में स्थित एक प्रसिद्ध नागतीर्थ है। श्रद्धालुओं में यह सेम नागराजा के नाम से प्रसिद्ध है। पाठ=सेम नागराज मंदिर |अंगूठाकार|सेम नागराज मंदिर - टिहरी गढ़वाल - उत्तराखण्ड मन्दिर का सुन्दर द्वार १४ फुट चौड़ा तथा २७ फुट ऊँचा है। इसमें नागराज फन फैलाये हैं और भगवान कृष्ण नागराज के फन के ऊपर वंशी की धुन में लीन हैं। मन्दिर में प्रवेश के बाद नागराजा के दर्शन होते हैं। मन्दिर के गर्भगृह में नागराजा की स्वयं भू-शिला है। ये शिला द्वापर युग की बतायी जाती है। मन्दिर के दाँयी तरफ गङ्गु रमोला के परिवार की मूर्तियाँ स्थापित की गयी हैं। सेम नागराजा की पूजा करने से पहले गङ्गु रमोला की पूजा की जाती है। पाठ=सेम मुखेम मंदिर प्रांगण स्थित गंगू रमोला की मूर्ति|अंगूठाकार|मंदिर प्रांगण स्थित गंगू रमोला की मूर्ति यह माना जाता है कि इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण कालिया नाग का उद्धार करने आये थे। इस स्थान पर उस समय गङ्गु रमोला का अधिपत्य था श्री कृष्ण ने उनसे यहाँ पर कुछ भू भाग माँगना चाहा परन्तु गङ्गु रमोला ने यह कह के मना कर दिया कि वह किसी चलते फिरते यात्री को धरती नहीं देते। फिर श्री कृष्ण ने अपनी माया दिखाई तत्पश्चात गङ्गु रमोला ने इस शर्त पे कुछ भू भाग श्री कृष्ण को दे दिया कि वो एक हिमा नाम के राक्षस का वध करेंगे जिस से कि वो काफी परेशान थे। कैसे पहुँचें उत्तराखण्ड के श्रीनगर से पहले एक गडोलिया नामक छोटा कस्बा आता है। यहाँ से एक रास्ता नई टिहरी के लिये जाता है दूसरा लम्बगाँव। लम्बगाँव के रास्ते में टिहरी झील को देखा जा सकता है। लम्बगाँव सेम जाने वाले यात्रियों का मुख्य पड़ाव है। पहले जब सेममुखेम तक सड़क नहीं थी तो यात्री एक रात यहाँ विश्राम करने के बाद दूसरे दिन अपनी यात्रा शुरु करते थे। यहाँ से १५ किलोमीटर की खड़ी चढ़ायी चढ़ने के बाद सेम नागराजा के दर्शन किये जाते थे। अब भी मन्दिर से मात्र ढायी किलोमीटर नीचे तलबला सेम तक ही सड़क है। लम्बगाँव से ३३ किलोमीटर का सफर बस या टैक्सी द्वारा तय करके तलबला सेम तक पहुँचा जा सकता है। लम्बगाँव से १० किलोमीटर आगे कोडार नामक एक छोटा सा कस्बा आता है। यहाँ से घुमावदार तथा संकरी सड़क से होते हुये कोई १८ किलोमीटर मुखेम गाँव आता है जो कि सेम मन्दिर के पुजारियों का गाँव है। ये गंगू रमोला का गाँव है जो कि रमोली पट्टी का गढ़पति था तथा जिसने सेम मन्दिर का निर्माण करवाया था। मुखेम से ५ किलोमीटर आगे तलबला सेम आता है जहाँ एक लम्बा-चौड़ा हरा-भरा घास का मैदान है। किनारे पर नागराज का एक छोटा सा मन्दिर है। परम्परा के अनुसार पहले यहाँ पर दर्शन करने होते हैं। यहाँ आस-पास स्थानीय निवासियों की दुकानें हैं जहाँ खाने-पीने की व्यवस्था है। यहाँ से सेम मन्दिर तक तकरीबन ढायी किलोमीटर की पैदल चढ़ायी है। घने जंगल के बीच मन्दिर तक रास्ता बना है। प्राकृतिक सुन्दरता सेममुखेम का मार्ग हरियाली और प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है। मुखेम के आगे रास्ते में प्राकृतिक भव्यता और पहाड़ की चोटियाँ मन को रोमाँचित करती हैं। रमोली पट्टी अत्यन्त सुन्दर है। रास्ते में श्रीफल के आकार की खूबसूरत चट्टान है। सेममुखेम में घने जंगल के बीच मन्दिर के रास्ते में बांज, बुरांस, खर्सू, केदारपत्ती के वृक्ष हैं जिनसे खुशबू निकलती रहती है। इन्हें भी देखें नागराज डाण्डा नागराज श्रेणी:उत्तरकाशी जिला