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ट्रॉली समस्या
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अंगूठाकार|ट्रॉली समस्या एक दुविधा प्रस्तुत करती है— क्या यह श्रेयस्कर है कि उत्तोलक खींचकर अनियन्त्रित ट्रॉली को उस पार्श्व-पटरी पर मोड़ा जाए जहाँ केवल एक व्यक्ति है?
ट्रॉली समस्या (en Trolley problem) नैतिकता, मनोविज्ञान तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता में विचार-प्रयोगों (चिन्तन-प्रयोगों) की एक शृंखला है, जिसमें यह प्रश्न उठता है कि अधिक जनों को बचाने के लिए क्या एक व्यक्ति का बलिदान करना उचित है। यह शृंखला सामान्यतः ऐसे परिदृश्य से आरम्भ होती है जिसमें एक अनियन्त्रित ट्रॉली (ट्राम) अथवा रेलगाड़ी पथ पर दौड़ती हुई पाँच व्यक्तियों को टक्कर मारकर मार डालने वाली होती है। किन्तु चालक अथवा कोई दर्शक हस्तक्षेप करके वाहन को दूसरी पटरी पर मोड़ सकता है, जहाँ केवल एक व्यक्ति मारा जाएगा। इसके पश्चात् अन्य रूपान्तर प्रस्तुत किए जाते हैं—अनियन्त्रित वाहन के भिन्न रूप तथा जीवन-मृत्यु सम्बन्धी तुल्य दुविधाएँ (चिकित्सकीय, न्यायिक इत्यादि)। प्रत्येक में विकल्प यही होता है—कुछ न करना, जिससे अनेक जन मारे जाएँगे; अथवा हस्तक्षेप करके एक "सुरक्षित" व्यक्ति का बलिदान कर अन्य जनों को बचाना।
प्रत्येक परिदृश्य की नैतिकता पर विचार करते समय यह स्पष्ट होता है कि कथा के सूक्ष्म विवरण भी निर्णय को प्रभावित करते हैं। सामान्य सिद्धान्त की खोज कि विभिन्न रूपान्तरों में क्यों भिन्न निर्णय निकलते हैं, १९६७ में इंग्लैण्ड की दार्शनिक फिलिप्पा फ़ूट द्वारा उठाया गया था। तत्पश्चात् १९७६ में जुडिथ जार्विस थॉमसन en Judith Jarvis Thomson ने इसे "ट्रॉली समस्या" नाम दिया और इस पर विस्तृत साहित्य विकसित हुआ।Philippa Foot, "The Problem of Abortion and the Doctrine of the Double Effect" in Virtues and Vices (Oxford: Basil Blackwell, 1978) (originally appeared in the Oxford Review, Number 5, 1967.)
थॉमसनJudith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976)Jarvis Thomson Judith 1985 The Trolley Problem http://www.psy.vanderbilt.edu/courses/hon182/thomsontrolley.pdf Yale Law Journal 94 6 1395–1415 10.2307/796133 796133, फ्रान्सिस काम्म en Frances Kamm तथा पीटर उन्गर जैसे दार्शनिकों ने इस समस्या का गहन विश्लेषण किया।Judith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976) इस साहित्य की विशेषता यह है कि इसमें क्रमशः विचित्र और असंगत परिदृश्य प्रस्तुत किए जाते हैं—जैसे किसी व्यक्ति को पटरी पर धकेलकर ट्रॉली रोकना, उसके अंग निकालकर प्रत्यारोपण-रोगियों को बचाना, अथवा अप्रत्यक्ष उपायों से हत्या करना जिससे कारण-परिणाम की शृंखला और उत्तरदायित्व जटिल हो जाता है।
फ़ूट के प्रकाशन से पूर्व भी कुछ रूपान्तर विद्यमान थे। १९०५ में फ्रैंक चैपमैन शार्प ने विस्कॉन्सिन विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को नैतिक प्रश्नावली में ऐसा परिदृश्य दिया जिसमें रेल का स्विचमैन स्विच नियन्त्रित करता है और बलिदान हेतु अकेला व्यक्ति उसका पुत्र होता है।Judith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976)Kamm Frances Myrna 1989 Harming Some to Save Others https://archive.org/details/sim_philosophical-studies_1989-11_57_3/page/n3 Philosophical Studies 57 3 227–60 10.1007/bf00372696 171045532 जर्मन विधि-दर्शनशास्त्री कार्ल एंगिश ने १९३० में इसी प्रकार की दुविधा पर विचार किया। १९५१ में हान्स वेल्ज़ेल ने भी इसे उठाया। १९५३ में अव्रहोम येशायाह कारेलिट्ज़ ने ताल्मुद पर टिप्पणी में यह प्रश्न किया कि क्या किसी प्रक्षेप्य को बड़ी भीड़ से हटाकर छोटी भीड़ की ओर मोड़ना नैतिक है।Judith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976)Kamm Frances Myrna 1989 Harming Some to Save Others https://archive.org/details/sim_philosophical-studies_1989-11_57_3/page/n3 Philosophical Studies 57 3 227–60 10.1007/bf00372696 171045532 इसी प्रकार १९५४ में प्रसारित द स्ट्राइक नामक दूरदर्शन नाटक में कोरियाई युद्ध का एक सेनानायक यह निर्णय करता है कि क्या शत्रु पर वायु-आक्रमण करे और अपनी २० सैनिकों की टुकड़ी का बलिदान दे, अथवा आक्रमण रोककर ५०० सैनिकों की मुख्य सेना को जोखिम में डाले।Judith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976)Judith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976)
२००१ से इस समस्या और इसके रूपान्तरों का प्रयोग नैतिक मनोविज्ञान में प्रायोगिक अनुसंधान हेतु किया जा रहा है। यह लोकप्रिय ग्रन्थों का भी विषय रहा है।Judith Jarvis Thomson, Killing, Letting Die, and the Trolley Problem https://web.archive.org/web/20170909185454/https://learning.hccs.edu/faculty/david.poston/phil1301.80361/readings-for-march-31/JJ%20Thomson%20-%20Killing-%20Letting%20Die-%20and%20the%20Trolley%20Problem.pdf 9 सितंबर 2017 , 59 The Monist 204-17 (1976) स्वचालित वाहनों की रूपरेखा पर चर्चा करते समय भी ट्रॉली-शैली के परिदृश्य उठते हैं—जहाँ क्रमानुदेशन को यह निर्णय करना पड़ता है कि टक्कर अपरिहार्य हो तो किसे बचाया जाए और किसे नहीं। हाल के वर्षों में यह समस्या अन्तर्जाल पर एक मीम भी बन गई है।
मूल दुविधा
फिलिप्पा फ़ूट का विचार-प्रयोग, जिसे अब "ट्रॉली चालक" कहा जाता है, इस प्रकार था—
कल्पना कीजिए कि कोई न्यायाधीश अथवा मजिस्ट्रेट दंगाइयों का सामना कर रहा है, जो किसी अपराध के दोषी को खोजने की माँग कर रहे हैं और धमकी दे रहे हैं कि यदि दोषी न मिला तो वे किसी समुदाय पर रक्तरंजित प्रतिशोध करेंगे। वास्तविक अपराधी अज्ञात है। न्यायाधीश देखता है कि रक्तपात रोकने का एकमात्र उपाय किसी निर्दोष को फँसाकर उसका वध करना है। इसके साथ ही एक अन्य उदाहरण दिया जाता है—एक वैमानिक जिसका विमान दुर्घटनाग्रस्त होने वाला है, यह निर्णय करता है कि उसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र से कम आबादी वाले क्षेत्र की ओर मोड़ना चाहिए। समानता स्थापित करने हेतु यह मान लिया जाता है कि वह एक अनियन्त्रित ट्राम का चालक है, जिसे केवल एक संकीर्ण पटरी से दूसरी पर मोड़ा जा सकता है। एक पटरी पर पाँच व्यक्ति कार्य कर रहे हैं और दूसरी पर एक व्यक्ति। जिस पटरी पर वह जाएगा, वहाँ उपस्थित जन अवश्य मारे जाएँगे। दंगों के उदाहरण में भी भीड़ के पास पाँच बन्धक हैं। अतः दोनों उदाहरणों में विनिमय यही है—एक व्यक्ति का जीवन पाँच जनों के जीवन के लिए। फिलिप्पा फ़ूट
उपयोगितावादी मत कहता है कि उस पटरी की ओर मोड़ना अनिवार्य है जहाँ केवल एक व्यक्ति है। शास्त्रीय उपयोगितावाद के अनुसार यह निर्णय न केवल अनुमेय है, अपितु नैतिक दृष्टि से श्रेष्ठ विकल्प है (अन्य विकल्प है—कुछ न करना)। इस तथ्य से ट्रॉली को मोड़ना अनिवार्य हो जाता है। अन्य दृष्टिकोण यह कहता है कि चूँकि स्थिति में नैतिक दोष पहले से विद्यमान है, दूसरी पटरी की ओर मोड़ना उस दोष में सहभागिता है, जिससे मृत्यु के लिए आंशिक उत्तरदायित्व बनता है। क्रियाविरोधी यह भी कह सकता है कि मानव-जीवन तुलनीय नहीं है। कुछ व्याख्याओं में केवल इस स्थिति में उपस्थित होना और परिणाम को प्रभावित करने की क्षमता होना ही नैतिक दायित्व माना जाता है। यदि ऐसा है, तो कुछ न करना भी अनैतिक कर्म माना जाएगा।
सन्दर्भ
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