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ठाकुर अक्षयसिंह रतनूं
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ठाकुर अक्षयसिंह रतनूं श्री राजस्थानी भाषा 24 December 1910 जयपुर रियासत yes 1995 07 01 1910 12 24 कवि लेखक डिंगल राजस्थानी भाषा ब्रजभाषा हिन्दी भारत 5 ठा. झुझारसिंह जी रतनू (पिता) अक्षय केसरी-प्रताप चरित्र
अक्षय भारत दर्शन
अक्षय जन स्मृतिठाकुर अक्षय सिंह रतनूं (जन्म 24 दिसंबर 1910; निधन 1 जुलाई 1995) एक राजस्थानी, ब्रजभाषा और हिंदी भाषाओं के कवि थे । उनकी लिखी हुई कविताएं अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीतियों की आलोचना करती हैं। उन्हें आधुनिक परंपरावादी कवियों में से एक माना जाता है। वह हिंदी, राजस्थानी, डिंगल (प्राचीन राजस्थानी), उर्दू, संस्कृत और प्राकृत के विद्वान थे। उन्हें 'साहित्य भूषण', 'साहित्य रत्न' और 'कवि रत्न' की उपाधियों से सम्मानित किया गया है। https://artandculture.rajasthan.gov.in/content/dam/doitassets/art-and-culture/Rajasthani-Bhasha-Sahitya-Avm-Sanskriti-Academy-Bikaner/pdf/JJ_All_Pdf/JJ_06_12_12_February_to_February_1979.pdf Jagti Jot Year-6 Vol 12 Rajasthani Bhasha Sahitya & Sanskriti Academy 1979 Bikaner Rajasthani http://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.61804 Whos Who Of Indian Writers S.babu Rao Ratnu Thakur, Akshaya Singh, sahitya bhushana, sahitya ratna, kavi RATNA. b. 24.12.10, Kali Pahadi, Jaipur Dist., Raj. Farming, mt. Raj. & Hindi. Pubs. 11. In Raj. : Basant Varnan, 60; Kashmir Vijay, 62; Bangla Vijay, 65; Chittor ke Teen Shake, 68; Pat Parivartan, 77; Jaipur ri Jhamal, 77 (all poetry). http://www-lib.tufs.ac.jp/opac/recordID/catalog.bib/BA91121351 चारण साहित्य का इतिहास जिज्ञासु लेखक, मोहनलाल 東京外国語大学附属図書館OPAC 2022-03-01 अपने काकोसा श्री अक्षयसिंह रतनू को काव्य-गुरु मानकर उनके सान्निध्य में अध्ययन का क्रम जारी रखा और राजस्थानी तथा हिन्दी ग्रंथों का पारायण किया। 1 मार्च 2022 https://web.archive.org/web/20220301175808/http://www-lib.tufs.ac.jp/opac/recordID/catalog.bib/BA91121351 dead https://books.google.com/books?id=UOshAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Ādhunika Rājasthānī padya sāhitya Aśānta Bī Ela Mālī 1991 Rājasthānī Bhāshā Bāla Sāhitya Prakāśana Ṭrasṭa hi अक्षय सिंह रतनू आधुनिक परम्परावादी कवियों में एक संघर्षशील कवि कहे जा सकते हैं । https://books.google.com/books?id=-Ib4DwAAQBAJ&newbks=0&hl=en आकाशवाणी: वर्ष-43, अंक-5 ( 1 मार्च, 1978 ) Delhi All India Radio (AIR),New 1978-03-01 All India Radio (AIR),New Delhi hi https://books.google.com/books?id=AMVjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Brajabhāshā sāhityakāra paricai kośa Mudgala Gopālaprasāda 1999 Rājasthāna Brajabhāshā Akādamī hi https://books.google.com/books?id=6MFjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Rājasthāna ke ajāne Brajabhāshā sāhityakāra darapana Rājasthāna Brajabhāshā Akādamī hi https://books.google.com/books?id=8zFuAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Rājasthāna vārshikī 1997 Pañcagaṅgā Prakāśana hi
प्रारंभिक जीवन और परिवार
ठाकुर अक्षय सिंह रतनूं का जन्म 24 दिसंबर 1910 को जयपुर के काली पहाड़ी-हाफांवत गांव के रतनूं चारण परिवार में हुआ था। उनके पिता राजस्थान के नागौर के चारणवास गांव के ठाकुर झुझारसिंह रतनूं थे। उनके दादा ठाकुर जवाहर दान संपन्न और धनाढ्य थे, उनकी हुंडी (क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट) कुचामन से संचालित होती थी। जब वह छोटे थे तब अक्षयसिंह जी की माताजी का देहांत हो गया था। बाद में अक्षय सिंह को अलवर भेज दिया गया जहां उनकी भुआजी ने उनका पालन-पोषण किया। ठाकुर अक्षय सिंह के चार पुत्र और एक पुत्री है। https://artandculture.rajasthan.gov.in/content/dam/doitassets/art-and-culture/Rajasthani-Bhasha-Sahitya-Avm-Sanskriti-Academy-Bikaner/pdf/JJ_All_Pdf/JJ_24_04_04_July_to_July_1995.pdf Jagti Jot Year-24 Vol-4 Rajasthani Bhasha Sahitya & Sanskriti Academy 1995 Bikaner Rajasthani https://books.google.com/books?id=AMVjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Brajabhāshā sāhityakāra paricai kośa Mudgala Gopālaprasāda 1999 Rājasthāna Brajabhāshā Akādamī hi 1. नाम श्री अक्षय सिंह रत्नू 2. पिता का नाम श्री झुझार सिंह 3. जन्म तिथि : अंकन में -24.12.1910 सब्दन में -चौबीस दिसम्बर उन्नीस सौ दस
डॉ. करणीसिंह रतनूं
भवानीसिंह रतनूं
भगवत्तीसिंह रतनूं
जयन्तीसिंह रतनूं
भागीरथी कंवर (पुत्री)
शिक्षा
ठाकुर अक्षय सिंह ने अलवर में अपने गुरु गिरधारीलाल भट्ट तैलंग के अधीन अपनी शिक्षा पूरी की। उन्होंने कौमुदी, रघुवंश, कुवल्यानंद, चंद्रलाक और अमरकोश को पढ़ा। वह हिंदी, डिंगल, संस्कृत, उर्दू, राजस्थानी, ब्रजभाषा और प्राकृत के विद्वान बन गए।
कैरियर
स्रोत: https://books.google.com/books?id=Po9jAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Rājasthāna ke agyāta Braja bhāshā sāhityakāra: vyaktitva, kr̥titva, aru Braja-racanā mādhurī saṅkalana 1991 Rājasthānī Brajabhāshā Akādamī hi वे पैले-पले पूर्व रियासत अलवर सचिवालय राज सेवा में हते । मत्स्य राज्य बनिबे पं वे मत्स्य राज्य सचिवालय मांहि चीफ रीडर बनाये गये।... श्री करणी माता के अनन्य उपासक अरु परम भक्त श्री अक्षयसिह रत्नू सरलता अरु सौम्यता की अखै निधि हैं ।...बजभाषा, हिन्दी अरु राजस्थानी में काव्य रचना करिबे वारे रत्नू जी ने सबसों पहले ब्रजभाषा में रचना करी। वा समै बिनकी आयु 17-18 बरस ही अरु अलवर मैं...महाराज सवाई जयसिंह जी कूँ जब अड़तालीस घंटनि माहि आबू जाईवे को आदेस भयो बो तब अलवरेन्द्र ने एक मोहर बन्द लिफाफा लेक नरेन्द्र मण्डल के अध्यच्छ नवाव भोपाल में ढिंग भेजो जा आदेश के संग के काऊ ये जि पतौ न चल के रतनू जी अलवर सू आयो है। रतनू जी तो मालवीय जी को दूत बनिक नवाव साहब के पास पहुंचे । लिफाफा खोलिब पे पतो चलो के अच्छय सिंह जी तौ अलवर सूं आये भये हैं।
अक्षय सिंह ने अपने कैरियर की शुरुआत अलवर की पूर्ववर्ती रियासत में एक सिविल सेवक के रूप में की थी। शासक सवाई जयसिंह के साथ उसके अच्छे संबंध थे। स्वतंत्रता के बाद, अक्षय सिंह जयपुर चले गए और मत्स्य संघ, संयुक्त राजस्थान और जयपुर सचिवालय में मुख्य पाठक के रूप में सेवा की, अंततः 1968 में सेवानिवृत्त हुए।
अलवर राज्य हिंदी को आधिकारिक राज्य भाषा घोषित करने वाले पहले राज्यों में से एक था। अक्षय सिंह ने हिंदी को बढ़ावा देने और सिखाने के लिए स्थापित हिंदी प्रशिक्षण केंद्र के प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया।
कवि
स्रोत: https://books.google.com/books?id=NLNjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Ājādī kā alakha: Rājasthāna kī svatantratā saṅgrāma kālīna kāvya-cetanā kā prāmāṇika dastāveja Prabhākara Manohara 1986 Jana-Jīvana Prakāśana hi
ठाकुर अक्षय सिंह ने कम उम्र में ही कविताएं लिखना शुरू कर दिया था। 6 साल की उम्र में, उन्होंने बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह को गंगानगर में किसानों को नदी का पानी लाने के लिए अपनी गंग नाहर परियोजना पर बधाई देते हुए एक कविता प्रस्तुत की।
1939 में, अक्षय सिंह ने अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति के लिए ब्रिटिश सरकार की भूमिका की आलोचना की, जब उन्होंने अलवर और आसपास के क्षेत्रों के मेव समुदाय को उकसाया जिसके कारण दंगे हुए और अलवर के महाराजा को ब्रिटिश सरकार द्वारा आबू और बाद में बॉम्बे में भेज दिया गया। अक्षय सिंह ने अंग्रेजों की भूमिका को रेखांकित करते हुए एक कविता 'अलवर में उलटफेर' लिखी। अक्षय सिंह भी महाराजा जय सिंह से मिलने के लिए गए, जिन्होंने उनके निर्वासन के दौरान अक्षय सिंह से मिलने हेतु बुलाया था। वे महाराजा जय सिंह के अनुरोध पर 15 दिनों तक उनके साथ रहे।
अक्षय सिंह ने वाल्टरकृत चारण राजपूत हितकारिणी सभा से चारणों को हटाने के कदम की आलोचना की।
उन्हें ब्रजभाषा अकादमी द्वारा 'ब्रज-रतन' की उपाधि दी गई थी। अकादमी ने ब्रजभाषा साहित्य में उनके योगदान के लिए ठाकुर अक्षय सिंह रतनूं पर एक मोनोग्राफ प्रकाशित किया।
अक्षय सिंह ने चित्तौड़ के जौहर के बलिदान के साथ-साथ गांधीवादी दर्शन के विषयों पर भी लिखा है। https://books.google.com/books?id=4ON5jEqxoHgC&newbks=0&hl=en Cittaura ke jauhara va sake Dhamora Sawai Singh 1968 hi https://books.google.com/books?id=DbINAAAAIAAJ&newbks=0&hl=en Rājasthānī sāhitya kā itihāsa: Ādhunika kāla Aśānta Bī Ela Mālī 1990 Viveka Pabliśiṅga Hāusa hi
समाज सेवा
अक्षय सिंह ने मथुरा में करणी माता मंदिर के जीर्णोद्धार के प्रयासों का नेतृत्व किया, जिसका मूल रूप से निर्माण 16 वीं शताब्दी में लाखाजी बारहठ द्वारा किया गया था। अलवर में, ठाकुर अक्षय सिंह ने एक चारण बोर्डिंग हाउस (छात्रावास) के साथ-साथ गजूकी भवन और थंभावली भवन का निर्माण किया। 1949 में, अक्षय सिंह जयपुर चले गए और एक चारण बोर्डिंग हाउस के निर्माण के लिए प्रयास किए। इस प्रयास में उन्हें गुलाबदानजी हांपावत(कोट) और शीशदानजी पाल्हावत(किशनपुरा) द्वारा सहायता प्राप्त हुई। बोर्डिंग का उद्घाटन राजस्व सचिव हेतुदान उज्जवल द्वारा किया गया।
उद्धरण
अपनी भाषा अपना वेश, अपनी संस्कृति अपना देश, स्वतंत्रता का यह ही सार, सादा जीवन उच्च विचार। "
कृति
स्रोत
अक्षय केसरी, प्रताप चरित्र · 1989 https://books.google.com/books?id=buoeAAAAIAAJ&newbks=0&hl=en Akshaya kesarī, pratāpa caritra Ratnū Akshayasiṃha 1989 Cāraṇa Sāhitya Śodha Saṃsthāna hi
अक्षय भारत दर्शन
अक्षय जन स्मृति
वाल्टरकृत चारण राजपूत सभा के रूलिंग्स पर दो शब्द
श्री मदभागवद के दशम स्कन्ध कौ ब्रजभाषा पद्यानुवाद
अलवर में उलट फेर (खंड काव्य)
अक्षय तेज नीति समुच्चय
दासोड़ी दर्शन
राजस्थान वंदना
भीसम ग्रीसम https://books.google.com/books?id=3sJjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Naī raṅgata kau Brajakāvya 1994 Rājasthāna Brajabhāshā Akādamī hi
दोहा छन्द और उसके विभिन्न भेद https://books.google.com/books?id=sqdjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Maru-Bhāratī 1988 Biṛlā Ejyūkeśana Ṭrasṭa. hi
अन्योक्ति गुलाब इक्कीसी https://books.google.com/books?id=A5xjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Braja-śatadala: Rājasthāna Brajabhāshā Akādamī kī mukha patrikā 1999 Rājasthāna Brajabhāshā Akādamī hi
फरिश्ते वारों हजारों https://books.google.com/books?id=sOIhAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Sultian Sujada Dhamora Sawai Singh 1964 hi
बसंत वर्णन
कश्मीर विजय
चित्तौड़ के तीन शाके
पट परिवर्तन
जयपुर री झामल
संदर्भ
श्रेणी:भारतीय कवि
श्रेणी:राजस्थानी लोग
श्रेणी:चारण
श्रेणी:राजस्थानी कवि
श्रेणी:हिन्दी लेखक