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411 समाचार
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कार्मे समूह

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कार्मे समूह (Carme group) हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह, बृहस्पति की परिक्रमा करने वाले 'अनियमित उपग्रहों' का एक बड़ा और विशिष्ट समूह है। इस समूह के सभी चंद्रमा एक समान कक्षीय पथ का अनुसरण करते हैं और उनकी भौतिक विशेषताएँ भी एक जैसी हैं। खगोलविदों का मानना है कि इन सभी उपग्रहों की उत्पत्ति एक ही प्राचीन खगोलीय पिंड के टूटने से हुई है। इस समूह का नाम इसके सबसे बड़े सदस्य, कार्मे के नाम पर रखा गया है, और यह बृहस्पति का सबसे बड़ा उपग्रह समूह है जिसमें वर्तमान में 41 से अधिक ज्ञात चंद्रमा शामिल हैं।Sheppard Scott S. Jewitt David C. An abundant population of small irregular satellites around Jupiter https://archive.org/details/sim_nature-uk_2003-05-15_423_6937/page/261 Nature 423 6937 2003 261-263 10.1038/nature01584 कक्षीय विशेषताएँ कार्मे समूह के उपग्रह अपनी अद्वितीय कक्षीय गतिशीलता के लिए जाने जाते हैं: प्रतिगामी कक्षा: गैलीलियन उपग्रहों (जैसे गेनीमेड या यूरोपा) के विपरीत, जो बृहस्पति के घूमने की दिशा में ही परिक्रमा करते हैं, कार्मे समूह के सभी उपग्रह बृहस्पति के घूमने की विपरीत दिशा (उल्टी) में परिक्रमा करते हैं। इसे खगोल विज्ञान में 'प्रतिगामी' कक्षा कहा जाता है। उच्च झुकाव: इनकी कक्षाएँ बृहस्पति की भूमध्य रेखा के सापेक्ष अत्यधिक झुकी हुई हैं। इन सभी का कक्षीय झुकाव लगभग 165° के आसपास है। इस गहरी समानता के कारण, इसे कभी-कभी '165° झुकाव समूह' भी कहा जाता है। उत्केंद्रता और दूरी: ये उपग्रह बृहस्पति से बहुत दूर, औसतन 22.9 से 24.1 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर परिक्रमा करते हैं। इनकी कक्षाएँ पूर्णतः गोलाकार नहीं बल्कि अत्यधिक अण्डाकार हैं।Grav Tommy Holman Matthew J. Near-Infrared Photometry of the Irregular Satellites of Jupiter and Saturn The Astrophysical Journal 2004 10.1086/382287 L31-L34"Orbital and Collisional Evolution of the Irregular Satellites" उत्पत्ति और क्षुद्रग्रह विखंडन खगोलविदों का दृढ़ विश्वास है कि कार्मे समूह के चंद्रमा बृहस्पति के साथ उसी समय नहीं बने थे जब ग्रह का निर्माण हुआ था। इसके बजाय, इनका पूर्वज एक डी-प्रकार का क्षुद्रग्रह था-जो संभवतः 'हिल्डा परिवार' या बृहस्पति के ट्रोजन से भटक कर आया था। अरबों साल पहले, जब यह विशाल क्षुद्रग्रह बृहस्पति के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण द्वारा पकड़ लिया गया, तो संभवतः यह किसी अन्य खगोलीय पिंड या धूमकेतु से टकरा गया। इस विनाशकारी विखंडन के कारण इसके टुकड़े-टुकड़े हो गए। सबसे बड़ा बचा हुआ टुकड़ा 'कार्मे' कहलाया (जिसमें अभी भी मूल पिंड का लगभग 99% द्रव्यमान है), और बाकी के छोटे टुकड़े अंतरिक्ष में फैलकर इस समूह के अन्य छोटे उपग्रह बन गए।Nesvorny David et al. Orbital and Collisional Evolution of the Irregular Satellites https://archive.org/details/sim_astronomical-journal_2003-07_126_1/page/398 The Astronomical Journal 126 1 2003 398-429 10.1086/375461 रंग और भौतिक समानताएँ इस 'विखंडन सिद्धांत' को इस तथ्य से सबसे अधिक बल मिलता है कि कार्मे समूह के लगभग सभी चंद्रमाओं का वर्णक्रम और रंग बिल्कुल एक समान है। इन्फ्रारेड दूरबीनों से देखने पर ये सभी हल्के लाल रंग के दिखाई देते हैं, जो बाहरी सौर मंडल में पाए जाने वाले कार्बन-समृद्ध डी-प्रकार के क्षुद्रग्रहों की एक विशिष्ट पहचान है। समूह में केवल 'कैलाइक' नामक उपग्रह एक अपवाद है, जो बाकी सभी की तुलना में काफी अधिक लाल है।Rettig Terrence W. et al. Implied Evolutionary Differences of the Jovian Irregular Satellites from a BVR Color Survey Icarus 154 2 2001 313-320 10.1006/icar.2001.6715 प्रमुख सदस्य अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ की नामकरण परंपरा के अनुसार, बृहस्पति के सभी 'प्रतिगामी' उपग्रहों के नाम अंग्रेजी अक्षर "-e" (ई) पर समाप्त होते हैं। इसके प्रमुख सदस्यों में शामिल हैं: कार्मे: समूह का सबसे बड़ा सदस्य, जिसका व्यास लगभग 46 किलोमीटर है। टायगेटे और एरीनोम: क्रमशः 5 और 3 किलोमीटर व्यास वाले छोटे चंद्रमा। ऐत्ने, चाल्डीन, इओनोए: ये सभी क्षुद्रग्रह विखंडन के बाद बचे हुए छोटे टुकड़े हैं, जिनका व्यास 3 से 5 किलोमीटर के बीच है।https://science.nasa.gov/jupiter/moons/ Jovian Moons Database NASA Science"Near-Infrared Photometry of Irregular Satellites of Jupiter and Saturn" सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नासा (NASA) - बृहस्पति अन्वेषण श्रेणी:सौर मंडल श्रेणी:खगोल भौतिकी श्रेणी:क्षुद्रग्रह