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चेक गणराज्य में हिन्दी
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चेक गणराज्य के प्राग भाषा विद्यालय के शाम के समय पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम में हिन्दी भाषा भी पढ़ाई जाती है। हिन्दी भाषा पढने इस देश के युवकों का उत्साह छात्रों की अच्छी-खासी संख्या से लगाया जा सकता है।
स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र
भारतीय दूतावास और उसका स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (SVCC) चेक गणराज्य में दक्षिण एशियाई भाषाई अध्ययन के समृद्ध इतिहास को सक्रिय रूप से उजागर कर रहे हैं। चेक गणराज्य—और विशेष रूप से प्राग—यूरोप में 'इंडोलॉजी' (भारतविद्या) की सबसे पुरानी और सबसे सम्मानित परंपराओं में से एक है।
चेक गणराज्य में हिंदी और उर्दू (जिन्हें अक्सर ऐतिहासिक रूप से "हिंदुस्तानी" के दायरे में रखा गया है) का अध्ययन केवल एक आधुनिक राजनयिक पहल नहीं है, बल्कि एक सदी से अधिक की विद्वतापूर्ण विरासत है।
हिन्दी भाषा के प्रति रुचि के कुछ उल्लेखनीय पहलू
19वीं शताब्दी के मध्य से ही प्राग भारतीय भाषाओं के लिए "ज्ञान का केंद्र" रहा है। कुछ प्रमुख हस्तियों और मील के पत्थर इस प्रकार हैं:
विंत्सेंत्स लेस्नी (1882–1953): इन्हें अक्सर आधुनिक चेक भारतविद्या का जनक माना जाता है। वे रवींद्रनाथ ठाकुर के करीबी मित्र थे और उन्होंने उनकी रचनाओं का सीधे बंगाली से चेक भाषा में अनुवाद करने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्होंने चार्ल्स विश्वविद्यालय में आधुनिक भारतीय भाषाओं के औपचारिक अध्ययन की शुरुआत की।
विंत्सेंत्स पोरीज़्का (1905–1982): हिंदी अध्ययन में एक महान व्यक्तित्व, पोरीज्का ने यूरोप में उपयोग की जाने वाली सबसे व्यापक हिंदी व्याकरण और पाठ्यपुस्तकों की रचना की। "हिंदुस्तानी" पर उनके काम ने चेक छात्रों के लिए हिंदी और उर्दू के बीच की दूरी को पाटने में मदद की।
चार्ल्स विश्वविद्यालय : चार्ल्स विश्वविद्यालय का 'इंस्टिट्यूट ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन स्टडीज' इन अध्ययनों का प्राथमिक केंद्र बना हुआ है, जो हिंदी, संस्कृत और कभी-कभी उर्दू, बंगाली और तमिल में पाठ्यक्रम प्रदान करता है।http://www.urdustudies.com/pdf/10/UrduCzech.pdf संग्रहीत प्रति 15 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20160304121130/http://www.urdustudies.com/pdf/10/UrduCzech.pdf 4 मार्च 2016 dead
हिंदी और उर्दू : एक साझा इतिहास: चेक शैक्षणिक परंपरा में, हिंदी और उर्दू को अक्सर "हिंदुस्तानी" के दृष्टिकोण से पढ़ा गया है। जहाँ आज हिंदी को औपचारिक डिग्री विषय के रूप में अधिक व्यापक रूप से पढ़ाया जाता है, वहीं उर्दू भाषाई अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है, विशेष रूप से:
भाषाई अनुसंधान : चार्ल्स विश्वविद्यालय के 'इंस्टिट्यूट ऑफ फॉर्मल एंड एप्लाइड लिंग्विस्टिक्स' जैसे संस्थानों ने अंग्रेजी-से-उर्दू मशीन अनुवाद जैसी उन्नत परियोजनाओं पर काम किया है।
राजनयिक प्रचार : भारतीय दूतावास अक्सर 'हिंदी दिवस' जैसे कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जहाँ काव्य पाठ में अक्सर उन कवियों की रचनाएँ शामिल होती हैं जिन्होंने साझा हिंदुस्तानी/उर्दू परंपरा में लिखा था, जो "गंगा-जमुनी तहजीब" का उत्सव मनाते हैं।
पारस्परिक भाषा विनिमय : दिलचस्प बात यह है कि यह संबंध "दो तरफा मार्ग" की तरह है। जहाँ भारतीय दूतावास प्राग में हिंदी और उर्दू को बढ़ावा देता है, वहीं नई दिल्ली स्थित चेक दूतावास दिल्ली विश्वविद्यालय में 'चेक भाषा' के अध्ययन का सक्रिय रूप से समर्थन करता है। यह पारस्परिक सहयोग सुनिश्चित करता है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और भाषाई सेतु मजबूत बना रहे।
चेक-भारतीय समाज
अंगूठाकार|चेक भारतीय समाज का लोगो
यह एक NGO (गैर-सरकारी संगठन) है जिसका उद्देश्य चेक और भारतीय समुदायों के बीच जुड़ाव को मजबूत करना है।
यह दोनों देशों के लोगों को जोड़ने और संस्कृतियों का आदान-प्रदान करने के लिए काम करता है, जैसा कि इसके नाम और लोगो (चिह्न) से पता चलता है।
रेडियो प्राग इंटरनैश्नल के अंतरगत इसकी रेडियो सेवाएँ भी मौजूद हैं। Česko-indický spolek Czech-Indian Association https://cesky.radio.cz/cesko-indicky-spolek-8709290 Radio Prague International cs January 22, 2026 Český rozhlas https://web.archive.org/web/20260330044132/https://cesky.radio.cz/cesko-indicky-spolek-8709290 30 मार्च 2026 dead
सन्दर्भ
श्रेणी:विश्व में हिन्दी