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ज़ोलोचिव किला

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ज़ोलोचिव किला Золочівський замок ज़ोलोचिव, ल्वीव ओब्लास्ट, यूक्रेन किला और महल परिसर 1634–1636 याकूब सोबिएस्की 49 48 8 N 24 54 22 E inline thumb|right|ज़ोलोचिव किले का बाहरी दृश्य ज़ोलोचिव किला (यूक्रेनी: Золочівський замок) यूक्रेन के ल्वीव ओब्लास्ट के ज़ोलोचिव नगर में स्थित एक ऐतिहासिक किला और महल परिसर है। यह 17वीं शताब्दी की रक्षात्मक वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है और वर्तमान में बोरीस वोज़्नित्स्की ल्वीव राष्ट्रीय कला दीर्घा की संग्रहालय इकाइयों में से एक है। किले का निर्माण याकूब सोबिएस्की के आदेश पर एक अज्ञात इतालवी वास्तुकार द्वारा नव-डच रक्षा प्रणाली के सिद्धांतों के आधार पर किया गया था। इसकी स्थापत्य योजना को palazzo in fortezza अर्थात् "किले में महल" प्रकार से जोड़ा जाता है।Музей-заповідник «Золочівський замок» https://www.lvivgallery.org.ua/node/8 Львівська національна галерея мистецтв імені Б. Г. Возницького 20 August 2026 uk किले की पश्चिमी रक्षात्मक दीवार में लगा पत्थर का एक क्रॉस ANNO DOMINI 1634 का अभिलेख धारण करता है, जिसे इसके निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। सोबिएस्की परिवार के पास यह किला लगभग डेढ़ शताब्दी तक रहा। 1674 से 1696 तक यह पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल के राजा जान तृतीय सोबिएस्की के राजकीय निवास के रूप में कार्य करता रहा। इतिहास ज़ोलोचिव किले का निर्माण 17वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में सोबिएस्की परिवार के आदेश पर किया गया था। यह नव-डच प्रकार की रक्षात्मक वास्तुकला का उदाहरण है, जिसमें सैन्य सुरक्षा और आवासीय उपयोग को एक ही परिसर में जोड़ा गया था।Золочівський замок https://esu.com.ua/article-17037 Енциклопедія Сучасної України Національна академія наук України 20 August 2026 uk ल्वीव राष्ट्रीय कला दीर्घा के अनुसार, किले का निर्माण याकूब सोबिएस्की के आदेश पर एक अज्ञात इतालवी वास्तुकार ने नव-डच रक्षा प्रणाली के सिद्धांतों के आधार पर किया। पश्चिमी रक्षात्मक दीवार में लगा ANNO DOMINI 1634 अंकित पत्थर का क्रॉस निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण है। किले की किलेबंदी में मोटे मिट्टी के प्राचीर, पत्थर से मजबूत की गई रक्षात्मक दीवारें और कोनों पर स्थित बुर्ज शामिल थे। रक्षात्मक परिसर में सूखी खाई, रैवेलिन, प्रवेश पुल और प्रवेश द्वार जैसी संरचनाएँ भी थीं। सोबिएस्की परिवार और राजकीय निवास सोबिएस्की परिवार ने लगभग डेढ़ शताब्दी तक ज़ोलोचिव किले पर अधिकार रखा। 1674 में जान तृतीय सोबिएस्की के पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल का राजा बनने के बाद किले को राजकीय निवास के रूप में विशेष महत्व प्राप्त हुआ। 1674 से 1696 तक यह उनका निवास रहा। 1686 में जान तृतीय सोबिएस्की के आदेश पर किले का पुनर्स्थापन कराया गया और इसके आंतरिक भागों को सजाया गया। 18वीं शताब्दी में ज़ोलोचिव किला लिथुआनियाई राडज़िविल परिवार के अधिकार में चला गया। इस समय तक किले का सैन्य महत्व कम हो चुका था और इसका उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए होने लगा। स्थापत्य ज़ोलोचिव किला नव-डच रक्षा प्रणाली और आवासीय वास्तुकला के संयोजन का उदाहरण है। इसे palazzo in fortezza प्रकार की स्थापत्य योजना से जोड़ा जाता है, जिसमें आवासीय महल को मजबूत किलेबंदी के भीतर स्थापित किया जाता है। किले का मुख्य आंतरिक प्रांगण लगभग 110 × 110 मीटर का है। इसके चारों ओर मोटे मिट्टी के प्राचीर थे, जिनकी बाहरी सतह को पत्थरों से मजबूत किया गया था। प्रांगण के कोनों पर शक्तिशाली बुर्ज स्थित थे। किले की रक्षात्मक व्यवस्था में सूखी खाई, रैवेलिन, प्रवेश पुल और प्रवेश द्वार शामिल थे। वर्तमान परिसर में दो प्रमुख ऐतिहासिक आवासीय इमारतें संरक्षित हैं—ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस और चीनी महल। ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस thumb|right|ज़ोलोचिव किले का ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस ज़ोलोचिव किले की प्रमुख आवासीय इमारत है। यह दो-मंजिला भवन है और इसका आकार लगभग 72 × 22 मीटर है। भवन के नीचे तहखाने भी हैं। महल की वास्तुकला में पुनर्जागरणकालीन विशेषताएँ दिखाई देती हैं। इसके कमरों की मूल व्यवस्था को पुनर्स्थापन के दौरान पुनः निर्मित किया गया। पुनर्स्थापन के दौरान एक गुप्त मार्ग भी खोजा गया। महल के ऐतिहासिक उपयोग में दुर्ग के स्वामियों के रहने के लिए कमरे, भंडारण स्थान, कोषागार और पारिवारिक चैपल जैसी सुविधाएँ शामिल थीं। बाद में इसके कमरों को संग्रहालय की प्रदर्शनी के लिए व्यवस्थित किया गया। वर्तमान संग्रहालय में ज़ोलोचिव किले के इतिहास, उसके स्वामियों और विभिन्न ऐतिहासिक कालों से संबंधित वस्तुएँ प्रदर्शित की जाती हैं। संग्रह में चित्रकला, फर्नीचर, हथियार, चीनी मिट्टी की वस्तुएँ, मूर्तियाँ, कालीन तथा अन्य कलात्मक और ऐतिहासिक सामग्री शामिल हैं। ल्वीव राष्ट्रीय कला दीर्घा के अनुसार, ग्रैंड पैलेस को पुनर्स्थापन के बाद 9 अगस्त 2009 को दर्शकों के लिए खोला गया। चीनी महल thumb|right|ज़ोलोचिव किले का चीनी महल चीनी महल ज़ोलोचिव किले परिसर की विशिष्ट इमारतों में से एक है। इसकी मूल संरचना 17वीं शताब्दी के अंत में एक गैलरी-रोटोंडा के रूप में बनाई गई थी। 18वीं शताब्दी में इसमें पार्श्व विस्तार जोड़े गए और इसका वर्तमान स्वरूप विकसित हुआ। इमारत की वास्तुकला में chinoiserie यानी चीनी कला और सज्जा से प्रभावित यूरोपीय शैली के तत्व दिखाई देते हैं। ल्वीव राष्ट्रीय कला दीर्घा के अनुसार, इसके दीर्घकालीन निर्माण का कार्य 1728 से 1730 के बीच पूरा हुआ। "चीनी महल" नाम 1768 से संबंधित किले के अभिलेखों में मिलता है। इसका उपयोग विश्राम और मनोरंजन के लिए किया जाता था। बाद में इसे पूर्वी कला के संग्रह और प्रदर्शन के लिए उपयोग किया गया। पूर्वी कला संग्रहालय 21 मई 2004 को चीनी महल में खोला गया। इसमें एशियाई और अन्य पूर्वी संस्कृतियों से संबंधित धार्मिक, सजावटी और अनुप्रयुक्त कला की वस्तुएँ प्रदर्शित की जाती हैं। संग्रह में चीनी चीनी-मिट्टी के बर्तन, एनामेल, पत्थर और लकड़ी की नक्काशी, चीनी चित्रकला और कढ़ाई, जापानी काष्ठ-मुद्रण तथा बौद्ध धातु मूर्तियों जैसी वस्तुएँ शामिल हैं। 19वीं और 20वीं शताब्दी 18वीं शताब्दी के बाद ज़ोलोचिव किला राडज़िविल परिवार के अधिकार में रहा। 19वीं शताब्दी में यह ल्वीव के अपीलीय सलाहकार काउंट लुकाश कोमार्नित्स्की के परिवार के अधिकार में आया। बाद में किला राज्य के नियंत्रण में चला गया। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध से 1954 तक किले के परिसर का विभिन्न अवधियों में जेल के रूप में उपयोग किया गया। इस दौरान यहाँ ऑस्ट्रियाई, पोलिश, सोवियत और जर्मन प्रशासन से संबंधित जेलें संचालित हुईं। 1954 से 1986 तक परिसर में एक व्यावसायिक तकनीकी विद्यालय संचालित हुआ। 1941 में ज़ोलोचिव किले का परिसर एनकेवीडी द्वारा स्थानीय निवासियों की हत्या की घटनाओं से जुड़ा रहा। ल्वीव राष्ट्रीय कला दीर्घा के अनुसार, उस वर्ष किले के क्षेत्र में 647 स्थानीय निवासियों को एनकेवीडी अधिकारियों द्वारा मार दिया गया था। संग्रहालय और संरक्षण thumb|right|ज़ोलोचिव किले के महल का आंतरिक भाग 1986 में ज़ोलोचिव किले को ल्वीव कला दीर्घा के नियंत्रण में स्थानांतरित किया गया। इसके बाद परिसर में संरक्षण और पुनर्स्थापन का कार्य आगे बढ़ाया गया। 1995 में किले के पुनर्स्थापन के दौरान सोवियत आतंक के पीड़ितों की स्मृति में एक स्मारक चैपल खोला गया। इसका निर्माण वास्तुकार वासिल कामेनश्चिक और मूर्तिकार तेओदोसिया ब्रिझ से संबंधित है। वर्तमान में ज़ोलोचिव किला बोरीस वोज़्नित्स्की ल्वीव राष्ट्रीय कला दीर्घा की संग्रहालय इकाइयों में से एक है। ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस में किले के इतिहास और कला से संबंधित प्रदर्शनी है, जबकि चीनी महल में पूर्वी कला संग्रहालय स्थित है। संग्रह ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस में ज़ोलोचिव किले के इतिहास से संबंधित विभिन्न प्रकार की कलाकृतियाँ और ऐतिहासिक वस्तुएँ प्रदर्शित की जाती हैं। संग्रह में चित्रकला, फर्नीचर, हथियार, चीनी मिट्टी, मूर्तिकला और कालीन सहित विभिन्न प्रकार की सामग्री शामिल है। संग्रह में 17वीं और 18वीं शताब्दी के चित्र, विभिन्न कुलीन परिवारों से संबंधित कला-वस्तुएँ तथा यूरोपीय कला की सामग्री शामिल है। किले परिसर में पुरातात्त्विक वस्तुएँ भी संरक्षित हैं। चीनी महल में पूर्वी कला का संग्रह यूरोप में पूर्वी कलात्मक परंपराओं के प्रभाव को दर्शाता है। संग्रहालय की प्रदर्शनी में विभिन्न एशियाई और मध्य-पूर्वी संस्कृतियों से संबंधित धार्मिक तथा सजावटी कला की वस्तुएँ रखी गई हैं। सांस्कृतिक महत्व ज़ोलोचिव किला पश्चिमी यूक्रेन की ऐतिहासिक रक्षात्मक वास्तुकला का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इसकी विशेषता सैन्य किलेबंदी और आवासीय महल परिसर का संयोजन है। किले का इतिहास सोबिएस्की परिवार और राजा जान तृतीय सोबिएस्की से निकटता से जुड़ा हुआ है। 17वीं और 18वीं शताब्दी में इसमें हुए परिवर्तन यूरोपीय सैन्य वास्तुकला, राजकीय आवास और कलात्मक रुचियों के बदलते स्वरूप को दर्शाते हैं। ग्रैंड रेजिडेंशियल पैलेस और चीनी महल परिसर के अलग-अलग ऐतिहासिक चरणों और कलात्मक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। विशेष रूप से चीनी महल की chinoiserie शैली यूरोप में पूर्वी कला और संस्कृति के प्रति विकसित रुचि को दर्शाती है। आज ज़ोलोचिव किला एक संग्रहालय और सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में कार्य करता है। यह ल्वीव क्षेत्र के "Golden Horseshoe" पर्यटन मार्ग से भी जुड़ा हुआ है, जिसमें ओलेस्को और पिधिर्त्सी के किले शामिल हैं। संदर्भ श्रेणी:यूक्रेन के किले श्रेणी:ल्वीव ओब्लास्ट श्रेणी:यूक्रेन के संग्रहालय