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पर्युदर्याशोथ
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पर्युदर्याशोथ Tuberculous peritonitis (6544825621).jpg तपेदिक से होने वाला पर्युदर्याशोथ सर्जिकल एब्डोमेन, एक्यूट एब्डोमेन आकस्मिक चिकित्सा, साधारण शल्यचिकित्सा p ɛ r ᵻ t ə ˈ n aɪ t ᵻ s गंभीर दर्द, पेट में सूजन, बुखार सेप्सिस (यदि शीघ्र उपचार न किया जाए तो सेप्सिस होने की संभावना है), शॉक, तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम अचानक प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक, सामान्यीकृत, स्थानीयकृत आंतों के मार्ग का छिद्रण, अग्नाशयशोथ, श्रोणि जलन बीमारी, लीवर सिरोसिस, अपेंडिक्स का फटना जलोदर, उदरावरणीय अपोहन जांच, रक्त परीक्षण, चिकित्सा प्रतिबिम्बन प्रतिजैविक, अन्तःशिरा चिकित्सा, वेदनाहर, सर्जरी अपेक्षाकृत सामान्य
पर्युदर्याशोथ (पेरिटोनाइटिस) उदर गुहा की भीतरी दीवार तथा उदर के आंतरिक अंगों को आवृत करने वाली झिल्ली, जिसे पर्युदर्या (परिटॉनियम) कहा जाता है, की सूजन है।Peritonitis - National Library of Medicine https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmedhealth/PMHT0022963/ पबमेड हेल्थ 22 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20160124082858/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pubmedhealth/PMHT0022963/ 2016-01-24 यह एक गंभीर चिकित्सीय अवस्था है, जो प्रायः संक्रमण, अंगों के छिद्रण अथवा अन्य रोग प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप उत्पन्न होती है और समय पर उपचार न मिलने पर जीवन के लिए संकटपूर्ण सिद्ध हो सकती है।
पर्युदर्याशोथ के प्रमुख लक्षणों में तीव्र और लगातार पेट दर्द, पेट में सूजन, ज्वर तथा अनपेक्षित वजन घटना शामिल हो सकते हैं। रोगी का पेट स्पर्श करने पर अत्यधिक संवेदनशील या कोमल महसूस हो सकता है, और यह संवेदनशीलता पेट के किसी एक भाग तक सीमित रहने के बजाय पूरे उदर में भी फैल सकती है।फेर्री फ्रेड एफ. Ferri's Clinical Advisor 2018 E-Book: 5 Books in 1 2017 एल्सेवियर हेल्थ साइंसेज 978-0-323-52957-0 979–980 https://books.google.com/books?id=wGclDwAAQBAJ&pg=PA979 en 2020-08-24 2020-10-08 https://web.archive.org/web/20201008033634/https://books.google.com/books?id=wGclDwAAQBAJ&pg=PA979 live कई रोगियों में मतली, उल्टी, भूख में कमी तथा सामान्य अस्वस्थता जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
यदि इस अवस्था का शीघ्र निदान और उपचार न किया जाए, तो यह गंभीर जटिलताओं को जन्म दे सकती है। इनमें शॉक—जिसमें रक्तचाप अत्यधिक कम हो जाता है और शरीर के अंगों तक पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं पहुँच पाता—तथा तीव्र श्वसन संकट सिंड्रोम जैसी संभावित रूप से प्राणघातक स्थितियाँ शामिल हैं।Acute Abdominal Pain http://www.merckmanuals.com/home/digestive-disorders/symptoms-of-digestive-disorders/acute-abdominal-pain#v14496269 मर्क मैनुअल्स उपभोक्ता संस्करण 31 दिसंबर 2017 13 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180713101640/https://www.merckmanuals.com/home/digestive-disorders/symptoms-of-digestive-disorders/acute-abdominal-pain#v14496269 live इसलिए पर्युदर्याशोथ को एक चिकित्सीय आपातस्थिति माना जाता है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन और उपचार आवश्यक होता है।
पर्युदर्याशोथ के अनेक कारण हो सकते हैं, जिनमें से अधिकांश उदर के किसी अंग में संक्रमण, सूजन अथवा छिद्रण से संबंधित होते हैं। इसके प्रमुख कारणों में आंतों में छिद्र होना, अग्नाशयशोथ, श्रोणि सूजन रोग, आमाशय या ग्रहणी का अल्सर, यकृत सिरोसिस, अपेंडिक्स का फटना तथा पित्ताशय में छिद्र होना शामिल हैं।Peritonitis https://www.nhs.uk/conditions/peritonitis/ एनएचएस 31 दिसंबर 2017 28 September 2017 31 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171231212637/https://www.nhs.uk/conditions/peritonitis/ live इन स्थितियों में उदर गुहा के भीतर जीवाणु, पाचक रस या अन्य पदार्थ प्रवेश कर सकते हैं, जिससे पर्युदर्या में सूजन और संक्रमण उत्पन्न हो जाता है।
कुछ परिस्थितियाँ पर्युदर्याशोथ के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इनमें जलोदर, अर्थात उदर गुहा में असामान्य रूप से द्रव का एकत्र होना, एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है, विशेषकर यकृत सिरोसिस से ग्रस्त व्यक्तियों में। इसके अतिरिक्त, पेरिटोनियल डायलिसिस से गुजर रहे रोगियों में भी पर्युदर्याशोथ विकसित होने की संभावना अधिक रहती है, क्योंकि इस प्रक्रिया के दौरान उदर गुहा में संक्रमण प्रवेश कर सकता है।
पर्युदर्याशोथ का निदान सामान्यतः रोगी के नैदानिक परीक्षण और लक्षणों के मूल्यांकन से प्रारंभ होता है। इसके साथ-साथ रक्त परीक्षण संक्रमण और सूजन की गंभीरता का आकलन करने में सहायक होते हैं। रोग की पुष्टि तथा उसके मूल कारण की पहचान के लिए चिकित्सा प्रतिबिम्बन तकनीकों, जैसे अल्ट्रासोनोग्राफी, संगणकीय टोमोग्राफी (सीटी स्कैन) अथवा अन्य उपयुक्त जाँचों का भी उपयोग किया जा सकता है।Acute Abdominal Pain http://www.merckmanuals.com/professional/gastrointestinal-disorders/acute-abdomen-and-surgical-gastroenterology/acute-abdominal-pain मर्क मैनुअल्स प्रोफेशनल एडिशन 31 दिसंबर 2017 13 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180713075425/https://www.merckmanuals.com/professional/gastrointestinal-disorders/acute-abdomen-and-surgical-gastroenterology/acute-abdominal-pain live
पर्युदर्याशोथ का उपचार रोग के कारण, उसकी गंभीरता तथा रोगी की समग्र स्थिति पर निर्भर करता है, किंतु अधिकांश मामलों में तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक होता है।Encyclopaedia: Peritonitis http://www.nhsdirect.wales.nhs.uk/encyclopaedia/p/article/peritonitis/ एनएचएस डायरेक्ट वेल्स 31 दिसंबर 2017 25 April 2015 31 दिसंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171231212715/http://www.nhsdirect.wales.nhs.uk/encyclopaedia/p/article/peritonitis/ live उपचार में सामान्यतः प्रतिजैविक (एंटीबायोटिक) औषधियों का उपयोग किया जाता है, ताकि संक्रमण को नियंत्रित किया जा सके। इसके साथ ही, शरीर में द्रव और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने के लिए अंतःशिरा द्रव (इंट्रावीनस फ्लूइड) दिए जाते हैं तथा रोगी की पीड़ा को कम करने के लिए दर्द निवारक औषधियों का भी प्रयोग किया जाता है।
यदि पर्युदर्याशोथ किसी छिद्रित अंग, फटे हुए अपेंडिक्स, पित्ताशय अथवा अन्य शल्य-चिकित्सीय कारणों से उत्पन्न हुआ हो, तो शल्यचिकित्सा आवश्यक हो सकती है। शल्यक्रिया का उद्देश्य संक्रमण के स्रोत को समाप्त करना, क्षतिग्रस्त अंग की मरम्मत करना तथा उदर गुहा से संक्रमित द्रव को हटाना होता है।
कुछ रोगियों में अतिरिक्त सहायक उपचारों की भी आवश्यकता पड़ सकती है। उदाहरणस्वरूप, नासोगैस्ट्रिक नली का उपयोग आमाशय की सामग्री को निकालने और पाचन तंत्र को विश्राम देने के लिए किया जा सकता है, जबकि अत्यधिक रक्तस्राव या गंभीर रक्ताल्पता की स्थिति में रक्ताधान की आवश्यकता पड़ सकती है।
पर्युदर्याशोथ एक गंभीर और संभावित रूप से प्राणघातक अवस्था है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए, तो रोगी की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है और कुछ ही दिनों में मृत्यु भी हो सकती है। विशेष रूप से, यकृत सिरोसिस से ग्रस्त व्यक्तियों में इसका जोखिम अधिक होता है। अध्ययनों के अनुसार, सिरोसिस से पीड़ित और अस्पताल में भर्ती होने वाले लगभग 20 प्रतिशत रोगियों में पर्युदर्याशोथ विकसित हो सकता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:चिकित्सा आपातकाल