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गौड़ अंचल
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प्राचीन काल तथा मध्यकाल में गौड़ एक प्रदेश था जो बंगाल (बंगदेश) में स्थित था।
स्थिति एवं विस्तार
स्कंदपुराण माहेश्वर +वैष्णवखण्ड के अनुसार गौड़देश की स्थिति वंगदेश से लेकर भुवनेश (भुवनेश्वर,/उत्कल /(उड़ीसा?) तक थी-:
वंगदेशं समारभ्य भुवनेशांतग: शिवे, गौड़ देश: समाख्यात: सर्वविद्या विशारद:।
पद्मपुराण (189- 2) में गौड़ नरेश नरसिंह का नाम आया है। अभिलेखों में गौड़ देश का सर्वप्रथम उल्लेख 553 ई. के हराहा अभिलेख में है जिसमें ईश्वर वर्मन मौखरी की गौड़देश पर विजय का उल्लेख है। बाणभट्ट ने गौड़नरेश शशांक का वर्णन किया है जिसने हषवर्धन के ज्येष्ठ भ्राता राज्यवर्धन का वध किया था। माधाईनगर के ताम्रपट्ट लेख से सूचित होता है कि गौड़नरेश लक्ष्मणसेन का कलिंग तक प्रभुत्व था।
गौड़ देश के नाम पर संस्कृत काव्य की परुषावृत्ति का नाम ही गौड़ी पड़ गया था। कायस्थों आदि की कई जातियाँ आज भी गौड़ कहलाती है। कुछ विद्वानों का मत है कि गुड़ के व्यापार का केंद्र होने के कारण ही इस प्रदेश का नाम गौड़ हो गया था।
गौड़ नगरी
गौड़ (नगर)
गौड़ (आधुनिक नाम) या 'लक्ष्मणावती' (प्राचीन नाम) या 'लखनौती' (मध्यकालीन नाम) पश्चिम बंगाल के मालदा जिला में स्थित एक पुराना नगर है। यह हिंदू राजसत्ता के उत्कर्षकाल में संस्कृत विद्या के केंद्र के रूप में विख्यात था और महाकवि जयदेव, कविवर गोवर्धनाचार्य तथा धोयी, व्याकरणचार्य उमापतिघर और शब्दकोशकार हलायुध इन सभी विद्वानों का संबंध इस प्रसिद्ध नगरी से था। इसके खंडहर बंगाल के मालदा नामक नगर से 10 मील दक्षिण पश्चिम की ओर स्थित हैं।
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय
श्रेणी:बंगाल का इतिहास
श्रेणी:भारत के प्राचीन भाग