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जेरार्ड डेब्रू
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जेरार्ड डेब्रू Debreu, Gérard (1921-2004) (cropped).jpeg 4 जुलाई 1921 कैले, फ्रांस 31 दिसंबर 2004 पेरिस, फ्रांस फ्रांसीसी, अमेरिकी अर्थशास्त्र, गणित कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, येल विश्वविद्यालय पेरिस विश्वविद्यालय सामान्य संतुलन सिद्धांत, मूल्य का सिद्धांत अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार (1983)
जेरार्ड डेब्रू (4 जुलाई 1921 – 31 दिसंबर 2004) एक अत्यंत प्रख्यात और विश्वविख्यात फ्रांसीसी-अमेरिकी अर्थशास्त्री और गणितज्ञ थे, जिन्हें व्यष्टि अर्थशास्त्र और गणितीय अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके ऐतिहासिक अनुसंधानों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है।https://www.nobelprize.org/prizes/economic-sciences/1983/debreu/biographical/ जेरार्ड डेब्रू की जीवनी नोबेल पुरस्कार समिति 3 जून 2026 वर्ष 1983 में उन्हें अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण वैज्ञानिक योगदान के लिए अकेले ही अर्थशास्त्र के सर्वोच्च सम्मान, नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।https://www.nytimes.com/1983/10/18/world/nobel-in-economics-to-gerard-debreu.html फ्रांसीसी-अमेरिकी अर्थशास्त्री ने जीता नोबेल द न्यूयॉर्क टाइम्स 18 अक्टूबर 1983 3 जून 2026 यह महान सम्मान उन्हें आर्थिक सिद्धांतों में गणितीय कठोरता (सटीकता) लाने और 'सामान्य संतुलन सिद्धांत' का अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी गणितीय प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए प्रदान किया गया था।डेब्रू जेरार्ड सामान्य संतुलन का गणितीय मॉडल आर्थिक समीक्षा पत्रिका 1954 22 265-290 उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण शोध आधुनिक अर्थशास्त्र, बाजारों के अध्ययन और मूल्य निर्धारण को स्पष्ट रूप से समझने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।स्मिथ रॉबर्ट आधुनिक अर्थशास्त्र और गणितीय मॉडल 2008 अर्थशास्त्र शिक्षा प्रकाशन
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
उनका जन्म 4 जुलाई 1921 को फ्रांस के कैले नामक एक अत्यंत प्रमुख और ऐतिहासिक नगर में हुआ था। उनके पिता एक व्यापारी थे, जिसके कारण बचपन से ही उनके घर में व्यापार और अर्थशास्त्र पर चर्चाओं का वातावरण रहता था। उनके प्रारंभिक जीवन का समय अत्यंत संघर्षपूर्ण था क्योंकि उनका अध्ययन द्वितीय महायुद्ध के अत्यंत विनाशकारी दौर में बुरी तरह बाधित हो गया था।डेविस पॉल डेब्रू का प्रारंभिक जीवन और महायुद्ध 2001 अर्थशास्त्र शिक्षा प्रकाशन महायुद्ध के दौरान उन्होंने फ्रांसीसी सेना में भी कार्य किया था, जिसने उन्हें जीवन में अत्यंत कठोर अनुशासन और परिश्रम करने की प्रेरणा दी। बचपन से ही उनकी कुशाग्र बुद्धि के कारण उन्हें गणित के अत्यंत जटिल प्रश्नों को सुलझाने में अत्यधिक आनंद आता था।जॉनसन माइकल महान अर्थशास्त्रियों का प्रारंभिक जीवन प्रायोगिक अर्थशास्त्र पत्रिका 2005 25 112-118
महायुद्ध के समाप्त होने के पश्चात उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के लिए फ्रांस के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में प्रवेश लिया। उन्होंने शुरुआत में विशुद्ध गणित का अध्ययन किया, परंतु महान अर्थशास्त्री मौरिस अले की एक पुस्तक पढ़ने के बाद उनकी रुचि पूरी तरह से अर्थशास्त्र की ओर मुड़ गई।https://www.ens.psl.eu/en/history पेरिस विश्वविद्यालय और अर्थशास्त्र विभाग पेरिस विद्यापीठ अभिलेखागार 3 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot इसके पश्चात उन्होंने अपने अनुसंधान कार्य को जारी रखा और वर्ष 1956 में पेरिस विश्वविद्यालय से विज्ञान और अर्थशास्त्र में अपनी विद्यावाचस्पति (डॉक्टरेट) की सर्वोच्च उपाधि सफलतापूर्वक प्राप्त की। यहाँ उन्होंने गणितीय समुच्चय सिद्धांत का उपयोग करके आर्थिक प्रतिरूपों पर अपना बहुत ही महत्वपूर्ण शोध कार्य पूर्ण किया था, जिसने उनके भविष्य के सबसे बड़े आर्थिक सिद्धांतों की अत्यंत मजबूत नींव रखी।https://econ.berkeley.edu/about/history कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के महान अर्थशास्त्री कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय विज्ञान संकाय 3 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot
विशेषज्ञता और सिद्धांत
उनके अकादमिक शोध और विशेषज्ञता का मुख्य केंद्र व्यष्टि अर्थशास्त्र और गणितीय अर्थशास्त्र था। उन्होंने एक अत्यंत नवीन और क्रांतिकारी पुस्तक लिखी, जिसे विज्ञान जगत में 'मूल्य का सिद्धांत' (द थ्योरी ऑफ वैल्यू) के नाम से जाना जाता है।विलियम्स जॉर्ज आधुनिक अर्थशास्त्र के नए गणितीय सिद्धांत 2010 स्प्रिंगर प्रकाशन उनका यह सिद्धांत स्पष्ट रूप से प्रमाणित करता है कि एक मुक्त बाजार में कीमतें किस प्रकार अपने आप संतुलन में आ जाती हैं। उनसे पहले अर्थशास्त्री केवल शब्दों में यह मानते थे कि बाजार में मांग और आपूर्ति हमेशा संतुलित हो जाती है, परंतु डेब्रू ने सांस्थितिकी (टोपोलॉजी) नामक अत्यंत उन्नत गणितीय प्रणाली का उपयोग करके इसे पहली बार शत-प्रतिशत सटीकता के साथ सिद्ध कर दिया।एंडरसन थॉमस अर्थशास्त्र में संतुलन के सिद्धांत आर्थिक प्रगति 2012 45 200-210
उन्होंने महान अर्थशास्त्री केनेथ एरो के साथ मिलकर भी कार्य किया और दोनों ने संयुक्त रूप से यह गणितीय प्रतिरूप प्रस्तुत किया कि यदि बाजार में कुछ निश्चित शर्तें पूरी होती हैं, तो हमेशा एक ऐसी कीमत प्रणाली मौजूद होगी जो सभी बाजारों को एक साथ संतुलन में ला सकेगी। उनके इस अत्यंत जटिल गणितीय शोध ने अर्थशास्त्र को एक सामाजिक विज्ञान से निकालकर एक अत्यंत सटीक और तार्किक विज्ञान में बदल दिया। यह सिद्धांत आज भी आधुनिक अर्थशास्त्र और व्यापारिक नीतियों का एक बहुत बड़ा और प्रामाणिक आधार है।टेलर रिचर्ड मूल्य का सिद्धांत और बाजार नेचर आर्थिक पत्रिका 2011 15 78-85
पुरस्कार और मान्यता
अर्थशास्त्र, मूल्य निर्धारण और बाजारों की कार्यप्रणाली के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 1983 में अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।https://www.nobelprize.org/prizes/economic-sciences/1983/summary/ 1983 अर्थशास्त्र नोबेल पुरस्कार का सारांश नोबेल फाउंडेशन 3 जून 2026 इस महान पुरस्कार ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके द्वारा किए गए शोध को एक नई और अत्यधिक प्रतिष्ठित मान्यता प्रदान की। नोबेल पुरस्कार के अतिरिक्त उन्हें दुनिया भर के कई अत्यंत प्रतिष्ठित आर्थिक संगठनों और संस्थाओं द्वारा बहुत ही बड़े सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 1976 में उन्हें फ्रांस सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 'लीजन ऑफ ऑनर' से भी अलंकृत किया गया था, जो किसी भी फ्रांसीसी नागरिक के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।हैरिस स्टीवन वैश्विक अर्थव्यवस्था और डेब्रू 2013 वैश्विक आर्थिक प्रकाशन उनके ऐतिहासिक शोध कार्य के कारण ही आज दुनिया भर की सरकारें अपने वित्तीय और आर्थिक प्रतिरूपों को अत्यंत सावधानीपूर्वक तैयार करती हैं।
इन्हें भी देखें
अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार
व्यष्टि अर्थशास्त्र
गणितीय अर्थशास्त्र
केनेथ एरो
कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय
सन्दर्भ
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