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ग्रांडी श्रेणी का संकलन
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ग्रांडी श्रेणी
सामान्य महत्त्व
स्थायित्व और रैखिकता
सामान्य संकलन विधि से 1 − 1 + 1 − 1 + · · · का मान 1⁄2 प्राप्त होता है जिसमें निम्न विधियाँ शामिल हैं:
दो श्रेणियों का पदशः योग अथवा घटाने पर,
पदशः किसी अदिश से गुणा करते हुये,
योग में परिवर्तन किये बिना "स्थानान्तरण" और
श्रेणी में नये पद को जोड़कर योग में वृद्धि करना।
ये सभी अभिसारी श्रेणियों के संकलन के लिए वैध विधियाँ हैं लेकिन 1 − 1 + 1 − 1 + · · · अभिसारी श्रेणी नहीं है।
बहरहाल, विभिन्न संकलन विधियाँ इनके समान ही ग्रांडी श्रेणी को एक मान निर्दिष्ट करती हैं। इनमें से दो सरलतम विधियाँ सिसैरा-संकलन और एबल संकलन प्रमुख हैं।Davis पृष्ठ152, 153, 157
सिसैरा संकलन
अपसारी श्रेणियों का संकलन प्राप्त करने की प्रथम विधि १८९० में अर्नेस्टो सिसैरा ने दी थी। इसका मूल विचार लेबनिज़ प्रसम्भाव्य निकटता के समरूप ही है जिसके अनुसार सिसैरा संकलन श्रेणी के सभी आंशिक संकलनों के माध्य के बराबर होता है। पहले प्रथम n आंशिक संकलनों का प्रत्येक n के लिए औसत मान σn है और इसके बाद इसपर इसका n के अनन्त की ओर अग्रसर होने पर सीमान्त मान प्राप्त किया जाता है।
ग्रांडी श्रेणी के लिए, समानान्तर माध्य का अनुक्रम निम्नलिखित है
1, 1⁄2, 2⁄3, 2⁄4, 3⁄5, 3⁄6, 4⁄7, 4⁄8, …
अथवा, अधिक सांकेतिक रूप में
(1⁄2+1⁄2), 1⁄2, (1⁄2+1⁄6), 1⁄2, (1⁄2+1⁄10), 1⁄2, (1⁄2+1⁄14), 1⁄2, …
जहाँ
सम n के लिए और विषम n के लिए है।
समानान्तर माध्य का अनुक्रम 1⁄2 पर अभिसरित होता है अतः Σak का सिसैरा संकलन 1⁄2 है। इसी तरह अनुक्रम 1, -1, 1, -1, … का सिसैरा सीमान्त मान 1⁄2 प्राप्त होता है।Davis पृ॰153, 163
श्रेणी 1 + 0 − 1 + 1 + 0 − 1 + · · · का सिसैरा संकलन 2⁄3 है। अतः श्रेणी का सिसैरा संकलन अनन्त संख्या में शून्य जोड़ते हुये अनन्त संख्या में विभिन्न कोष्टक जोड़े जा सकते हैं।Davis पृ॰162-163, ex.1-5
श्रेणी का संकलन और अधिक व्यापक भिन्न (C, a) विधि से भी किया जा सकता है।Smail पृ॰131
एबल संकलन
एबल संकलन अपसारी श्रेणी की आयलर की परिभाषा के समरूप है लेकिन यह फलन का ठीक तरह से निर्मित करके कैलेट और एन॰ बर्नोली के आपत्तियों को वर्जित करती है। वास्तव में, आयलर द्वारा घात श्रेणी की सीमा सम्बंधि अपनी परिभाषा में वही विधि दी है जो वर्तमान में एबल विधि के रूप में जानी जाती है।Kline 1983 पृ॰313Bromwich पृ॰322
दी गयी श्रेणी a0 + a1 + a2 + · · ·, को नई श्रेणी a0 + a1x + a2x2 + · · · के रूप में रूपांतरित किया जा सकता है। यदि बाद वाली श्रेणी 0 < x < 1 के लिए किसी फलन पर, x, 1 पर अग्रसर है, अभिसारी है तो इसे मूल श्रेणी का एबेल संकलन कहा जाता है। इसके बाद एबल प्रमेय के अनुसार यह प्रक्रिया साधारण योग के तर्कसंगत है। ग्रांडी श्रेणी के लिए निम्न प्रकार लिखा जा सकता है
Davis पृ॰159
सम्बंधित श्रेणी
श्रेणी 1 + 0 − 1 + 1 + 0 − 1 + · · · के संगत एबल योग 2⁄3 है जो फलन
(1 + x)/(1 + x + x2) से प्राप्त होता है।
जब भी कोई श्रेणी सिसैरा संकलनीय होती है तब वह एबल संकलनीय भी होती है और उसका योग समान प्राप्त होता है। अन्य रूप में ग्रांडी श्रेणी का कौशी गुणनफल अपने आप में एक श्रेणी निर्मित करता है लेकिन सिसैरा संकलनीय नहीं है:
1 − 2 + 3 − 4 + · · ·
का एबल संकलन 1⁄4 प्राप्त होता है।Davis पृ॰165
टिप्पणी
2
सन्दर्भ
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श्रेणी:अपसारी श्रेणी