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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ऋत

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वेद में ऋत के विचार का बड़ा महत्व है। ऋत का अर्थ होता है जगत की व्यवस्था । इसे प्राकृत नियम भी कहा गया है। सूर्य, चन्द्रमा, तारे, दिन ,रात आदि इसी नियम द्वारा संचालित हैं।Sinha H.P. Bharatiya Darshan Ki Rooprekha Motilal Banarsidass Publishers Pvt. Limited 2006 978-81-208-2144-6 https://books.google.co.in/books?id=wCAqc1G8sKcC&pg=PA37 id 26 November 2023 37 ऋत वैदिक धर्म में सही सनातन प्राकृतिक व्यवस्था और संतुलन के सिद्धांत को कहते हैं, यानि वह तत्त्व जो पूरे संसार और ब्रह्माण्ड को धार्मिक स्थिति में रखे या लाए। वैदिक संस्कृत में इसका अर्थ ठीक से जुड़ा हुआ, सत्य, सही या सुव्यवस्थित होता है। यह हिन्दू धर्म का एक मूल-सिद्धांत है। कहा गया है कि ऋत ऋग्वेद के सबसे अहम धार्मिक सिद्धांतों में से एक है और हिन्दू धर्म की शुरुआत इसी सिद्धांत की शुरुआत के साथ जुड़ी हुई है। इसका ज़िक्र आधुनिक हिन्दू समाज में पहले की तुलना में कम होता है लेकिन इसका धर्म और कर्म के सिद्धांतों से गहरा सम्बन्ध है।The artful universe: an introduction to the Vedic religious imagination https://web.archive.org/web/20170205104458/https://books.google.com/books?id=B1KR_kE5ZYoC 5 फ़रवरी 2017, William K. Mahony, SUNY Press, 1998, ISBN 978-0-7914-3579-3, ... Rta not only characterized reality and truth, Rta was the principle on which reality and truth were based ... परिचय वैदिक साहित्य में ऋत शब्द का प्रयोग सृष्टि के सर्वमान्य नियम के लिए हुआ है। संसार के सभी पदार्थ परिवर्तनशील हैं किंतु परिवर्तन का नियम अपरिवर्तनीय नियम के कारण सूर्य-चंद्र गतिशील हैं। संसार में जो कुछ भी है वह सब ऋत के नियम से बँधा हुआ है। ऋत को सबका मूल कारण माना गया है। अतएव ऋग्वेद में मरुत् को ऋत से उद्भूत माना है। (४.२१.३)। विष्णु को ऋत का गर्भ माना गया है। द्यौ और पृथ्वी ऋत पर स्थित हैं (१०.१२१.१)। संभव हैं, ऋत शब्द का प्रयोग पहले भौतिक नियमों के लिए किया गया हो लेकिन बाद में ऋत के अर्थ में आचरण संबंधी नियमों का भी समावेश हो गया। उषा और सूर्य को ऋत का पालन करनेवाला कहा गया है। इस ऋत के नियम का उल्लंघन करना असंभव है। वरुण, जो पहले भौतिक नियमों के रक्षक कहे जाते थे, बाद में ऋत के रक्षक (ऋतस्य) के रूप में ऋग्वेद में प्रशंसित हैं। देवताओं से प्रार्थना की जाती थी कि वे हम लोगों को ऋत के मार्ग पर ले चलें तथा अनृत के मार्ग से दूर रखें (१०.१३३.६)। ऋत को वेद में सत्य से पृथक् माना गया है। ऋत वस्तुत: सत्य का नियम है। अत: ऋत के माध्यम से सत्य की प्राप्ति स्वीकृत की गई है। यह ऋत तत्त्व वेदों की दार्शनिक भावना का मूल रूप है। परवर्ती साहित्य में ऋत का स्थान संभवत: धर्म ने ले लिया। पारसी धर्म में पारसी धर्म में भी इसी से मिलता-जुलता अर्ता का सिद्धांत मिलता है।Themis: A Study of the Social Origins of Greek Religion, Jane Ellen Harrison, Cambridge University Press, 2010, ISBN 978-1-108-00949-2, ... The Vedic rta is the same word as the Avestan asha (areta) and the Cuneiform Persian arta ... इन्हें भी देखें धर्म वैदिक धर्म वैदिक संस्कृत हिन्दू धर्म सन्दर्भ 2 श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी:संस्कृत शब्द