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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अधोरक्त खगोलशास्त्र

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thumb|300px| हबल दूरदर्शी द्वारा करीना नेबुला (Carina Nebula) की इन्फ्रारेड प्रकाश में खिंची गयी तस्वीर thumb|IRAS overview अधोरक्त या इन्फ्रारेड खगोलशास्त्र (Infrared astronomy), खगोलशास्त्र और खगोलभौतिकी की एक शाखा है जिसमें खगोलीय निकायों को इन्फ्रारेड प्रकाश में देखकर अध्ययन किया जाता है। सन १८०० में विलियम हरशॅल ने इन्फ्रारेड प्रकाश की खोज की और इसके तीन दशक बाद सन १८३० में अधोरक्त खगोलशास्त्र की शुरुआत हुई। विद्युत चुम्बकीय वर्णक्रम में इन्फ्रारेड प्रकाश का तरंगदैर्ध्य विस्तार (०.७५ से ३०० माइक्रोमीटर), दृश्य प्रकाश तरंगदैर्घ्य विस्तार (३८० से ७५० नैनोमीटर) और सूक्ष्म तरंगदैर्घ्य तरंग के बीच होता है। इन्फ्रारेड खगोलशास्त्र और प्रकाशीय खगोलशास्त्र (optical astronomy) दोनों में ही प्रायः एक ही तरह केटेलिस्कोप और एक ही तरह के दर्पण या लेंस का प्रयोग किया जाता है क्योंकि इन्फ्रारेड और दृश्य प्रकाश दोनों ही विद्युतचुम्बकीय तरंगों का प्रकाशिकी व्यवहार सामान होता है। पृथ्वी के वातावरण में उपस्थित जल वाष्प द्वारा विभिन्न तरंगदैर्ध्यों वाली इन्फ्रारेड प्रकाश का अवशोषण कर लिया जाता है इसलिए अधिकतर इन्फ्रारेड टेलीस्कोपों की स्थापना संभावित अधिक से अधिक ऊँचे और सूखे स्थानों में की जाती है। ' स्पिट्जर अंतरीक्ष टेलिस्कोप '(Spitzer Space Telescope) और ' हरशॅल अंतरीक्ष वेधशाला ' (Herschel Space observatory) दोनों ही ऐसी इन्फ्रारेड वेधशालाएं है जिसे सूदुर अंतरीक्ष में स्थापित किया गया है। इन्हें भी देखें खगोलशास्त्र से संबंधित शब्दावली श्रेणी:खगोलशास्त्र