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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पंच परमेष्ठी

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thumb|150px|पंच परमेष्ठी पंच परमेष्ठी जैन धर्म के अनुसार सर्व पूज्य हैं। परमेष्ठी उन्हें कहते है हैं जो परम पद स्थित हों।जैन २ यह पंच परमेष्ठी हैं- अरिहन्त : जो दिव्य शरीर में स्थित रहते हैं। जिन्होंने चार घातिया कर्मों का नाश कर दिया हो|जैन २-३ सिद्ध : जो शरीर रहित हैं जिन्होंने सभी कर्मों का नाश कर दिया है।जैन २ सिद्ध परमेष्ठी के मुख्य आठ गुण होते हैं।प्रमाणसागर २००८ ३५९ आचार्य परमेष्ठी- मुनि संघ के नेता। इनके छत्तीस मूल गुण होते हैं। उपाध्याय परमेष्ठी- जो नए मुनियों को ज्ञान उपार्जन में सहयोग करते हैं। मुनि णमोकार मंत्र णमोकार मंत्र thumb|left|णमोकर मंत्र जैन धर्म के सबसे मुख्य मंत्र 'णमोकार मंत्र' में पंच परमेष्ठी को नमस्कार किया जाता है। णमो अरिहंताणं। णमो सिद्धाणं। णमो आइरियाणं। णमो उवज्झायाणं। णमो लोए सव्वसाहूणं॥ अर्थात अरिहंतों को नमस्कार, सिद्धों को नमस्कार, आचार्यों को नमस्कार, उपाध्यायों को नमस्कार, सर्व लोक के साधुओं को नमस्कार। सन्दर्भ संदर्भ सूची https://books.google.co.in/books?id=g9CJ3jZpcqYC Ācārya Nemichandra's Dravyasaṃgraha 9788190363952 जैन विजय क. २०१३ Non-copyright 28 फ़रवरी 2016 https://web.archive.org/web/20160304094006/https://books.google.co.in/books?id=g9CJ3jZpcqYC 4 मार्च 2016 live प्रमाणसागर मुनि जैन तत्त्वविद्या २००८ भारतीय ज्ञानपीठ https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s 978-81-263-1480-5 10 जनवरी 2016 https://web.archive.org/web/20150925201536/https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C&dq=Jain+Tattvavidya&source=gbs_navlinks_s 25 सितंबर 2015 live विजय कुमार जैन जैन धर्म: मंगल परिचय १९९४ 81-85285-03-9 श्रेणी:जैन धर्म