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प्लूटिनो
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प्लूटिनो (Plutino) खगोल विज्ञान में 'ट्रांस-नेप्च्यूनियन ऑब्जेक्ट्स' के एक विशिष्ट 'गतिशील वर्ग' को कहा जाता है। ये 'कुइपर बेल्ट' के वे पिंड हैं जो वरुण ग्रह के साथ ठीक 2:3 के माध्य-गति अनुनाद में होते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि जितने समय में वरुण सूर्य की तीन परिक्रमाएँ पूरी करता है (लगभग 164.8 वर्ष × 3 = 494 वर्ष), ठीक उतने ही समय में एक प्लूटिनो सूर्य की दो परिक्रमाएँ पूरी करता है (लगभग 247 वर्ष × 2 = 494 वर्ष)। इस समूह का नाम इसके सबसे बड़े, सबसे प्रसिद्ध और सबसे पहले खोजे गए सदस्य, प्लूटो के नाम पर रखा गया है।Jewitt David C. Morbidelli Alessandro The Solar System Beyond Neptune https://archive.org/details/solarsystembeyon0000unse University of Arizona Press 2008 978-0816527557 25-30Physics & Chemistry of the Solar System
कक्षीय विशेषताएँ और 2:3 अनुनाद
प्लूटिनो कुइपर बेल्ट के आंतरिक हिस्से का निर्माण करते हैं। इनकी कक्षीय गतिशीलता वरुण ग्रह के विशाल गुरुत्वाकर्षण द्वारा सख्ती से नियंत्रित होती है।
अर्ध-दीर्घ अक्ष: सभी प्लूटिनो सूर्य से लगभग 39.4 खगोलीय इकाई (AU) की औसत दूरी पर परिक्रमा करते हैं।
उत्केंद्रता: 'क्लासिक कुइपर बेल्ट ऑब्जेक्ट्स' की तुलना में, प्लूटिनो की कक्षाएँ अधिक अंडाकार होती हैं (आमतौर पर 0.1 से 0.3 के बीच)। इसका मतलब है कि अपनी कक्षा के एक हिस्से में (उपसौर के दौरान), ये वरुण की कक्षा के भीतर आ जाते हैं।
टकराव से सुरक्षा: यद्यपि प्लूटो और अन्य प्लूटिनो वरुण की कक्षा को पार करते हैं, लेकिन 2:3 अनुनाद एक 'सुरक्षा तंत्र' के रूप में कार्य करता है। जब एक प्लूटिनो सूर्य के सबसे करीब होता है, तो वरुण हमेशा अपनी कक्षा में उससे बहुत दूर (लगभग 90 डिग्री आगे या पीछे) होता है, जिससे इनके बीच कभी टकराव नहीं हो सकता।Malhotra Renu The Origin of Pluto's Orbit: Implications for the Solar System Beyond Neptune The Astronomical Journal 110 1995 420 10.1086/117532
उत्पत्ति और 'ग्रहीय प्रवासन'
प्लूटिनो के निर्माण को समझने के लिए खगोल भौतिकीविदों ने 'नाइस मॉडल' जैसे 'ग्रहीय प्रवासन' के सिद्धांत विकसित किए हैं।
यह माना जाता है कि सौर मंडल के शुरुआती दिनों (लगभग 4 अरब वर्ष पहले) में, ये पिंड सूर्य के बहुत करीब बने थे। लेकिन जैसे-जैसे वरुण ग्रह का अपनी वर्तमान कक्षा की ओर 'बाहरी प्रवासन' हुआ, उसका विशाल गुरुत्वाकर्षण इन छोटे पिंडों को अंतरिक्ष में बाहर की ओर धकेलने लगा। इस प्रक्रिया के दौरान, जो पिंड वरुण के 2:3 अनुनाद क्षेत्र में फँस गए, वे वरुण के साथ तालमेल बिठाकर सुरक्षित परिक्रमा करने लगे। जो पिंड इस अनुनाद में नहीं फँस पाए, वे या तो सौर मंडल से बाहर (ओर्ट बादल में) धकेल दिए गए या गुरुत्वाकर्षण विक्षोभ के कारण नष्ट हो गए।Gomes R. Levison H. F. Tsiganis K. Morbidelli A. Origin of the cataclysmic Late Heavy Bombardment period of the terrestrial planets https://archive.org/details/sim_nature-uk_2005-05-26_435_7041/page/466 Nature 435 7041 2005 466-469 10.1038/nature03676
प्रमुख प्लूटिनो
कुइपर बेल्ट में प्लूटिनो कुल ज्ञात टीएनओ (TNO) आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा बनाते हैं। इसके कुछ सबसे प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
प्लूटो: यह सबसे बड़ा ज्ञात प्लूटिनो और एक 'बौना ग्रह' है, जिसके पाँच अपने प्राकृतिक उपग्रह हैं।
ऑर्कस: 2004 में खोजे गए इस विशाल प्लूटिनो को अक्सर "एंटी-प्लूटो" कहा जाता है। ऑर्कस और प्लूटो की कक्षाएँ बहुत समान हैं, लेकिन वे अनुनाद के कारण हमेशा सूर्य के विपरीत दिशाओं में रहते हैं।Brown Michael E. Trujillo Chadwick A. Rabinowitz David L. Discovery of a Candidate Inner Oort Cloud Planetoid https://archive.org/details/sim_astrophysical-journal_2004-12-10_617_1/page/645 The Astrophysical Journal 617 1 2004 645-649 10.1086/422095
इक्सियोन: 2001 में खोजा गया यह एक बड़ा प्लूटिनो है, जो अपने लाल रंग और बर्फीली सतह के लिए जाना जाता है।
हुया: 2000 में खोजा गया यह पिंड भी इसी अनुनाद समूह का एक प्रमुख और चमकीला हिस्सा है।https://minorplanetcenter.net/iau/lists/t_plutinos.html List of Known Trans-Neptunian Objects (Plutinos) Minor Planet Center 25 जून 2026
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
नासा (NASA) - प्लूटो और कुइपर बेल्ट
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