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योगेश चन्द्र चटर्जी
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योगेश चन्द्र चटर्जी (1895 - 2 अप्रैल 1960) मूलत: बंगाल के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। वे बंगाल की अनुशीलन समिति व संयुक्त प्रान्त (अब उत्तर प्रदेश) की हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के सक्रिय सदस्य थे। कुल मिलाकर वे एक सच्चे स्वतन्त्रता सेनानी थे। बंगाल की अनुशीलन समिति में काम करते हुए उन्हें पुलिस द्वारा अनेक प्रकार की अमानुषिक यातनायें दी गयीं किन्तु वे टस से मस न हुए। उन्हें काकोरी काण्ड में आजीवन कारावास का दण्ड मिला था। स्वतन्त्र भारत में वे राज्य सभा के सांसद भी रहे। चिरकुँवारे योगेश दा ने कुछ पुस्तकें भी लिखी थीं जिनमें अंग्रेजी पुस्तक इन सर्च ऑफ फ्रीडम उल्लेखनीय है।क्रान्त स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 1 1 2006 प्रवीण प्रकाशन नई दिल्ली hi 81-7783-119-4 233-234 https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 14 अक्तूबर 2013 live
संक्षिप्त जीवनी
योगेश चन्द्र चटर्जी का जन्म ढाका जिले के गावदिया गाँव में 1895 में हुआ था। 1916 में वे पहली बार गिरफ्तार हुए थे। उस समय वे अनुशीलन समिति के सक्रिय सदस्य थे। पुलिस द्वारा भयंकर यातनायें दी गयीं किन्तु वे एक ही उत्तर देते रहे - "मुझे कुछ नहीं मालूम।" मारपीट का कोई असर नही हुआ। अन्त में उनके हाथ पैर कसकर बाँध दिये और दो सिपाहियों ने उनका गुप्तांग पकडकर हस्तमैथुन द्वारा अप्राकृतिक ढँग से इतनी वार वीर्य निकाला कि खून आने लगा। उसके बाद टट्टी पेशाब से भरी बाल्टी उनके ऊपर उँडेल दी। शरीर धोने को पानी तक न दिया। मुँह में टट्टी चली गयी पर योगेश सचमुच "योगेश" हो गये। इस निमुछिये नौजवान ने मूछ वालों तक को पस्त कर दिया।क्रान्त स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 1 1 2006 प्रवीण प्रकाशन नई दिल्ली hi 81-7783-119-4 233-234 https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 14 अक्तूबर 2013 live
1924 में स्थापित हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के संस्थापक सदस्यों में योगेश दा का प्रमुख योगदान था। यही संस्था बाद में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन ऐसोसिएशन में तब्दील हो गयी।http://www.gatewayforindia.com/history/british_history4.htm Gateway of India article 3 जुलाई 2012 https://web.archive.org/web/20120629130159/http://www.gatewayforindia.com/history/british_history4.htm 29 जून 2012 dead उन्हें क्रान्तिकारी गतिविधियों में भाग लेने के कारण कई बार गिरफ्तार किया गया। काकोरी काण्ड के मुकदमे के फैसले में उन्हें 1926 में पहले 10 वर्ष की सजा सुनायी गयी थी जिसे बाद में आजीवन कारावास में बदल दिया गया।
1937 में जेल से छूटकर आने के बाद उन्होंने पहले कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी बनायी। कुछ ही वर्षों बाद उनका उस पार्टी से मोहभंग हो गया और उन्होंने 1940 में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का गठन किया। 1940 से लेकर 1953 तक लगातार वे इसके जनरल सेक्रेटरी रहे। 1949 में केवल एक वर्ष के लिये यूनाइटेड सोशलिस्ट ऑर्गनाइजेशन के वाइस प्रेसीडेण्टhttp://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/prev90c.htm Rajyasabha Who's Who 3 जुलाई 2012 https://archive.today/20030610174407/http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/prev90c.htm 10 जून 2003 dead रहने के पश्चात् वे आल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के, जो रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का ही एक आनुषंगिक संगठन था, 1949 से लेकर 1953 तक लगातार वाइस प्रेसीडेण्ट रहे।http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/prev90c.htm Rajyasabha Who's Who 3 जुलाई 2012 https://archive.today/20030610174407/http://rajyasabha.nic.in/kiosk/whoswho/prev90c.htm 10 जून 2003 dead
स्वतन्त्र भारत में उनका झुकाव कांग्रेस की ओर हो गया और वे उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के सांसद निर्वाचित हुए। 1956 से 1960 तक अपनी मृत्यु पर्यन्त वे लगातार 4 वर्ष राज्य सभा के सदस्य रहे।http://164.100.24.167:8080/members/alphabeticallist_all_terms.asp?alphabet=C List of Rajyasabha members 3 जुलाई 2012 https://web.archive.org/web/20060418043308/http://164.100.24.167:8080/members/alphabeticallist_all_terms.asp?alphabet=C 18 अप्रैल 2006 dead
लेखन कार्य
योगेश दा काकोरी काण्ड से पूर्व ही हावड़ा रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिये गये थे। नजरबन्दी की हालत में ही इन्हें काकोरी काण्ड के मुकदमे में घसीट कर लाया गया था। उन्होंने जेल से छूटकर आने के बाद विवाह नहीं किया, आजीवन अविवाहित ही रहे। उन्होंने कुछ पुस्तकें भी लिखी थीं जिनमें उनकी अंग्रेजी में लिखी पुस्तक इन सर्च ऑफ फ्रीडम काफी चर्चित हुई।क्रान्त स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 1 1 2006 प्रवीण प्रकाशन नई दिल्ली hi 81-7783-119-4 233-234 https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 14 अक्तूबर 2013 live योगेश दा की एक अन्य पुस्तक इण्डियन रिव्यूलूशनरीज़ इन कॉन्फ्रेंस भी अंग्रेजी में ही प्रकाशित हुई। उनकी लिखी हुई दोनों पुस्तकों का विवरण इस प्रकार है:
इन सर्च ऑफ फ्रीडम: 1957, प्रकाशक परेश चन्द्र चटर्जी, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी अमरीका 598 पृष्ठhttp://books.google.co.in/books?id=45M5AQAAIAAJ&q=inauthor:%22Jogesh+Chandra+Chatterji%22&dq=inauthor:%22Jogesh+Chandra+Chatterji%22&hl=en&sa=X&ei=WyogU6K3HsTYrQefo4H4AQ&ved=0CC0Q6AEwAA In search of freedom - Bibliographic information 12 मार्च 2014 https://web.archive.org/web/20140312212204/http://books.google.co.in/books?id=45M5AQAAIAAJ&q=inauthor:%22Jogesh+Chandra+Chatterji%22&dq=inauthor:%22Jogesh+Chandra+Chatterji%22&hl=en&sa=X&ei=WyogU6K3HsTYrQefo4H4AQ&ved=0CC0Q6AEwAA 12 मार्च 2014 live
इण्डियन रिव्यूलूशनरीज़ इन कॉन्फ्रेंस: 1959, प्रकाशक के एल मुखोपाध्याय, मिशीगन यूनीवर्सिटी, 77 पृष्ठIndian revolutionaries in conference - Bibliographic information
सन्दर्भ
इन्हें भी देखें
काकोरी काण्ड
राम प्रसाद 'बिस्मिल'
बाहरी कड़ियाँ
इन सर्च ऑफ फ्रीडम (गूगल बुक्स)
मुक्तधारा में लेख
Chatterjee, Jogesh Chandra Chatterjee Yogesh Chandra भारतीय राजनीतिज्ञ 1895 1969
श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम
श्रेणी:सांसद
श्रेणी:लेखक