Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

किर्कवुड गैप

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

thumb किर्कवुड गैप (Kirkwood gap) हमारे सौर मंडल के मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट में स्थित वे विशिष्ट खाली स्थान या 'रिक्तियां' हैं, जहाँ क्षुद्रग्रहों की संख्या असामान्य रूप से कम होती है। यदि क्षुद्रग्रहों की उनकी सूर्य से दूरी के आधार पर एक ग्राफ (हिस्टोग्राम) बनाया जाए, तो इन दूरियों पर स्पष्ट रूप से खाली स्थान या "गैप" दिखाई देते हैं। इन अंतरालों की खोज 1866 में पेंसिल्वेनिया के एक अमेरिकी खगोलशास्त्री और गणितज्ञ डैनियल किर्कवुड ने की थी, और इन्हीं के सम्मान में इस खगोलीय परिघटना का नामकरण किया गया है।Murray Carl D. Dermott Stanley F. Solar System Dynamics Cambridge University Press 2000 978-0521575973 315-318 'कक्षीय अनुनाद' और कारण किर्कवुड गैप का मुख्य कारण बृहस्पति का विशाल 'गुरुत्वाकर्षण खिंचाव' और कक्षीय अनुनाद की परिघटना है। जब कोई क्षुद्रग्रह सूर्य की परिक्रमा ऐसे समय में करता है जो बृहस्पति के परिक्रमा समय का एक सरल पूर्णांक अनुपात होता है, तो वह क्षुद्रग्रह बृहस्पति के साथ "अनुनाद" में आ जाता है। उदाहरण के लिए, 3:1 के अनुनाद का अर्थ है कि जितने समय में बृहस्पति सूर्य की 1 परिक्रमा पूरी करता है, ठीक उतने ही समय में वह क्षुद्रग्रह सूर्य की 3 परिक्रमाएं पूरी कर लेता है।Lewis John S. Physics and Chemistry of the Solar System https://archive.org/details/physicschemistry0000lewi_h2v8 Academic Press 2004 978-0124467446 385-388 इस स्थिति में, हर बार जब क्षुद्रग्रह और बृहस्पति अपनी कक्षाओं में एक ही सापेक्ष स्थिति में आते हैं, तो बृहस्पति का शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण उस क्षुद्रग्रह पर एक ही दिशा में बार-बार खिंचाव डालता है। इस निरंतर और आवधिक गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के कारण क्षुद्रग्रह की 'उत्केंद्रता' अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे उसकी कक्षा गोल न रहकर अत्यधिक अंडाकार हो जाती है। अंततः यह क्षुद्रग्रह आंतरिक सौर मंडल के ग्रहों (जैसे मंगल) के करीब आ जाता है और उनके गुरुत्वाकर्षण द्वारा बेल्ट से बाहर धकेल दिया जाता है, जिससे उस विशिष्ट स्थान पर एक 'गैप' या खाली जगह बन जाती है।Wisdom Jack Chaotic behaviour and the origin of the 3/1 Kirkwood gap https://archive.org/details/icarus_1983-10_56_1/page/51 Icarus 56 1 1983 51-74 10.1016/0019-1035(83)90131-7"A record of planet migration in the main asteroid belt"अगस्त 2026 InternetArchiveBot प्रमुख किर्कवुड गैप मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट में कई प्रमुख किर्कवुड गैप पाए जाते हैं। इन्हें सूर्य से इनकी दूरी और बृहस्पति के साथ इनके अनुनाद के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है: 3:1 अनुनाद: यह सबसे प्रमुख और स्पष्ट गैप्स में से एक है। यहाँ स्थित क्षुद्रग्रह बृहस्पति की 1 परिक्रमा के मुकाबले 3 परिक्रमाएं करते हैं। यह 'एलिंडा समूह' के क्षुद्रग्रहों का मूल क्षेत्र है। 5:2 अनुनाद (2.82 AU): इस दूरी पर भी क्षुद्रग्रहों की भारी कमी पाई जाती है। 7:3 अनुनाद (2.95 AU): यह बेल्ट के मध्य भाग में एक और महत्वपूर्ण अंतराल है। 2:1 अनुनाद (3.27 AU): यह क्षुद्रग्रह बेल्ट की बाहरी सीमा के करीब स्थित एक बहुत ही बड़ा गैप है, जिसे 'ग्रीक्वा समूह' की कक्षा के रूप में भी जाना जाता है।Ferraz-Mello Sylvio Dynamics of Asteroids Kluwer Academic Publishers 1999 978-0792353386 145-150 खगोलीय महत्व और पृथ्वी पर प्रभाव किर्कवुड गैप्स केवल सौर मंडल के खाली स्थान नहीं हैं; वे हमारे सौर मंडल की गतिशीलता और स्वयं पृथ्वी के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। जब बृहस्पति के गुरुत्वाकर्षण के कारण क्षुद्रग्रह इन 'अनुनाद क्षेत्रों' से बाहर धकेले जाते हैं, तो उनकी नई कक्षाएँ अक्सर मंगल या पृथ्वी की कक्षाओं को पार करने लगती हैं। खगोलीय अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि पृथ्वी के करीब आने वाले अधिकांश 'नियर-अर्थ एस्टेरॉयड्स' और पृथ्वी की सतह पर गिरने वाले कई उल्कापिंड मूल रूप से इन्हीं किर्कवुड गैप्स से छिटक कर आए हैं। दूसरे शब्दों में, ये गैप मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट से आंतरिक सौर मंडल तक क्षुद्रग्रहों को धकेलने वाले "गुरुत्वाकर्षण राजमार्ग" के रूप में कार्य करते हैं।Morbidelli Alessandro Gladman Brett Cratering history of the inner solar system https://archive.org/details/sim_meteoritics-planetary-science_1998-09_33_5/page/999 Meteoritics & Planetary Science 33 5 1998 999-1016 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ नासा (NASA) - क्षुद्रग्रह बेल्ट और सौर मंडल अन्वेषण श्रेणी:क्षुद्रग्रह श्रेणी:खगोल विज्ञान श्रेणी:सौर मंडल