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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

धार लौह स्तम्भ

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thumb|right|धार लौह स्तम्भ के टुकड़े धार लौह स्तम्भ भारत के मध्य प्रदेश राज्य के धार नगर में स्थित एक लोहे का स्तम्भ था जो अब ध्वंसावस्था में है। इसके तीन भाग प्राप्त हैं और उसके ऊपर के भाग प्राप्त नहीं हुए हैं। इसके सारे भागों का भार मिलाकर ७३०० किलोग्राम है, यानि दिल्ली के लौह स्तम्भ से लगभग १,००० किलोग्राम अधिक। इसका निर्माण किसने और कब कराया था, यह ठीक-ठीक ज्ञात नहीं है लेकिन स्थानीय मान्यता के अनुसार यह एक विजय स्तम्भ था जिसे ११वीं शताब्दी ईसवी में परमार राजवंश के राजा भोज ने बनवाया था।Balasubramaniam, R. (2002). "A new study of the Dhar iron pillar https://web.archive.org/web/20150706015247/http://www.dli.gov.in/rawdataupload/upload/insa/INSA_1/2000616e_115.pdf 6 जुलाई 2015 " (PDF). Indian Journal of History of Science 37: 115–151. ज्ञातव्य है कि राजा भोज धातुकर्म के भी विद्वान थे। उन्होंने अपने ग्रन्थ 'युक्तिकल्पतरु' में लोहे से बने शस्त्रों का वर्णन किया है। इतना ही नहीं, उन्होंने लोहे के धातुकर्म से सम्बन्धित पूर्ववर्ती संस्कृत ग्रन्थों, जैसे लौहार्णव, लौहादस्प और लौहप्रदीप का उल्लेख किया है। वर्तमान समय में इसके तीन अंश १५वीं शताब्दी में बनी लाट मस्जिद के पास स्थित हैं। स्थानीय भाषा में 'लाट' का अर्थ "स्तम्भ" होता है और मस्जिद का नाम इसी स्तम्भ पर रखा गया है। तीसरा भाग टूटा हुआ है, इससे पता चलता है कि इसका चौथा अंश भी अवश्य रहा होगा। चौथा भाग अभी तक नहीं मिला है। मूल रूप से यह स्तम्भ नीचे मोटा और ऊपर की ओर क्रमशः पतला था। सबसे निचले भाग का अनुप्रस्थ काट (क्रॉस सेक्शन) चतुर्भुजी था, मध्य अनुप्रस्थ चतुर्भुजी और अष्टभुजी, और सबसे ऊपरी भाग अष्टभुजी। लेकिन उसका सबसे ऊपरी भाग का अनुप्रस्थ छोटा और गोलाकार था। तीनों भागों की कुल लम्बाई १३.२१ मीटर (४३ फ़ुट ४ इंच) है, जो यह संकेत देते हैं कि यह स्तम्भ दिल्ली के लौह स्तम्भ से दुगनी ऊँचाई का था। जब यह खड़ा किया गया, उस समय यह शायद विश्व का सबसे बड़ा कुट्टित वेल्डित लौह स्तम्भ रहा होगा।"Portraits of a Nation: History of Ancient India: History," Kamlesh Kapur, pp. 367, Sterling Publishers Pvt Ltd, ISBN 9788120792333 रासायनिक संघठन धार के लौह स्तम्भ के सूक्ष्म-संरचना (microstructure) का अध्ययन करने पर पता चलता है कि यह स्तम्भ भी अन्य प्राचीन भारतीय लौह स्तम्भों के लक्षणों से युक्त है।Corrosion resistance of the Dhar iron pillar बालसुब्रमणियम और ए०वी० रमेश कुमार (२००३) के अनुसार धार का लौह स्तम्भ वायुमण्डल के प्रभाव से जंग लगने के प्रति अत्यधिक प्रतिरोधी है, अर्थात यह जिस लोहे का बना है उसमें वायुमण्डल की नमी और ऑक्सीजन के कारण जंग लगने की अभिक्रिया बहुत कम होती है।Balasubramaniam Kumar 2003 2464 राय एवं अन्य लोगों ने १९९७ में इस स्तम्भ के दो छोटे टुकड़ों के रासायनिक संघटन का अध्ययन किया। उनके अध्ययन से इस लौह स्तम्भ के लोहे में विभिन्न तत्त्वों की भार के अनुसार मात्रा निम्नलिखित पायी गयी:The ancient 11th century iron pillar at Dhar, India: a microstructural insight into material characteristics https://archive.org/details/sim_journal-of-materials-science-letters_1997-03-01_16_5/page/371 Amitava Ray S. K. Dhua R. R. Prasad S. Jha S. Banerjee Journal of Materials Science Letters 16 5 1997 371–375 10.1023/A:1018550529070 134653889 कार्बन 0.013% मैंगनीज "trace" सिलिकॉन 0.06% फॉस्फोरस 0.072% गन्धक 0.003% ताम्र 0.057% निकल 0.268% लोहा शेष सब इन्हें भी देखें दिल्ली का लौह स्तम्भ बाहरी कड़ियाँ प्राचीन भारत में लौह स्तंभ का निर्माण लौह-स्तम्भ : प्राचीन भारतीय लोहार का हाइ-टेक साइंस ज्ञान श्रेणी:प्राचीन भारतीय इतिहास सन्दर्भ श्रेणी:धार श्रेणी:परमार राजवंश श्रेणी:राजा भोज श्रेणी:भारत में स्तम्भ स्थापत्य